
निवेशकों को मिलेगी सरल, पारदर्शी, डिजिटल और समयबद्ध व्यवस्था डीम्ड परमिशन, स्व-प्रमाणीकरण, जोखिम-आधारित निरीक्षण और दोहरे लाइसेंसिंग दायित्वों से मुक्ति जैसे प्रावधानों के साथ अब निवेश को मिलेगा नया विश्वास, उद्योगों को नई गति और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर ।

छत्तीसगढ़ ने 16 जुलाई 2026 को ‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026’ पारित कर देश का पहला जोखिम-आधारित (रिस्क-बेस्ड) और विश्वास-आधारित (ट्रस्ट-बेस्ड) व्यावसायिक अनुमति प्रणाली लागू करने वाला राज्य बनकर एक ऐतिहासिक पहल की है। इस कानून से राज्य के 15 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को भारी राहत मिलेगी।यह पहल राज्य में नौकरशाही की लालफीताशाही को कम करने और पारदर्शी माहौल तैयार करने के लिए लाई गई है।

मुख्य विशेषताएं और प्रावधान
- जोखिम-आधारित वर्गीकरण: उद्योगों को उनके जोखिम स्तर के आधार पर बांटा गया है। कम जोखिम वाले उद्योगों को नियमित सरकारी निरीक्षण से मुक्ति और सेल्फ-सर्टिफिकेशन की सुविधा मिलती है
वार्षिक नवीनीकरण समाप्त: पात्र श्रेणियों के लिए हर साल लाइसेंस या अनुमति के नवीनीकरण की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है
डीम्ड अप्रूवल (स्वमेव स्वीकृति): यदि निर्धारित समय-सीमा (30 से 60 दिन) के भीतर कोई विभाग आवेदन का निपटारा नहीं करता है, तो अनुमति स्वतः स्वीकृत मानी जाएगी।
प्रथम चरण का दायरा: आठ अलग-अलग विभागों की 43 महत्वपूर्ण सेवाओं को इस सुगम व्यवस्था के अंतर्गत लाया गया है
त्रि-स्तरीय निगरानी तंत्र: इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक कार्यकारी परिषद, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य-स्तरीय समिति और जिला स्तर पर कलेक्टरों के नेतृत्व में तंत्र गठित किया गया है।
जोखिम आधारित बिजनेस परमिशन व्यवस्था लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा छत्तीसगढ़
छोटे कारोबारों को मिलेगी आसान मंजूरी, सेल्फ सर्टिफिकेशन और ऑटो अप्रूवल जैसी सुविधाएं, हर साल लाइसेंस नवीनीकरण से मिलेगी राहत
# छत्तीसगढ़ में पास हुआ देश का पहला ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट, अब भरोसे पर मिलेगा बिजनेस अप्रूवल
छत्तीसगढ़ विधानसभा ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट 2026 को मंजूरी दे दी. इसके साथ ही राज्य देश का पहला रिस्क-बेस्ड बिजनेस अप्रूवल सिस्टम लागू करने वाला राज्य बन जाएगा. नए कानून के तहत MSME, स्टार्टअप और छोटे कारोबारियों को सेल्फ-सर्टिफिकेशन, डीम्ड अप्रूवल और आसान अनुमति प्रक्रियाओं का लाभ मिलेगा.छत्तीसगढ़ ने कारोबार और निवेश के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया है. राज्य विधानसभा ने छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026 (EoDB Act) को मंजूरी दे दी है. इस कानून के लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ देश का पहला ऐसा राज्य बन जाएगा, जहां उद्योगों और कारोबारों को उनके जोखिम (रिस्क) के आधार पर वर्गीकृत कर अनुमति देने की व्यवस्था होगी l इसका सबसे बड़ा फायदा छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) को मिलेगा, क्योंकि अब उन्हें बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. सरकार का दावा है कि नया कानून कारोबार शुरू करने और चलाने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और कम खर्चीला बनाएगा, जिससे राज्य में निवेश और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा.
देश का पहला रिस्क बेस्ड बिजनेस मॉडल
नए कानून की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बिजनेस को उनके आकार, निवेश और गतिविधियों के आधार पर अलग-अलग रिस्क कैटेगरी में रखा जाएगा. कम जोखिम वाले व्यवसायों के लिए नियम आसान होंगे, जबकि बड़े और अधिक जोखिम वाले उद्योगों के लिए आवश्यक निगरानी जारी रहेगी. इस व्यवस्था उद्यमों को उन्हीं नियमों और प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा, जो बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स पर लागू होती हैं.
छोटे कारोबारियों को मिलेगी बड़ी राहत
Ease of Doing Business Act, 2026 के तहत छोटे और कम जोखिम वाले कारोबारों के लिए अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया काफी सरल बनाई है. ऐसे उद्यमों को कम दस्तावेज और कम औपचारिकताओं के साथ स्वीकृति मिल सकेगी. सरकार का मानना है कि इससे नए उद्यमियों को कारोबार शुरू करने में आने वाली बाधाएं कम होंगी और स्टार्टअप तथा MSME सेक्टर को नई ऊर्जा मिलेगी.
सेल्फ-सर्टिफिकेशन से होगा काम
अब कम जोखिम वाले कई व्यवसायों में बार-बार होने वाले सरकारी निरीक्षण की जगह सेल्फ-सर्टिफिकेशन और थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन की व्यवस्था लागू होगी. यानी उद्यमी स्वयं घोषित कर सकेगा कि वह निर्धारित मानकों का पालन कर रहा है. जरूरत पड़ने पर लाइसेंसधारी इंजीनियर, आर्किटेक्ट या अन्य अधिकृत विशेषज्ञों से प्रमाणन भी लिया जा सकेगा. इससे अनुमोदन प्रक्रिया तेज होगी और सरकारी हस्तक्षेप कम होगा.
सालाना रिन्यूअल की झंझट होगी खत्म
नए कानून के तहत कई अनुमतियों के लिए हर साल होने वाले रिन्यूअल की आवश्यकता समाप्त कर दी जाएगी. इसकी जगह रिस्क-बेस्ड अनुपालन प्रणाली लागू होगी. इस बदलाव से कारोबारियों का समय बचेगा और उन्हें बार-बार एक ही दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. वे प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बजाय अपने व्यवसाय पर अधिक ध्यान दे सकेंगे.
तय समय में नहीं मिला जवाब तो माना जाएगा अप्रूव
इस एक्ट का एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी है कि यदि कोई विभाग निर्धारित समय सीमा के भीतर किसी आवेदन पर निर्णय नहीं लेता है, तो उसे डीम्ड अप्रूवल माना जाएगा. इससे फाइलों के लंबे समय तक अटकने की समस्या कम होगी और निवेशकों को समय पर फैसले मिल सकेंगे. सरकार का उद्देश्य अनुमोदन प्रणाली को अधिक जवाबदेह बनाना है.
MSME को सबसे ज्यादा फायदा
राज्य में 15 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) इस कानून से लाभान्वित हो सकते हैं. पानी कनेक्शन, फर्म या सोसायटी पंजीकरण, बिल्डिंग प्लान मंजूरी जैसी कई सेवाओं को पहले से आसान और तेज बनाया जाएगा. उद्योग जगत का मानना है कि इससे नए निवेश आकर्षित होंगे और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.
8 विभागों की 43 सेवाएं होंगी शामिल
नया कानून फिलहाल 8 विभागों की 43 सेवाओं को इस सरल अनुमोदन व्यवस्था के तहत लाता है. भविष्य में आवश्यकता के अनुसार और सेवाओं को भी इसमें शामिल किया जा सकेगा. सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक सरकारी सेवाओं को डिजिटल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है.
तीन स्तर पर होगी निगरानी
कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तीन स्तरीय निगरानी व्यवस्था बनाई गई है. राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति काम करेगी, जबकि जिला स्तर पर कलेक्टर की अगुवाई में निगरानी तंत्र बनाया जाएगा. इन दोनों समितियों की गतिविधियों पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली परिषद की निगरानी रहेगी, ताकि तय समय में सभी प्रावधान लागू हो सकें.
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026’ पारित किया है. यह अधिनियम देश में पहली बार जोखिम और विश्वास आधारित बिजनेस परमिशन सिस्टम लागू करेगा, जिससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को विशेष लाभ होगा. इस पहल का उद्देश्य व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना और एक अधिक उद्यम-अनुकूल वातावरण तैयार करना है.मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने उद्योग और कारोबार को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. छत्तीसगढ़ विधानसभा ने ‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026′ पारित कर दिया. इसके साथ ही छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए जोखिम आधारित (रिस्क बेस्ड) एवं विश्वास आधारित (ट्रस्ट बेस्ड) बिजनेस परमिशन सिस्टम लागू होगा.इस अधिनियम का उद्देश्य उद्योगों एवं कारोबार की स्थापना और संचालन संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाना, अनावश्यक अनुपालनों को कम करना तथा विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए अधिक पारदर्शी, तेज और उद्यम-अनुकूल व्यावसायिक वातावरण तैयार करना है.अधिनियम के तहत उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का वर्गीकरण उनके आकार और गतिविधियों की प्रकृति के आधार पर विभिन्न जोखिम श्रेणियों में किया जाएगा. कम जोखिम वाले छोटे कारोबारों को सरल एवं त्वरित मंजूरी मिलेगी, जबकि अधिक जोखिम वाली परियोजनाओं के लिए आवश्यक तकनीकी परीक्षण और समयबद्ध स्वीकृति की व्यवस्था पूर्ववत जारी रहेगी. इससे छोटे कारोबारियों को बड़े उद्योगों जैसी जटिल प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा.नई व्यवस्था के अंतर्गत कम जोखिम वाले उद्यमों में बार-बार होने वाले विभागीय निरीक्षणों के स्थान पर सेल्फ सर्टिफिकेशन अथवा लाइसेंसधारी अभियंता, आर्किटेक्ट या अन्य अधिकृत पेशेवरों द्वारा प्रमाणन की सुविधा उपलब्ध होगी. इससे अनुमतियों की प्रक्रिया तेज, सरल और अधिक जवाबदेह बनेगी.अधिनियम के तहत हर वर्ष लाइसेंस या अनुमति के नवीनीकरण की अनिवार्यता समाप्त कर जोखिम आधारित अनुमति प्रणाली लागू की जाएगी. इससे उद्यमियों को अनावश्यक औपचारिकताओं से राहत मिलेगी और वे अपने कारोबार के विस्तार एवं संचालन पर अधिक ध्यान दे सकेंगे.एमएसएमई इकाइयों के लिए जल प्रदाय संबंधी अनुमति स्व-घोषणा के आधार पर, सोसायटी अथवा फर्म का पंजीयन समयबद्ध प्रक्रिया से तथा भवन अनुज्ञा सेल्फ सर्टिफिकेशन अथवा अधिकृत विशेषज्ञ के प्रमाण-पत्र के आधार पर प्रदान की जा सकेगी. निर्धारित समय-सीमा में संबंधित विभाग द्वारा निर्णय नहीं लेने की स्थिति में पात्र मामलों में अनुमति स्वतः स्वीकृत (ऑटो अप्रूवल) मानी जाएगी. हालांकि अधिक जोखिम वाली परियोजनाओं में तकनीकी परीक्षण एवं भौतिक निरीक्षण की व्यवस्था यथावत लागू रहेगी.अधिनियम के अंतर्गत राज्य शासन के 8 विभागों द्वारा प्रदान की जाने वाली 43 सेवाओं को जोखिम आधारित अनुमति प्रणाली के दायरे में शामिल किया गया है. आवश्यकता अनुसार कार्यपालिका परिषद की मंजूरी से अतिरिक्त सेवाएं भी इसमें जोड़ी जा सकेंगी.अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए त्रिस्तरीय निगरानी व्यवस्था बनाई गई है. राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति तथा जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति इसके क्रियान्वयन और अनुश्रवण की जिम्मेदारी निभाएगी. दोनों समितियां मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली परिषद के मार्गदर्शन में कार्य करेंगी.इस सुधार से राज्य के 15 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है. सरकार का मानना है कि भरोसे, स्व-घोषणा और समयबद्ध सेवाओं पर आधारित यह व्यवस्था कारोबार शुरू करने और संचालित करने में लगने वाले समय एवं लागत को कम करेगी, जबकि अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी और परीक्षण की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी.’छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026’ राज्य में पारदर्शी, सरल, पूर्वानुमेय और निवेश-अनुकूल व्यावसायिक वातावरण के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा.
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने उद्योग और कारोबार को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। छत्तीसगढ़ विधानसभा ने आज ‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026’ पारित कर दिया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए जोखिम आधारित (रिस्क बेस्ड) एवं विश्वास आधारित (ट्रस्ट बेस्ड) बिजनेस परमिशन सिस्टम लागू होगा।
इस विधेयक का उद्देश्य उद्योगों एवं कारोबार की स्थापना और संचालन संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाना, अनावश्यक अनुपालनों को कम करना तथा विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए अधिक पारदर्शी, तेज और उद्यम-अनुकूल व्यावसायिक वातावरण तैयार करना है।
विधेयक के तहत उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का वर्गीकरण उनके आकार और गतिविधियों की प्रकृति के आधार पर विभिन्न जोखिम श्रेणियों में किया जाएगा। कम जोखिम वाले छोटे कारोबारों को सरल एवं त्वरित मंजूरी मिलेगी, जबकि अधिक जोखिम वाली परियोजनाओं के लिए आवश्यक तकनीकी परीक्षण और समयबद्ध स्वीकृति की व्यवस्था पूर्ववत जारी रहेगी। इससे छोटे कारोबारियों को बड़े उद्योगों जैसी जटिल प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा।
नई व्यवस्था के अंतर्गत कम जोखिम वाले उद्यमों में बार-बार होने वाले विभागीय निरीक्षणों के स्थान पर सेल्फ सर्टिफिकेशन अथवा लाइसेंसधारी अभियंता, आर्किटेक्ट या अन्य अधिकृत पेशेवरों द्वारा प्रमाणन की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे अनुमतियों की प्रक्रिया तेज, सरल और अधिक जवाबदेह बनेगी।
विधेयक के तहत हर वर्ष लाइसेंस या अनुमति के नवीनीकरण की अनिवार्यता समाप्त कर जोखिम आधारित अनुमति प्रणाली लागू की जाएगी। इससे उद्यमियों को अनावश्यक औपचारिकताओं से राहत मिलेगी और वे अपने कारोबार के विस्तार एवं संचालन पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।
एमएसएमई इकाइयों के लिए जल प्रदाय संबंधी अनुमति स्व-घोषणा के आधार पर, सोसायटी अथवा फर्म का पंजीयन समयबद्ध प्रक्रिया से तथा भवन अनुज्ञा सेल्फ सर्टिफिकेशन अथवा अधिकृत विशेषज्ञ के प्रमाण-पत्र के आधार पर प्रदान की जा सकेगी। निर्धारित समय-सीमा में संबंधित विभाग द्वारा निर्णय नहीं लेने की स्थिति में पात्र मामलों में अनुमति स्वतः स्वीकृत (ऑटो अप्रूवल) मानी जाएगी। हालांकि अधिक जोखिम वाली परियोजनाओं में तकनीकी परीक्षण एवं भौतिक निरीक्षण की व्यवस्था यथावत लागू रहेगी।
विधेयक के अंतर्गत राज्य शासन के 8 विभागों द्वारा प्रदान की जाने वाली 43 सेवाओं को जोखिम आधारित अनुमति प्रणाली के दायरे में शामिल किया गया है। आवश्यकता अनुसार कार्यपालिका परिषद की मंजूरी से अतिरिक्त सेवाएं भी इसमें जोड़ी जा सकेंगी।
विधेयक के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए त्रिस्तरीय निगरानी व्यवस्था बनाई गई है। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति तथा जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति इसके क्रियान्वयन और अनुश्रवण की जिम्मेदारी निभाएगी। दोनों समितियां मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली परिषद के मार्गदर्शन में कार्य करेंगी।
इस सुधार से राज्य के 15 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। सरकार का मानना है कि भरोसे, स्व-घोषणा और समयबद्ध सेवाओं पर आधारित यह व्यवस्था कारोबार शुरू करने और संचालित करने में लगने वाले समय एवं लागत को कम करेगी, जबकि अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी और परीक्षण की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।
‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक-2026’ राज्य में पारदर्शी, सरल, पूर्वानुमेय और निवेश-अनुकूल व्यावसायिक वातावरण के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
हाल ही में छत्तीसगढ़ जोखिम-आधारित व्यावसायिक नियामक ढाँचा अपनाने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है। इसके लिये राज्य विधानसभा ने छत्तीसगढ़ ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस अधिनियम, 2026 पारित किया।
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ जोखिम-आधारित ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस एक्ट’ को अपनाने वाला पहला राज्य बना
मुख्य बिंदु:
- अपनी तरह का पहला कानून: छत्तीसगढ़ जोखिम-आधारित ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस (Ease of Doing Business) अधिनियम लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है। इस अधिनियम का उद्देश्य नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाना तथा व्यावसायिक वातावरण में सुधार करना है।
- जोखिम-आधारित वर्गीकरण: उद्योगों एवं व्यवसायों को उनके कार्य की प्रकृति तथा संचालन के स्तर के आधार पर विभिन्न जोखिम श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा।
- कम-जोखिम वाले उद्यमों को त्वरित स्वीकृतियाँ, सरलीकृत अनुपालन (Compliance) तथा नियमित सरकारी निरीक्षण के स्थान पर स्व-प्रमाणन की सुविधा प्रदान की जाएगी।
- यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर बड़े उद्योगों के आवेदन का निस्तारण नहीं किया जाता है तो उन्हें स्वतः स्वीकृत माना जाएगा।
- उद्यमी स्व-घोषणा प्रस्तुत कर सकते हैं अथवा लाइसेंस प्राप्त अभियंताओं, वास्तुकारों एवं अन्य अधिकृत पेशेवरों से अनुपालन प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकते हैं। इससे अनुपालन लागत और अनावश्यक विलंब में कमी आएगी।
- लाइसेंस प्रणाली का सरलीकरण: जोखिम-आधारित अनुपालन व्यवस्था लागू कर अनेक मामलों में लाइसेंस एवं परमिट के वार्षिक नवीनीकरण की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है।
- अधिनियम के अंतर्गत स्व-घोषणा के आधार पर जल कनेक्शन, औद्योगिक समितियों का समयबद्ध पंजीकरण तथा स्व-प्रमाणन या अधिकृत विशेषज्ञों के माध्यम से भवन मानचित्रों की स्वीकृति का प्रावधान किया गया है।
- कार्यक्षेत्र: प्रथम चरण में आठ विभागों की 43 सेवाओं को इस अधिनियम के अंतर्गत शामिल किया गया है, जिसे भविष्य में और विस्तारित किया जाएगा।
- क्रियान्वयन तंत्र: अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिये त्रि-स्तरीय संस्थागत ढाँचा स्थापित किया गया है, जिसमें—
- मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कार्यकारी परिषद।
- मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति।
- संबंधित ज़िलाधिकारियों की अध्यक्षता में ज़िला स्तरीय समितियाँ।
- प्रभाव: इस अधिनियम से लगभग 15 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) उद्यमियों को अनुपालन लागत में कमी, त्वरित स्वीकृतियाँ, समयबद्ध सेवाएँ तथा व्यवसाय करने में सुगमता का लाभ मिलने की अपेक्षा है
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में निवेश और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (विनियमन-मुक्ति एवं सुविधा) विधेयक 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी गई है मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (विनियमन-मुक्ति एवं सुविधा) विधेयक 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी गई है। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य व्यापार और उद्योग स्थापित करने की प्रक्रियाओं को सरल बनाना है। सरकार का दावा है कि छत्तीसगढ़ ऐसा विधेयक लागू करने वाला देश का पहला राज्य होगा। यह कानून प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और समयबद्ध बनाएगा। नए कानून के लागू होने से निवेशकों को सरकारी प्रक्रियाओं में होने वाली अनावश्यक देरी और जटिलताओं से राहत मिलेगी। इससे राज्य में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। साथ ही, बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
इस विधेयक में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। इनमें डीम्ड परमिशन, स्व-प्रमाणीकरण और तृतीय-पक्ष सत्यापन प्रमुख हैं। जोखिम-आधारित निरीक्षण की व्यवस्था भी इसमें शामिल है। दोहरे लाइसेंसिंग दायित्वों को समाप्त करने का प्रावधान भी किया गया है। इन सुधारों से निवेशकों के लिए कारोबारी माहौल अधिक अनुकूल बनेगा





















