

Raipur chhattisgarh VISHESH राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर ने ‘विकसित भारत व्याख्यान श्रृंखला’ के अंतर्गत व्याख्यान सत्र का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह संस्थागत पहल भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना पर आधारित जागरूक और सार्थक संवाद को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई है। यह व्याख्यान सत्र सोमवार, 2 फरवरी 2026 को आयोजित किया गया, जिसमें संस्थान के संकाय सदस्यों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. सत्यम प्रियदर्शी, वर्तमान में आईआईटी बॉम्बे में CoE-OGE विज़िटिंग चेयर प्रोफेसर, उपस्थित रहे। डॉ. प्रियदर्शी ने “विकास और विकसित भारत के लिए घातीय प्रौद्योगिकियों को अपनाने की आवश्यकता: वर्तमान स्थिति, चुनौतियाँ और आगे का मार्ग” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की शोभा संस्थान के निदेशक प्रो. एन. वी. रमना राव, सीडीसी प्रमुख डॉ. समीर बाजपेयी, कुलसचिव डॉ. एन. डी. लोंढे, रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर डॉ. ए. के. पूनिया, विद्युत अभियांत्रिकी विभाग की प्रोफेसर डॉ. अनामिका यादव, कंप्यूटर एप्लीकेशन विभाग की प्रोफेसर डॉ. तृप्ति स्वर्णकार, डॉ. रम्या सेल्वराज, डॉ. चिलाका रंगा (विद्युत अभियांत्रिकी विभाग) सहित अन्य संकाय सदस्य, पीएच.डी. एवं एम.टेक. शोधार्थी तथा विद्यार्थी उपस्थित रहे।

अपने प्रेरणादायी संबोधन में डॉ. प्रियदर्शी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग तथा डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली जैसी घातीय प्रौद्योगिकियों की परिवर्तनकारी क्षमता पर प्रकाश डाला, जो राष्ट्रीय विकास एवं नवाचार को तीव्र गति प्रदान कर सकती हैं। उन्होंने तकनीकी प्रगति को ‘विकसित भारत’ के व्यापक उद्देश्यों के साथ संरेखित करने हेतु अंतःविषय सहयोग, नीति समर्थन तथा अकादमिक नेतृत्व के महत्व को रेखांकित किया। व्याख्यान के दौरान वर्तमान चुनौतियों पर चर्चा की गई तथा उभरती प्रौद्योगिकियों को भारत के विकास पारिस्थितिकी तंत्र में प्रभावी रूप से एकीकृत करने के लिए रणनीतिक मार्ग सुझाए गए।
‘विकसित भारत व्याख्यान श्रृंखला’ की परिकल्पना अकादमिक समुदाय को राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं, नवाचार-आधारित विकास एवं उभरती प्रौद्योगिकीय प्रवृत्तियों के प्रति संवेदनशील बनाने के साथ-साथ समालोचनात्मक चिंतन एवं अंतःविषय सहभागिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई है।
कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने वक्ता के साथ सार्थक चर्चा की, जो उनकी गहरी रुचि और अकादमिक जिज्ञासा को दर्शाता है।





















