

इंजीनियरिंग एवं विज्ञान के पाठ्यक्रम में मानवाधिकार और पर्यावरण अध्ययन को शामिल करने की आवश्यकता: प्रो. कन्हैया त्रिपाठी
Raipur chhattisgarh VISHESH / इंजीनियरिंग और विज्ञान शिक्षा के मुख्य पाठ्यक्रम में मानवाधिकारों तथा पर्यावरण अध्ययन को शामिल किया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थी भविष्य की सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान करने के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो सकें। यह बात राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), भारत सरकार के विशेष मॉनिटर प्रो. कन्हैया त्रिपाठी ने कही।
प्रो. त्रिपाठी ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई के अपने प्रवास के दौरान संस्थान के नेतृत्व, संकाय सदस्यों, अधिकारियों और विद्यार्थियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने शिवनाथ हॉस्टल का दौरा कर नवागंतुक विद्यार्थियों से भी मुलाकात की।


भावी इंजीनियरों और वैज्ञानिकों को समाज की व्यापक समझ से लैस करने की आवश्यकता पर बल देते हुए प्रो. त्रिपाठी ने समकालीन सामाजिक चुनौतियों, लैंगिक समानता, मानवाधिकारों और विद्यार्थियों के समग्र कल्याण पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण एक प्रगतिशील तथा समावेशी समाज के निर्माण में योगदान देगा और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएगा।
आईआईटी भिलाई के निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश एवं संस्थान के डीन मंडली ने प्रो. त्रिपाठी का स्वागत किया तथा संस्थान द्वारा संचालित विभिन्न पहलों की जानकारी दी। जनजातीय विकास और छात्र कल्याण के क्षेत्र में आईआईटी भिलाई के प्रयासों की सराहना करते हुए प्रो. त्रिपाठी ने संस्थान को लैंगिक समानता और मानवाधिकार संरक्षण से जुड़े अपने सर्वोत्तम अभ्यासों (Best Practices) को दस्तावेज के रूप में सहेजने के लिए प्रोत्साहित किया।
बातचीत के दौरान प्रो. त्रिपाठी ने आईआईटी भिलाई, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापनों (MoUs) के माध्यम से संस्थागत संबंधों को मजबूत करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने मानवाधिकारों और कल्याण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से संस्थान के हैप्पीनेस क्लब का नाम बदलकर ह्यूमन राइट्स एंड हैप्पीनेस क्लब करने का सुझाव भी दिया।
इसके अलावा, उन्होंने छत्तीसगढ़ में मानवाधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एप्लिकेशन विकसित करने तथा विभिन्न आईआईटी एवं एनआईटी के विद्यार्थियों के लिए एक राष्ट्रीय स्तरीय इनोवेशन फेयर आयोजित करने का प्रस्ताव दिया।
प्रो. त्रिपाठी ने आईआईटी भिलाई की वर्तमान गतिविधियों की समीक्षा की और प्रो. राजीव प्रकाश के नेतृत्व में संस्थान की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। इन सुझावों के उत्तर में, आईआईटी भिलाई ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के मार्गदर्शन और सहयोग से मानवाधिकार और पर्यावरण विषय पर एक विशेष पाठ्यक्रम शुरू करने में गहरी रुचि व्यक्त की।





















