




राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), रायपुर के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 27 अगस्त 2026 को ‘नेक्स्ट-जेनरेशन इनोवेशंस इन ड्रग डिस्कवरी (NGIDD 2026)’ पर दो दिवसीय प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। दो दिवसीय इस सम्मेलन में देशभर से विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. बीरेन्द्रनाथ बनर्जी, जे.बी.एस. हल्डेन सेंटर फॉर मॉलिक्यूलर मेडिसिन इंस्टीट्यूट के संस्थापक एवं “इन-डीएनए लाइफ साइंसेज” कंपनी, भुवनेश्वर, ओडिशा के संस्थापक निदेशक उपस्थित रहे। विशेष अतिथि के रूप में डॉ. रुक्मणकेश, एसोसिएट प्रोफेसर, बायोसाइंस एवं बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई शामिल हुए। इस अवसर पर डॉ. शुभ्रता गुप्ता, डीन (अकादमिक), डॉ. शुभाशिष सान्याल, डीन (कॉरपोरेट रिलेशंस एवं रिसोर्स मोबिलाइजेशन) तथा सम्मेलन की अध्यक्ष एवं जैव प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतिमा गुप्ता भी उपस्थित रहीं। सम्मेलन का समन्वय जैव प्रौद्योगिकी विभाग की डॉ. जे. सत्य एश्वरी एवं डॉ. डी.एन. रॉय ने किया।

डॉ. प्रतिमा गुप्ता ने स्वागत भाषण देते हुए सम्मेलन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह आयोजन जैव प्रौद्योगिकी विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है तथा वर्तमान समय में नवीन एवं प्रभावी स्वास्थ्य समाधान विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इसके बाद डॉ. शुभाशिष सान्याल ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए उत्पाद विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और स्टार्टअप्स की भूमिका पर चर्चा की।
डॉ. शुभ्रता गुप्ता ने विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया और ड्रग डिस्कवरी पर आयोजित कार्यशाला के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के आयोजन बेहतर स्वास्थ्य, जीवन की गुणवत्ता और जीवन प्रत्याशा में सुधार के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मुख्य अतिथि डॉ. बीरेन्द्रनाथ बनर्जी ने अपने संबोधन में संस्थान के तकनीकी एवं प्रबंधन शिक्षा में अग्रणी बनने के विजन पर चर्चा की। उन्होंने डीएनए की भूमिका और उसके महत्व को ड्रग डिस्कवरी एवं विकास के संदर्भ में समझाया। उन्होंने रायपुर को स्वामी विवेकानंद की भूमि बताते हुए यहां उपस्थित होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन प्रतिभागियों को वैश्विक चुनौतियों के लिए नवीन समाधान विकसित करने तथा नए विचारों को सीखने और तलाशने के महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा।
विशेष अतिथि डॉ. रुक्मणकेश ने शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग के बीच की दूरी को कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने भारत में दवाओं को प्रयोगशाला से बाजार तक पहुंचाने और क्लिनिकल ट्रायल को सफलतापूर्वक पूरा करने में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की तथा इस क्षेत्र में बेहतर वैज्ञानिक समझ और आवश्यक सुधारों की जरूरत बताई। उन्होंने जैविक प्रक्रियाओं का कोशिकीय स्तर पर अध्ययन करने के महत्व को भी रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ में उपलब्ध औषधीय पौधों की संभावनाओं तथा नई दवाओं के विकास में आयुर्वेद और आयुर्वेदिक औषधियों के वैज्ञानिक अध्ययन की भूमिका पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. डी.एन. रॉय ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, विशेष अतिथि, आयोजन समिति, विद्यार्थियों, प्रतिभागियों एवं प्रायोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया और सम्मेलन को सफल बनाने में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए धन्यवाद दिया।





















