

प्रविष्टि तिथि: 04 AUG 2026 5:57PM
‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ के तहत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (आईसीएआर-एनआईबीएसएम), रायपुर में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। भारत सरकार के 100 सप्ताह तक चलने वाले राष्ट्रव्यापी अभियान का उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रखते हुए उन्हें वृक्षारोपण, खेलकूद और सामाजिक सेवा जैसी रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना तथा पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।

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कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के निदेशक डॉ. पी. के. राय ने अशोक का पौधा रोपकर किया। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं करते, बल्कि स्वस्थ और समृद्ध समाज की नींव को भी मजबूत करते हैं। आज लगाया गया प्रत्येक पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा, हरित वातावरण और सुरक्षित भविष्य का संदेश है। उन्होंने युवाओं से अधिक से अधिक पौधे लगाने के साथ उनकी नियमित देखभाल करने का आह्वान किया।
डॉ. राय ने कहा कि नशामुक्त भारत का संकल्प तभी साकार होगा, जब युवा अपनी ऊर्जा को रचनात्मक और सकारात्मक कार्यों में लगाएंगे। वृक्षारोपण पर्यावरण संरक्षण के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने का प्रभावी माध्यम है। प्रकृति से जुड़ाव युवाओं को सकारात्मक जीवन मूल्यों की ओर प्रेरित करता है।
कार्यक्रम में संस्थान के स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों, वैज्ञानिकों, तकनीकी अधिकारियों, कर्मचारियों तथा अन्य कार्मिकों ने मिलकर संस्थान परिसर में लगभग 75 अशोक के पौधे रोपे। प्रतिभागियों ने लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण का संकल्प भी लिया।
इस अवसर पर संयुक्त निदेशक डॉ. पंकज शर्मा और डॉ. अनिल दीक्षित ने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक प्रतिवर्ष कम से कम एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण की जिम्मेदारी निभाए, तो पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। संस्थान द्वारा आयोजित यह अभियान युवाओं को प्रकृति से जोड़ने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने तथा विकसित और नशामुक्त भारत के राष्ट्रीय संकल्प को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. के. सी. शर्मा ने किया।





















