

प्रविष्टि तिथि: 27 JUL 2026 6:00PM
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) – राष्ट्रीय जैविक स्ट्रैस प्रबंधन संस्थान (आईसीएआर–एनआईबीएसएम), रायपुर ने आज ब्रह्माकुमारीज़ के वैज्ञानिक एवं इंजीनियर प्रभाग की एक पहल, राष्ट्रव्यापी “इको केयर एंड डिजास्टर मैनेजमेंट” (पारिस्थितिकी देखभाल एवं आपदा प्रबंधन) अभियान के तहत “तनाव प्रबंधन और प्रकृति संरक्षण” पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में मानसिक कल्याण और पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व के बीच महत्वपूर्ण संबंध पर ध्यान केंद्रित करने के लिए संस्थान के नेतृत्व, वैज्ञानिकों और शोध कर्मियों ने भाग लिया।

मुख्य भाषण देते हुए वैज्ञानिक एवं इंजीनियर प्रभाग के वरिष्ठ राजयोगी तथा दिल्ली ज़ोनल समन्वयक डॉ. पीयूष गोयल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सच्ची सहनशीलता और जुझारूपन आंतरिक शक्ति एवं भावनात्मक संतुलन से शुरू होता है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति मानसिक रूप से सशक्त होते हैं, वे जीवन की चुनौतियों और बाहरी संकटों का सामना करने के लिए बेहतर ढंग से सक्षम होते हैं। मानसिक तनाव दूर करने पर चर्चा करते हुए डॉ. गोयल ने प्रतिभागियों को अपनी आंतरिक क्षमता को पहचानने, आत्म-सराहना करने और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने समझाया कि शुद्ध और उच्च विचारों को बनाए रखने से प्राकृतिक रूप से मानसिक ऊर्जा बढ़ती है, जिससे लोग स्वाभाविक रूप से तनाव पर काबू पाकर एक संतुलित जीवन जी सकते हैं।

पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. गोयल ने प्रकृति को एक पोषण करने वाली माँ के रूप में वर्णित किया और पर्यावरण की रक्षा को व्यक्तिगत के साथ-साथ सामूहिक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने सभी से दो मुख्य संकल्प लेने का आग्रह किया: पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के लिए सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का उपयोग समाप्त करना, और जल के प्रत्येक बूंद का संरक्षण करना—जल को प्रकृति का एक अनमोल उपहार बताते हुए उन्होंने कहा कि इसे कृत्रिम रूप से नहीं बनाया जा सकता है। टिकाऊ जीवन शैली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण की रक्षा और जल संरक्षण की औपचारिक शपथ ली।
अपने समापन भाषण में, आईसीएआर-एनआईबीएसएम के निदेशक डॉ. पी.के. राय ने डॉ. पीयूष गोयल के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने मानसिक स्वास्थ्य और पारिस्थितिकीय कर्तव्य के अंतर-संबंधों को रेखांकित करने वाला एक प्रेरक सत्र दिया। इस अवसर पर संयुक्त निदेशक डॉ. अनिल दीक्षित, डॉ. पंकज शर्मा और डॉ. डेज़ी बंसद्रई के साथ-साथ संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. एस.के. शर्मा ने किया, जिन्होंने अंत में धन्यवाद ज्ञापित भी किया।





















