
Raipur chhattisgarh VISHESH / इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर पेड विज्ञापनों में बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री को लेकर मेटा को नोटिस जारी किया है. इंस्टाग्राम भारत में पैसे लेकर ऐसे विज्ञापन चला रहा है जिसके ज़रिए बच्चे-बच्चियों के यौन शोषण की सामग्री का प्रसार हो रहा है.
इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों के मामले में केंद्रीय मंत्री ने मेटा को तलब किया l इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को मेटा से स्पष्टीकरण मांगने और उसे तलब करने का निर्देश दिया है.इंस्टाग्राम पर विज्ञापन तभी छपते हैं जब उसकी मॉडरेशन टेकनॉलॉजी इन्हें अप्रूव करती है

भारत में ऑनलाइन बाल यौन शोषण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, सीबीआई ने 14 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 76 ठिकानों पर मंगलवार को ऑनलाइन बाल यौन उत्पीड़न और शोषण के मामले में छापेमारी की है.इससे पहले जुलाई 2020 में असम राज्य की पुलिस को एक ‘संदेहास्पद’ फ़ेसबुक पेज को लेकर एक शिकायत मिली. ये जानकारी उन्हें एक ग़ैर-सरकारी संस्था के माध्यम से मिली थी.इस संस्था के ट्विटर पन्ने पर इस फ़ेसबुक पेज के बारे में एलर्ट किया गया था कि इस पन्ने पर बच्चों के वीडियो और पोस्ट हैं, और ये पेज शायद बच्चों के यौन उत्पीड़न के वीडियो या सीसैम (चाइल्ड सेक्शुअल अब्यूज़ मेटीरियल) को बढ़ावा दे रहा है.
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सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए जस्टिस मदन लोकूर ने कहा कि वे चिंतित हैं कि इंस्टाग्राम “आपराधिक गतिविधि में शामिल हो कर पैसे बना रहा है.जस्टिस मदन लोकूर ने कहा भारतीय क़ानून के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को यूज़र के कंटेंट की ज़िम्मेदारी से क़ानूनी सुरक्षा होने के बावजूद, “प्लेटफ़ॉर्म अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता.”
भारत में बाल यौन शोषण और हिंसक सामग्री और अडल्ट पॉर्नोग्राफी का प्रचार आपराधिक जुर्म है. मेटा की पॉलिसी कहती है कि विज्ञापन में वयस्कों के गुप्तांग या नग्नता नहीं दिखाई जा सकती और न ही ऐसा कोई कंटेंट जो बच्चे-बच्चियों का यौन शोषण करे या उन्हें इसके ख़तरे में डाले.आलोचकों ने पहले भी इस प्लेटफ़ॉर्म पर आपराधिक सामग्री के प्रसार के ख़िलाफ़ उपयुक्त क़दम न उठाने का आरोप लगाया है.

फेसबुक में बतौर वाइस-प्रेसिडेंट काम कर चुके ब्रायन बोलेंड ने कहा कि इंस्टाग्राम का एल्गोरिदम यूज़र को “थोड़ा एक्सट्रीम, थोड़ी और यौन लालसा पैदा करनेवाला” कंटेंट दिखाकर प्लेटफ़ॉर्म पर बनाए रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है.बोलैंड ने कहा, “ऐसा नहीं है कि एल्गोरिदम तय करता है कि लोगों को बाल यौन शोषण और हिंसा के लिए उकसाया जाए. लेकिन जब उसे ज़िम्मेदारी से नियंत्रित और निर्देशित नहीं किया जाता और उसका मक़सद सिर्फ़ क्लिक और रेवेन्यू बढ़ाना है तो ऐसे नतीजे आ सकते हैं. ख़ासकर तब, जब इन सिस्टम की सुरक्षा के लिए सख़्त, सक्रिय निगरानी न हो.”
उनके मुताबिक़, साल 2009 – 10 के दौरान उन्होंने यूज़र को स्कैम करनेवाले विज्ञापनों को हटाने के प्रोजेक्ट की अगुवाई की. इसका मतलब था कि उन्हें “यूज़र की सुरक्षा और उनके अनुभव के लिए ये करने दिया गया जबकि इससे कंपनी के रेवेन्यू पर बड़ा असर पड़ा.”
बोलैंड ने कहा, “मुझे लगता है कि तकलीफ़देह बात यह है कि वक़्त के साथ कंपनी में रेवेन्यू और सुरक्षा या रेवेन्यू और यूज़र अनुभव के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, इस पर बहुत बात होने लगी है.”
उन्होंने बताया कि साल 2025 में उन्होंने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट डिलीट कर दिया और कहा, “अगर बहुत सारे लोग एक साथ कहने लगें कि ‘मैं (इंस्टाग्राम) छोड़ रहा/रही हूँ. मेरा हो गया, भूल जाओ,’ तो कंपनी को ध्यान देना पड़ेगा.”
इन विज्ञापनों में, ‘रेप वीडियो’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है. यूज़र को मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम के चैनल के लिंक दिए गए हैं. यहां वे इन सामग्रियों को सिर्फ़ 99 रुपये में ख़रीद सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक़, सरकार ने इंस्टाग्राम को सीएसईएएम (बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री) को बढ़ावा देने और उस तक पहुंच को आसान बनाने वाले सभी विज्ञापनों और कंटेंट को हटाने का आदेश दिया है.
साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मेटा से सात दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है. सूत्रों के मुताबिक ये नोटिस कल यानी शनिवार की शाम को जारी किया गया है.





















