
उन्नत न्यूरोसर्जरी प्रशिक्षण की दिशा में बड़ा कदम: एम्स रायपुर में राष्ट्रीय CVJ सर्जरी कार्यशाला आयोजित
प्रविष्टि तिथि: 06 JUL 2026 2:58PM by PIB Raipur
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान रायपुर (एम्स) के न्यूरोसर्जरी विभाग द्वारा न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के तत्वावधान में राष्ट्रीय स्तर की क्रेनियोवर्टिब्रल जंक्शन (Craniovertebral Junction – CVJ) सर्जरी कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह उच्च स्तरीय शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण कार्यशाला संस्थान के एनाटॉमी विभाग की अत्याधुनिक कैडैवरिक लैब में संपन्न हुई, जिसमें देशभर से वरिष्ठ न्यूरोसर्जन, विशेषज्ञ चिकित्सक, रेजिडेंट डॉक्टर एवं अन्य प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी की।

क्रेनियोवर्टिब्रल जंक्शन (CVJ) मानव शरीर का वह अत्यंत संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जहां मस्तिष्क रीढ़ की हड्डी के ऊपरी भाग से जुड़ता है। इस क्षेत्र में श्वसन, शरीर संतुलन, गति एवं अन्य महत्वपूर्ण न्यूरोलॉजिकल क्रियाओं को नियंत्रित करने वाली संरचनाएं स्थित होती हैं। यहां उत्पन्न होने वाली जटिलताएं गंभीर दर्द, अंगों में कमजोरी, चलने-फिरने में कठिनाई, निगलने में समस्या तथा कई बार जीवन के लिए जोखिमपूर्ण न्यूरोलॉजिकल स्थितियों का कारण बन सकती हैं।
इस क्षेत्र की सर्जरी को न्यूरोसर्जरी की सबसे जटिल प्रक्रियाओं में से एक माना जाता है, जिसके लिए अत्यधिक विशेषज्ञता, सूक्ष्म शारीरिक संरचना की गहन समझ, उन्नत तकनीकी दक्षता तथा आधुनिक सर्जिकल उपकरणों की आवश्यकता होती है। आधुनिक इमेजिंग तकनीक, सर्जिकल नेविगेशन सिस्टम तथा मिनिमली इनवेसिव सर्जरी पद्धतियों ने इस प्रकार की शल्य प्रक्रियाओं के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार किया है, जिससे निरंतर प्रशिक्षण एवं कौशल विकास की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
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कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञ व्याख्यान, जटिल नैदानिक मामलों पर विस्तृत चर्चा, पैनल परिचर्चा तथा कैडैवरिक डेमोंस्ट्रेशन आयोजित किए गए। प्रतिभागियों को उन्नत सर्जिकल तकनीकों, ऑपरेशन की पूर्व योजना, उपकरणों के उपयोग तथा जटिल CVJ रोगों के प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि एम्स रायपुर उन्नत न्यूरोसर्जरी शिक्षा एवं प्रशिक्षण के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है। इस प्रकार की राष्ट्रीय कार्यशालाएं एवं सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम न केवल मध्य भारत में विश्वस्तरीय विशेषज्ञता को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि मरीजों को उनके ही क्षेत्र में आधुनिक एवं प्रमाण-आधारित उपचार उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यशाला के आयोजक एवं न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक प्रशिक्षण के बीच की दूरी को कम करना है। उन्होंने कहा कि क्रेनियोवर्टिब्रल जंक्शन सर्जरी में शरीर रचना विज्ञान की गहन समझ, सूक्ष्म योजना एवं उच्च तकनीकी दक्षता अनिवार्य है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम युवा न्यूरोसर्जनों को देश के वरिष्ठ विशेषज्ञों से प्रत्यक्ष सीखने का अवसर प्रदान करते हैं।
एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. सौमित्र त्रिवेदी ने कहा कि यह कार्यशाला प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक रही, जिसमें उन्हें प्रत्यक्ष प्रशिक्षण का अवसर मिला। वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डी. के. त्रिपाठी ने कहा कि ऐसे शैक्षणिक आयोजन वर्तमान समय की आवश्यकता हैं और चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता को और सुदृढ़ करते हैं।
कार्यशाला में संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के प्रोफेसर अरुण कुमार श्रीवास्तव तथा All India Institute of Medical Sciences Bhopal के प्रोफेसर आदेश श्रीवास्तव सहित देश के अनेक प्रतिष्ठित न्यूरोसर्जनों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने जन्मजात विकृतियों, आघात, आयुजनित रोगों, ट्यूमर, रक्त वाहिका संबंधी जटिलताओं तथा CVJ अस्थिरता जैसे गंभीर मामलों के उपचार में अपने अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम में जटिल शल्य मामलों में निर्णय क्षमता, ऑपरेशन के दौरान जटिलताओं से बचाव तथा प्रमाण-आधारित उपचार पद्धतियों पर विस्तृत विमर्श किया गया। समापन सत्र में प्रतिभागियों ने कार्यशाला को अत्यंत उपयोगी एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण से भरपूर बताया तथा देश के अग्रणी विशेषज्ञों से प्रत्यक्ष संवाद एवं सीखने के अवसर की सराहना की।





















