





दिल्ली के सत्य निकेतन मार्केट इलाक़े में रविवार दोपहर एक पांच मंज़िला पीजी इमारत गिर गई जिसमें कई लोगों के दबे होने की आशंका है.दिल्ली सरकार की ओर से सेंट्रलाइज़्ड एक्सिडेंट एंड ट्रॉमा सर्विसेज़ (कैट्स) के नोडल अधिकारी बलराज सिंह ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि बताया जा रहा है कि 20 से 30 कैज़ुअल्टी की आशंका है. मौके पर 17 एंबुलेंस तैनात की गई हैं.जितने बच्चे अपने कमरों के अंदर थे, वे सभी मलबे में दब गए. इमारत गिरने के बाद से करीब 15-20 मिनट से दमकल और बचाव दल मौके पर काम कर रहे हैं. कई बच्चों को जैसे तैसे खींच खींच कर बाहर निकाला जा रहा है.
जिस समय इमारत ढही, इलाक़े में एक ज़ोर का धमाका सुनाई दिया. अचानक भूकंप जैसी आवाज़ सुनाई दी. हम तुरंत बाहर भागे. यहां बहुत धुआं और धूल थी. पूरी इमारत गिर गई थी. अभी भी मलबे के अंदर से आवाजें आ रही हैं. बच्चे चिल्ला रहे हैं, ‘हमें बचाओ, हमें बचाओ!’… कम से कम 25-30 बच्चे हैं. यहां पास में लड़कों और लड़कियों के लिए पीजी था.”उस स्टूडेंट ने बताया कि इस इमारत के बेसमेंट में रेनोवेशन का काम चल रहा था. इन इमारतों को 100 साल की लीज़ पर दिया गया है. अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए वे लोग नीचे बेसमेंट बना रहे थे. उन्होंने ऊपर की बिल्डिंग मज़बूत कर दी, लेकिन नीचे के पिलर कमज़ोर थे. जिसकी वजह से वह बिल्डिंग गिरी है. उस स्टूडेंट ने बताया, बेसमेंट में कई मज़दूर काम कर रहे थे वो सभी दब गए हैं. साथ ही बिल्डिंग के सामने फल वगैरह बेचने वाले रेहड़ी पटरी वाले भी थे वो भी दब गए हैं.

दिल्ली के एडिशनल डीसीपी अभिमन्यू पोसवाल ने पत्रकारों को बताया गया
अब तक 9 बच्चों को बाहर निकाला गया है और उन्हें अस्पताल भेजा गया है. दुर्भाग्य से तीन की मौत हो गई है.वहीं इमारत के मालिक के बारे में जानकारी निकाली जा रही है. हमारे पास सारी सूचनाएं हैं और जल्द ही उसे अरेस्ट किया जाएगा. लापरवाही का मामला दर्ज किया जाएगा. पोसवाल ने कहा कि बचाए गए एक बच्चे ने बताया कि अंदर 15-16 बच्चे थे, हालांकि अभी पक्की जानकारी नहीं है. राहत और बचाव अभियान अभी जारी है.
घटना के कुछ देर बाद मौके पर पहुंचे बीजेपी विधायक अनिल शर्मा ने बताया, “कुछ स्टूडेंट अंदर से फ़ोन भी कर रहे हैं और लगता है कि अभी भी कुछ और लोग अंदर फंसे हुए हैं.”
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने संवेदना ज़ाहिर करते हुए राहत और बचाव कार्य में हर संभव मदद देने की बात कही है.
जबकि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सांसद चंद्रशेखर आज़ाद, सांसद पप्पू यादव, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी समेत आम आदमी पार्टी के कई नेताओं ने प्रतिक्रिया देते हुए ज़िम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि बचाव अभियान जारी है.
पीएमओ के एक्स हैंडल पर पीएम मोदी का एक्स जारी कर कहा
दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना बेहद दुखद है. अपने प्रियजनों को खोने वालों के प्रति मेरी संवेदनाएं. घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं. अधिकारी मौके पर काम कर रहे हैं और इस हादसे से प्रभावित लोगों की मदद कर रहे हैं.दिल्ली के सत्य निकेतन में एक इमारत के गिरने की ख़बर से बहुत दुखी हूं. मैंने मुख्यमंत्री, दिल्ली के पुलिस के कमिश्नर और एनडीआरएफ़ के डायरेक्टर जनरल से बात की और हालात को जाना.
गृह मंत्री अमित शाह ने लिखा, स्थानीय प्रशासन और एनडीआरएफ़ की टीमें आपसी तालमेल के साथ बचाव अभियान चला रही हैं. घायलों को सभी ज़रूरी चिकित्सा मदद दी जा रही है. मैं सभी घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं.
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर कहा
स्टूडेंट का जीवन पहले ही संघर्षों से भरा था- अब हालात जानलेवा हैं. कॉलेज या विश्वविद्यालय में अच्छे हॉस्टल न होने के कारण स्टूडेंट पीजी में एक छत के नीचे 40-40 की संख्या में, अमानवीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं. हर स्टूडेंट की जान क़ीमती है और उसकी रक्षा हर हाल में होनी चाहिए.
वहीं घटना के तुरंत बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने राहत और बचाव को लेकर एक्स पर एक वीडियो शेयर किया और कहा आख़िर कब तक इस देश के स्टूडेंट को ख़राब व्यवस्था और लापरवाही की क़ीमत चुकानी पड़ेगी? आदिवासी इलाक़ों में देखभाल और मदद की कमी के कारण आदिवासी स्टूडेंट की जान जा रही है और देश की राजधानी में पढ़ने वाले स्टूडेंट भी सुरक्षित नहीं हैं.
अभिजीत दीपके ने कहा स्टूडेंट्स मलबे के नीचे दबे हैं और स्थानीय लोग अपने हाथों से लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. प्रशासन का एक भी व्यक्ति नज़र नहीं आ रहा. जब ज़िंदगी बचाने के लिए हर मिनट क़ीमती है, प्रशासन कहां है? यह सब कब तक चलता रहेगा?
अभिजीत दीपके ने एक अन्य पोस्ट में कहा , कल पीएम ने डीयू का दौरा किया, राजनीतिक भाषण दिया और ‘दिमाग़ी नक्सल’ शब्द का भी इस्तेमाल किया, जबकि उन्होंने हमारी शिक्षा व्यवस्था की ख़राब हालत के बारे में बहुत कम बात की. आज साउथ कैंपस में एक हॉस्टल की इमारत गिर गई है और आशंका है कि मलबे के नीचे स्टूडेंट फंसे हो सकते हैं. अभी तक कितने लोगों की जान गई है, इसकी जानकारी नहीं है.
सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने एक्स पर बताया हादसे की निष्पक्ष जांच हो और यह पता लगाया जाए कि हॉस्टल के रूप में संचालित इस इमारत की सुरक्षा जांच और अनुमति से जुड़े नियमों का पालन किया गया था या नहीं.
आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार में पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने अपने एक्स हैंडल पर एक वीडियो शेयर करते हुए बताया कि
सत्य निकेतन में एक और इमारत गिर गई. यह डीयू के साउथ कैंपस के कॉलेज छात्रों के लिए पीजी आवास था. क़रीब 30-40 छात्रों के मलबे में दबे होने की आशंका है.
एमसीडी के बिल्डिंग विभाग में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के ट्रांसफ़र की दर 1.25 करोड़ रुपये है. इसलिए यह रुकने वाला नहीं है. यह साकेत में इमारत गिरने जैसी ही कहानी है. ऑडिट के नाम पर एक बार फिर कारोबारियों, जिम, होटल और अस्पतालों से करोड़ों रुपये वसूले जाएंगे. कुछ भी नहीं बदलेगा.
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