

प्रविष्टि तिथि: 30 JUL 2026 6:31PM
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर के मनोचिकित्सा विभाग ने छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण समिति के सहयोग से राज्य में संचालित आठ ओपिऑयड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी (ओएसटी) केन्द्रों को व्यापक नशा मुक्ति केन्द्रों के रूप में विकसित एवं सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम का उद्देश्य ओएसटी केन्द्रों की सेवाओं का विस्तार कर उन्हें समग्र नशा मुक्ति उपचार, परामर्श, मनोसामाजिक सहयोग तथा पुनर्वास सुविधाओं से सशक्त बनाना है।


कार्यक्रम का उद्घाटन एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) अशोक कुमार जिंदल ने किया, जबकि अध्यक्षता अधिष्ठाता डॉ. एली महापात्र ने की। इस अवसर पर मनोचिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष एवं प्राध्यापक डॉ. लोकेश कुमार सिंह, सह प्राध्यापक डॉ. आदित्य सोमानी तथा सहायक प्राध्यापक डॉ. लक्ष्मी निरिसा पी. और डॉ. विनीत पटेल उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण समिति की ओर से अतिरिक्त परियोजना संचालक डॉ. खेमराज सोनवानी, उपसंचालक विक्रांत वर्मा, सहायक संचालक हितेश माहेश्वरी, संभागीय सहायक केशव पाण्डेय सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) अशोक कुमार जिंदल ने कहा कि मादक पदार्थों की लत केवल चिकित्सीय समस्या नहीं, बल्कि गंभीर सामाजिक एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उपचार की आवश्यकता और उपलब्ध उपचार सेवाओं के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है, जिसे स्वास्थ्य संस्थानों, शासन और समाज के समन्वित प्रयासों से ही कम किया जा सकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि एम्स रायपुर राज्य में नशा मुक्ति सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए तकनीकी मार्गदर्शन, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और विशेषज्ञ सहयोग निरंतर उपलब्ध कराता रहेगा।
विशेषज्ञों ने बताया कि अब तक राज्य के आठ ओएसटी केन्द्र मुख्य रूप से इंजेक्शन के माध्यम से नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले व्यक्तियों को उपचार उपलब्ध कराते रहे हैं, जिनमें मानव प्रतिरक्षा अपूर्णता विषाणु (एचआईवी) संक्रमण, अर्जित प्रतिरक्षा अल्पता सिंड्रोम (एड्स) तथा अन्य रक्तजनित संक्रमणों का जोखिम अधिक होता है। इन केन्द्रों का विस्तार कर अब इन्हें ऐसे समग्र नशा मुक्ति केन्द्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां ओपिऑयड निर्भरता के साथ-साथ अन्य मादक पदार्थों की लत से ग्रसित लोगों को भी उपचार, मनोसामाजिक परामर्श, पुनर्वास और अनुवर्ती देखभाल की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य के आठ ओएसटी केन्द्रों से लगभग 50 प्रतिभागी शामिल हुए हैं, जिनमें चिकित्सा अधिकारी, स्टाफ नर्स, काउंसलर, डेटा प्रबंधक तथा सहायक नर्स मिडवाइफ (एएनएम) शामिल हैं। दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ नशा मुक्ति उपचार, ओपिऑयड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी, मनोसामाजिक परामर्श, रोगी प्रबंधन, अभिलेख संधारण तथा उपचार सेवाओं की गुणवत्ता सुधार जैसे विषयों पर व्याख्यान और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।
एम्स रायपुर के मनोचिकित्सा विभाग ने बताया कि छत्तीसगढ़ में गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और सतत नशा मुक्ति सेवाओं के विस्तार के लिए भविष्य में भी इस प्रकार के क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे। संस्थान ने इस पहल को छत्तीसगढ़ शासन और एम्स रायपुर के बीच समन्वित सहयोग का एक महत्वपूर्ण मॉडल बताया, जो राज्य में नशा मुक्ति सेवाओं को अधिक प्रभावी और व्यापक बनाने की दिशा में अहम कदम साबित होगा।





















