




Raipur chhattisgarh VISHESH / राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी संस्थान रायपुर के कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग द्वारा 2 सितंबर 2026 को तीन दिवसीय 5वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन कंप्यूटिंग, कम्युनिकेशन एवं लर्निंग (COCOLE-2026) का शुभारंभ किया गया। इस सम्मेलन में कंप्यूटिंग, कम्युनिकेशन एवं लर्निंग के क्षेत्र में उभरते विकास एवं नवीनतम तकनीकी प्रगति पर चर्चा के लिए शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, विशेषज्ञों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. विद्याधर सुबुधि, निदेशक, एन आई टी वारंगल एवं प्रोफेसर, आई आई टी गोवा; डॉ. समीर बाजपेयी, निदेशक (प्रभारी), एन आई टी रायपुर; प्रो. नरेंद्र डी. लोंधे, रजिस्ट्रार, एन आई टी रायपुर; प्रो. दिलीप सिंह सिसोदिया, विभागाध्यक्ष, कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग, एन आई टी रायपुर; प्रो. सिबा के. उदगाता, प्रोफेसर, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद तथा प्रो. प्रशांत कुमार जाना, प्रोफेसर, आई एस एम् धनबाद की गरिमामयी उपस्थिति में दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्रीय गीत के साथ हुआ। सम्मेलन का समन्वय एन आई टी रायपुर के डॉ. बुनिल कुमार बालाबंतराय, प्रो. मधुकृष्णा प्रियदर्शिनी, प्रो. जितेंद्र कुमार राउत तथा प्रो. मनु वर्धन, प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा किया गया।
औपचारिक उद्घाटन एवं अतिथियों के स्वागत के पश्चात डॉ. मधुकृष्णा प्रियदर्शिनी ने उपस्थित गणमान्य अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का स्वागत किया तथा संपूर्ण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि सम्मेलन के लिए भारत एवं विदेशों से कुल 285 शोध-पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 42 शोध-पत्रों को प्रस्तुति के लिए चयनित किया गया। प्रो. दिलीप सिंह सिसोदिया ने कंप्यूटिंग, कम्युनिकेशन एवं लर्निंग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए कहा कि वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एवं मशीन लर्निंग (ML) अत्यंत उपयोगी एवं प्रासंगिक तकनीकें बन चुकी हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. समीर बाजपेयी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तेजी से विकसित हो रही तकनीकों के संदर्भ में सम्मेलन की विषयवस्तु की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने शासन, स्वास्थ्य सेवा, कृषि एवं आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में जिम्मेदार एवं अनुप्रयोग-आधारित तकनीकी विकास की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उभरती हुई तकनीकों का विकास व्यावहारिक उपयोग एवं सामाजिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने शोधकर्ताओं को मानवीय एवं विकास संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए अंतर-विषयक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
प्रो. नरेंद्र डी. लोंढे ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग द्वारा महत्वपूर्ण एवं उभरती तकनीकों, अनुसंधान, प्रकाशन तथा परामर्श के क्षेत्र में की जा रही शैक्षणिक पहलों पर प्रकाश डाला। प्रो. प्रशांत कुमार जना ने प्रारंभिक कंप्यूटर प्रणालियों से लेकर क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं क्वांटम तकनीक तक कंप्यूटिंग के तेजी से हुए विकास पर चर्चा की। उन्होंने कृषि, यातायात प्रबंधन एवं स्मार्ट प्रणालियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में इन तकनीकों के अनुप्रयोगों पर भी प्रकाश डाला। प्रो. सिबा के. उदगाता ने जिम्मेदार, मजबूत एवं नैतिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने AI प्रणालियों के विकास एवं उपयोग में पहुंच, दक्षता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
मुख्य अतिथि प्रो. विद्याधर सुबुधि ने कंप्यूटिंग, कम्युनिकेशन एवं लर्निंग के बदलते परिदृश्य पर चर्चा करते हुए स्वास्थ्य सेवा, स्मार्ट ग्रिड, विद्युत प्रणालियों, विनिर्माण एवं अन्य क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने साइबर सुरक्षा, विश्वसनीय ए आई तथा उभरती तकनीकों के जिम्मेदार उपयोग के महत्व पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों को अनुसंधान, शिक्षण एवं समस्या-समाधान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए ए आई को एक उपयोगी साधन के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
सम्मेलन के औपचारिक उद्घाटन का समापन COCOLE-2026 के कॉन्फ्रेंस बुकलेट के विमोचन के साथ हुआ। इसके पश्चात डॉ. बुनिल कुमार बालाबंतराय ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।





















