

विश्वकर्मा जयंती से लागू हुआ निर्णय, अनिवार्य कर्मचारी भविष्य निधि कवरेज का दायरा होगा विस्तृत
छत्तीसगढ़ में राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने योजनाओं और नई वेतन सीमा की दी जानकारी
प्रविष्टि तिथि: 17 SEP 2026 6:15PM by PIB Raipur
केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रतिमाह करने को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के इस प्रस्ताव को 16 सितंबर 2026 को मंजूरी दी। इस निर्णय से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों के ईपीएफओ के दायरे में आने की उम्मीद है। संशोधित वेतन सीमा 17 सितंबर 2026 यानी विश्वकर्मा जयंती एवं सेवा दिवस से प्रभावी हो गई है।


वेतन सीमा में यह संशोधन करीब 12 वर्ष बाद किया गया है। इससे अधिक संख्या में कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं के दायरे में लाने में मदद मिलेगी। सरकार के अनुसार, यह कदम सामाजिक सुरक्षा के विस्तार के साथ रोजगार के औपचारिकीकरण को गति देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।

इस निर्णय के मद्देनजर छत्तीसगढ़ में श्रम विभाग द्वारा 17 सितंबर को रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का उद्घाटन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया। कार्यक्रम में उद्योग मंत्री, श्रम मंत्री सहित अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की वेतन सीमा बढ़ाने के केंद्र सरकार के निर्णय का स्वागत किया।

विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर आयोजित इस महासम्मेलन में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की ओर से विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना, विश्वास योजना 2026, कर्मचारी नामांकन योजना 2026 तथा कर्मचारी भविष्य निधि के लिए बढ़ाई गई वेतन सीमा के संबंध में श्रमिकों को जानकारी दी गई। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के सहायक भविष्य निधि आयुक्त आकाश अग्रवाल सहित संगठन के अन्य अधिकारी प्रदर्शनी में मौजूद रहे।
कर्मचारी भविष्य निधि व्यवस्था के तहत कर्मचारी के मूल वेतन का 12 प्रतिशत हिस्सा कर्मचारी भविष्य निधि खाते में अंशदान के रूप में जमा होता है। नियोक्ता भी मूल वेतन के 12 प्रतिशत के बराबर अंशदान करता है। नियोक्ता के अंशदान में से 8.33 प्रतिशत कर्मचारी पेंशन योजना में तथा 3.67 प्रतिशत कर्मचारी भविष्य निधि खाते में जाता है। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार की ओर से पेंशन निधि में 1.16 प्रतिशत का अंशदान किया जाता है।
सरकार के अनुसार, वेतन सीमा बढ़ने से अधिक संख्या में कामगारों को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ने में मदद मिलेगी। इससे सेवानिवृत्ति के बाद आय की सुरक्षा मजबूत होने के साथ कर्मचारी भविष्य निधि संगठन का कवरेज मौजूदा वेतन स्तरों के अनुरूप विस्तृत होगा। मंत्रालय के अनुसार, यह निर्णय श्रम संहिताओं के तहत श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा रोजगार के औपचारिकीकरण को आगे बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
केंद्र सरकार के अनुसार, वेतन सीमा बढ़ाने से सरकार पर लगभग 11,339 करोड़ रुपये का वार्षिक अतिरिक्त वित्तीय भार आने का अनुमान है। वर्तमान में वार्षिक बजटीय सहायता लगभग 10,250 करोड़ रुपये है। पांच वर्ष की अवधि में अनुमानित अतिरिक्त व्यय लगभग 56,696 करोड़ रुपये रहने की संभावना है।
यह निर्णय कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने और औपचारिक रोजगार को प्रोत्साहित करने के प्रयासों का हिस्सा है। नई व्यवस्था के तहत 25,000 रुपये प्रतिमाह तक की वेतन सीमा वाले अधिक कर्मचारियों के अनिवार्य कर्मचारी भविष्य निधि संगठन कवरेज में आने की उम्मीद है।





















