

मानसून में देरी के बीच किसानों को जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियां और वैकल्पिक फसलें अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया
प्रविष्टि तिथि: 15 JUL 2026 6:14PM by PIB Raipur
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर)-राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान (एनआईबीएसएम), रायपुर ने आज जनजातीय उप-योजना (टीएसपी) के तहत एक अत्यंत प्रभावी ‘किसान-वैज्ञानिक संवाद एवं कटाई-उपरांत मूल्य संवर्धन मशीनरी और कृषि उपकरण वितरण कार्यक्रम’ का आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के जनजातीय किसान समुदायों का तकनीकी सशक्तिकरण करना, उनके कठिन शारीरिक श्रम को कम करना और उनके लिए अतिरिक्त आय सृजन के अवसर पैदा करना है।


स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने और ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए, संस्थान ने बैटरी चालित स्प्रेयर, ओसाई पंखे (विनोइंग फैन), पल्वेराइजर (पीसने वाली मशीन), मिनी राइस मिल, पावर टिलर और लैंड लेवलर (भूमि समतल करने वाले उपकरण) सहित विभिन्न कृषि उपकरणों का वितरण किया। विशेष रूप से, जमीनी स्तर पर कटाई-उपरांत प्रसंस्करण को बढ़ावा देने, इनपुट-उपयोग दक्षता में सुधार करने और टिकाऊ आजीविका के अवसर पैदा करने के लिए स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को मिनी राइस मिल और पल्वेराइजर वितरित किए गए।
सभा को संबोधित करते हुए, आईसीएआर-एनआईबीएसएम के निदेशक डॉ. पी.के. राय ने जनजातीय किसानों के समग्र उत्थान के लिए संस्थान की अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। मानसून में देरी से उत्पन्न चुनौतियों पर चर्चा करते हुए डॉ. राय ने किसानों को जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और समय पर फसल सुरक्षा की ओर बढ़ने की सलाह दी। उन्होंने सुझाव दिया कि जिन क्षेत्रों में पारंपरिक धान की खेती के लिए पर्याप्त बारिश नहीं हुई है, वहां किसान स्थानीय विशेषज्ञ परामर्श के अनुसार दालों जैसी वैकल्पिक फसलों की बुआई पर विचार कर सकते हैं।
लाभार्थियों के साथ बातचीत करते हुए, समन्वयक और संयुक्त निदेशक डॉ. पंकज शर्मा ने खेती की लागत को कम करने पर महत्वपूर्ण वैज्ञानिक मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने के साथ-साथ समग्र फसल उत्पादकता बढ़ाने के लिए विवेकपूर्ण पोषक तत्वों का उपयोग, आवश्यकता-आधारित सिंचाई और वैज्ञानिक फसल अनुशंसाओं को अपनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
डिजिटल विस्तार सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक कदम उठाते हुए, कार्यक्रम में भाग लेने वाले किसानों ने ‘किसान सारथी’ ऐप पर आईसीएआर के फीडबैक पोल (प्रतिक्रिया सर्वेक्षण) में उत्साहपूर्वक भाग लिया। उनके द्वारा दी गई प्रतिक्रिया सरकार को किसान-केंद्रित डिजिटल कृषि सलाहकार सेवाओं को अधिक संवादात्मक और उत्तरदायी बनाने में मदद करेगी।
इस कार्यक्रम में पचेरी, मढ़ी, गुमा, भरवाडीह और मोहदी गांवों के 243 किसानों और महिला किसानों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। इस अवसर पर पचेरी के सरपंच श्री अभिषेक वर्मा, मढ़ी की सरपंच श्रीमती कल्याणी पाठक और सात स्थानीय स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की सदस्य उपस्थित रहीं। इस सफल कार्यक्रम का समन्वय डॉ. प्रियंका मीणा और उनकी टीम द्वारा किया गया, जिसमें वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पी. मूवेंथन, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्री मलय बिष्ट के साथ-साथ संस्थान के अन्य वैज्ञानिकों और प्रशासनिक कर्मचारियों का सक्रिय सहयोग रहा।





















