
Dr manpreet singh
Raipur chhattisgarh VISHESH /इज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) का अर्थ है- किसी देश या राज्य में नया व्यापार या कारोबार शुरू करना और उसे चलाना कितना आसान है। जिस देश में नियम जितने सरल, लाइसेंस प्रक्रिया जितनी पारदर्शी और दफ्तरों के चक्कर जितने कम होते हैं, वहां व्यापार करना उतना ही आसान माना जाता है।

छत्तीसगढ़ ने 16 जुलाई 2026 को ‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026’ पारित कर देश का पहला जोखिम-आधारित (रिस्क-बेस्ड) और विश्वास-आधारित (ट्रस्ट-बेस्ड) व्यावसायिक अनुमति प्रणाली लागू करने वाला राज्य बनकर एक ऐतिहासिक पहल की है। जोखिम आधारित बिजनेस परमिशन व्यवस्था लागू करने वाला इसके साथ ही राज्य देश का पहला रिस्क-बेस्ड बिजनेस अप्रूवल सिस्टम लागू करने वाला राज्य बन जाएगा.।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (विनिमय-मुक्ति एवं सुविधा) विधेयक, 2026 मे निवेशकों को मिली सरल, पारदर्शी, डिजिटल और समयबद्ध व्यवस्था डीम्ड परमिशन, स्व-प्रमाणीकरण, जोखिम-आधारित निरीक्षण और दोहरे लाइसेंसिंग दायित्वों से मुक्ति जैसे प्रावधानों के साथ अब निवेश को मिलेगा नया विश्वास, उद्योगों को नई गति और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर । आपको बता दे कि इस कानून से राज्य के 15 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को भारी राहत मिलेगी । छत्तीसगढ़ ने कारोबार और निवेश के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया है, वहीं यह पहल राज्य में नौकरशाही की लालफीताशाही को कम करने और पारदर्शी माहौल तैयार करने के लिए लाई गई है l
सरकार का दावा है कि नया कानून कारोबार शुरू करने और चलाने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और कम खर्चीला बनाएगा, वहीं राज्य में निवेश और रोजगार दोनों को बढ़ावा भी मिलेगा . इस पहल का उद्देश्य व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना और एक अधिक उद्यम-अनुकूल वातावरण तैयार करना है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने उद्योग और कारोबार को प्रोत्साहन देने की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम उठाया गया है. सरकार का मानना है कि भरोसे, स्व-घोषणा और समयबद्ध सेवाओं पर आधारित यह व्यवस्था कारोबार शुरू करने और संचालित करने में लगने वाले समय एवं लागत को कम करेगी, जबकि अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी और परीक्षण की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।

मुख्य विशेषताएं और प्रावधान
- जोखिम-आधारित वर्गीकरण: उद्योगों को उनके जोखिम स्तर के आधार पर बांटा गया है। कम जोखिम वाले उद्योगों को नियमित सरकारी निरीक्षण से मुक्ति और सेल्फ-सर्टिफिकेशन की सुविधा मिलती है
वार्षिक नवीनीकरण समाप्त: पात्र श्रेणियों के लिए हर साल लाइसेंस या अनुमति के नवीनीकरण की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है
डीम्ड अप्रूवल (स्वमेव स्वीकृति): यदि निर्धारित समय-सीमा (30 से 60 दिन) के भीतर कोई विभाग आवेदन का निपटारा नहीं करता है, तो अनुमति स्वतः स्वीकृत मानी जाएगी।
प्रथम चरण का दायरा: आठ (08) अलग-अलग विभागों की 43 महत्वपूर्ण सेवाओं को इस सुगम व्यवस्था के अंतर्गत लाया गया है सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक सरकारी सेवाओं को डिजिटल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है. भविष्य में आवश्यकता के अनुसार और सेवाओं को भी इसमें शामिल किया जा सकेगा
तीन स्तर पर होगी निगरानी : त्रि-स्तरीय निगरानी तंत्र: इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक कार्यकारी परिषद, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य-स्तरीय समिति और जिला स्तर पर कलेक्टरों के नेतृत्व में तंत्र गठित किया गया है।दोनों समितियां मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली परिषद के मार्गदर्शन में कार्य करेंगी।
MSME को सबसे ज्यादा फायदा
राज्य में 15 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) इस कानून से लाभान्वित हो सकते हैं. पानी कनेक्शन, फर्म या सोसायटी पंजीकरण, बिल्डिंग प्लान मंजूरी जैसी कई सेवाओं को पहले से आसान और तेज बनाया जाएगा. उद्योग जगत का मानना है कि इससे नए निवेश आकर्षित होंगे और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे





















