
Raipur chhattisgarh VISHESH / रायपुर, 3 सितंबर 2026:
दिल की धड़कन भले ही खामोश हो, लेकिन वह संघर्ष, उम्मीद और इलाज की एक ऐसी कहानी कह सकती है, जिसे सुनना बेहद जरूरी है।

इसी संवेदनशील संदेश के साथ कलिंगा यूनिवर्सिटी, रायपुर ने अपने अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थी समुदाय के लिए “अनसुनी धड़कन सुनें – अफ़्रीका में जन्मजात हृदय रोग की देखभाल” विषय पर एक विशेष संवाद सत्र आयोजित किया। कार्यक्रम ने जन्मजात हृदय रोग जैसे गंभीर, लेकिन अक्सर अनदेखे रह जाने वाले वैश्विक स्वास्थ्य मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए एक सार्थक मंच प्रदान किया।

कार्यक्रम में कलिंगा यूनिवर्सिटी के अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों ने भाग लिया और डॉ. अतुल सुरेंद्र प्रभु, सीनियर कंसल्टेंट पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट और को-फ़ाउंडर, ग्लोबल CHD एलायंस के साथ संवाद किया।
डॉ. प्रभु ने केवल बीमारी से जुड़े आंकड़ों और चिकित्सा संबंधी जानकारी तक चर्चा को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन बच्चों और परिवारों की वास्तविक चुनौतियों को सामने रखा, जो समय पर इलाज और विशेषज्ञ हृदय चिकित्सा की सुविधा पाने के लिए संघर्ष करते हैं। उन्होंने बताया कि समय पर पहचान, सही उपचार और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं तक समान पहुंच किसी बच्चे के जीवन की दिशा बदल सकती है।
हर आंकड़े के पीछे एक बच्चा है।
सत्र के दौरान बच्चों और उनके परिवारों की वास्तविक परिस्थितियों से जुड़ी कहानियों के माध्यम से यह समझाया गया कि इलाज में देरी किस तरह गंभीर परिणामों का कारण बन सकती है, वहीं समय पर उपचार किसी बच्चे को एक सामान्य और बेहतर जीवन जीने का अवसर भी दे सकता है।
भारत, ऑस्ट्रेलिया और ताइवान में अपने पेशेवर अनुभवों के आधार पर डॉ. प्रभु ने वैश्विक सहयोग, तकनीक, प्रशिक्षण, नवाचार और ज्ञान के आदान-प्रदान की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीवन बचाने के प्रयास केवल अल्पकालिक चिकित्सा अभियानों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञों को तैयार करने और मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्थाएं विकसित करने की दिशा में निरंतर काम होना चाहिए।
चर्चा में टेलीमेडिसिन, AI आधारित डायग्नोसिस, आधुनिक उपचार तकनीकों और मोबाइल कार्डियक केयर जैसी संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला गया। ये तकनीकें दूरदराज के क्षेत्रों तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
विद्यार्थियों के लिए यह सत्र केवल एक अकादमिक कार्यक्रम नहीं था। इसने उन्हें कक्षा और पाठ्यक्रम से आगे बढ़कर यह समझने का अवसर दिया कि अलग-अलग देशों और समुदायों में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां किस प्रकार अलग हो सकती हैं। साथ ही, भविष्य के पेशेवरों के रूप में वे अधिक समावेशी और संवेदनशील स्वास्थ्य व्यवस्था के निर्माण में किस तरह योगदान दे सकते हैं, इस पर भी विचार करने का अवसर मिला।
यह पहल Kalinga University की वैश्विक exposure, अंतरराष्ट्रीय सहभागिता और सार्थक ज्ञान-विनिमय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। विश्वविद्यालय अपने विविध अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थी समुदाय को वैश्विक विशेषज्ञों, विचारों और महत्वपूर्ण मुद्दों से जोड़ने के लिए निरंतर ऐसे मंच उपलब्ध करा रहा है।
कार्यक्रम का समन्वय अंतर्राष्ट्रीय प्रवेश और समन्वय टीम द्वारा किया गया, जिसमें श्रीमती परविंदर शेष, श्री जितेश महंत, सुश्री यशु रायकर और सुश्री आयुषी गंगराडे शामिल रहे।
कार्यक्रम का संदेश सरल था, लेकिन सीमाओं और आंकड़ों से कहीं बड़ा—
हर धड़कन मायने रखती है। हर बच्चे को एक मौका मिलना चाहिए।
क्योंकि सवाल सिर्फ यह नहीं है कि हम उस धड़कन को सुन सकते हैं या नहीं—
सवाल यह है कि क्या हम उस धड़कन की आवाज़ को समझने के लिए तैयार हैं।





















