

प्रविष्टि तिथि: 24 JUL 2026 4:39PM
रेल मंत्रालय ने ₹7,854 करोड़ की अनुमानित लागत से 278 किमी लंबी खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा नई दोहरी रेल लाइन के निर्माण को अप्रैल 2025 में मंजूरी दे दी थी। इस रेल परियोजना को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह भारी भीड़ और दबाव वाले बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग स्टेशनों/नोड्स को बाईपास करते हुए मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों को सुगम और तेज आवाजाही प्रदान करेगी। इसकी जानकारी केंद्रीय रेल, संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी।

यह रेल मार्ग छत्तीसगढ़ के 8 प्रमुख जिलों से होकर गुजरेगी और इसे औद्योगिक एवं खनिज क्षेत्रों को आपस में जोड़ने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इस कॉरिडोर का मुख्य ध्यान बलौदाबाजार जिला को रेल नेटवर्क से जोड़ना है। इसके अलावा, यह रूट खरसिया से एक डायरेक्ट बाईपास के रूप में काम करेगा। खरसिया, महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) के कोयला क्षेत्रों का प्रमुख रेल प्रवेश द्वार है, जिससे इस पूरे क्षेत्र में कच्चे माल का परिवहन तेजी से हो सकेगा।
परियोजना को तेजी से पूरा करने के लिए इसे आधिकारिक तौर पर “विशेष रेलवे परियोजना” (Special Railway Project) के रूप में अधिसूचित किया गया है, जिसके तहत लगभग 1,852 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी। भूमि अधिग्रहण के लिए ‘सक्षम प्राधिकारी’ (CALA) की नियुक्ति कर ली गई है और चिन्हित कॉरिडोर में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से जारी है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य में रेलवे सुरक्षा और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए वार्षिक बजट आवंटन लगभग ₹7,470 करोड़ तक पहुंच गया है। यह 2009 से 2014 के बीच दिए जाने वाले औसत वार्षिक आवंटन (₹311 करोड़) की तुलना में लगभग 24 गुना अधिक है।
2014 से 2026 के बीच, राज्य में कुल 1,311 किलोमीटर नई पटरियां (New Track) चालू (Commission) की गईं, जो औसतन 109.29 किमी प्रति वर्ष की दर से है। यह 2009-2014 के दौरान दर्ज की गई 6.4 किमी प्रति वर्ष की औसत दर से 17 गुना से भी अधिक की वृद्धि है।
1 अप्रैल 2026 तक, छत्तीसगढ़ में ₹48,202 करोड़ के कुल निवेश वाली 2,398 किमी लंबाई की 36 स्वीकृत रेल परियोजनाएं जारी हैं। इनमें 887 किमी की 8 नई लाइन परियोजनाएं और 1,512 किमी की 28 दोहरीकरण (Doubling) परियोजनाएं शामिल हैं। इन कार्यों पर अब तक ₹18,833 करोड़ से अधिक का संचयी खर्च (Cumulative Expenditure) हो चुका है, जिसके परिणामस्वरूप अब तक 1,151 किमी लाइन चालू की जा चुकी है।
क्षेत्रीय आवाजाही को मजबूत करने के लिए हाल ही में कई प्रमुख परियोजनाएं पूरी की गई हैं, जिनमें शामिल हैं:
चांपा-झारसुगुड़ा तीसरी लाइन: 152 किमी (₹1,227 करोड़)
रायपुर-टिटिलागढ़ दोहरीकरण: 203 किमी (₹1,171 करोड़)
दल्ली राजहरा-रावघाट लाइन: 95 किमी (₹1,628 करोड़)
इसके अलावा, गेवरा रोड-पेंड्रा रोड नई लाइन, खरसिया-धरमजयगढ़ नई लाइन, और राजनंदगांव-नागपुर तीसरी लाइन जैसी प्रमुख चल रही परियोजनाएं आर्थिक क्षेत्रों में रेल क्षमता का विस्तार कर रही हैं।
रेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि रेल कार्यों के पूरा होने की अंतिम समय-सीमा कई बाहरी कारकों पर निर्भर करती है, जैसे कि भूमि अधिग्रहण की गति, वैधानिक वन स्वीकृतियां, उपयोगिताओं की शिफ्टिंग, भूगर्भीय स्थितियां और स्थानीय कानून-व्यवस्था की स्थिति।





















