

कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क में दिए हिंदू-मुस्लिम एकता और विविधता वाले बयान पर सवाल उठाए. भागवत ने अमेरिका में शनिवार को कहा कि भारत की पहचान ‘विविधता में एकता’ से है और अगर कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता.
नेता राशिद अल्वी ने कहा पहली बात, अमेरिका जाकर ये बोलने की ज़रूरत क्यों पड़ रही है? अगर भारत में हिंदू-मुसलमानों के बीच ऐसी कोई समस्या ही नहीं है, तो अचानक अमेरिका जाकर यह कहने की ज़रूरत क्यों पड़ी?

उन्होंने आगे कहा, इसका मतलब है कि समस्या है. आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत अपनी छवि सुधारने के लिए दिखावा कर रहे हैं. क्या उन्हें नहीं पता कि असम के मुख्यमंत्री मुसलमानों के बारे में क्या बोलते हैं? क्या उन्हें नहीं पता कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुसलमानों के बारे में क्या कहते हैं?.
राशिद अल्वी ने कहा कि अगर अमेरिका जाकर सच नहीं बोला जाएगा, तो दुनिया इस तरह के बयानों पर भरोसा नहीं करेगी. उन्होंने कहा, इससे छवि और खराब होगी. भारत के अंदर जो हो रहा है, उसे पूरी दुनिया जानती है.

वहीं राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने अमेरिका में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के ‘विविधता में एकता’ वाले बयान पर निशाना साधा .सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, भागवत न्यूयॉर्क में कहते हैं, ‘विविधता हमारी मूल एकता की खूबसूरती है और इसे बचाकर रखना चाहिए’, विदेश में समझदारी की बातें, लेकिन देश में ख़ामोशी.
उन्होंने कहा कि सिर्फ़ शब्द मायने नहीं रखते, उस पर अमल भी होना चाहिए. सिब्बल की यह प्रतिक्रिया भागवत के न्यूयॉर्क में दिए उस भाषण के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘विविधता में एकता’ भारत के डीएनए में है और इसका सम्मान करना चाहिए और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए.
शनिवार को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित इंफोसिस थिएटर में आयोजित एक कार्यक्रम में भागवत ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय और अलग-अलग धर्मों के नेताओं को संबोधित किया. भागवत ने कहा कि अमेरिका की बात होती है तो अक्सर बहुलवाद की चर्चा होती है, जबकि भारत के संदर्भ में ‘विविधता में एकता’ की बात की जाती है. उन्होंने कहा कि एकता और विविधता, दोनों भारत के डीएनए का हिस्सा हैं. स्वामी विवेकानंद का ज़िक्र करते हुए भागवत ने कहा कि हर देश का अपना एक उद्देश्य और भविष्य होता है.
भागवत ने कहा, भारत का उद्देश्य विविधता में एकता को महसूस करना और समय-समय पर दुनिया को भी इसका एहसास कराना है. हम एक हैं और हमारी विविधता उस एकता को और खूबसूरत बनाती है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता को लेकर दिए गए बयान पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के कार्यकारी सदस्य मौलाना खालिद राशिद फिरंगी महली ने प्रतिक्रिया दी है.
मौलाना खालिद राशिद फिरंगी महली ने कहा, मोहन भागवत ने जो कहा है, मेरी राय में उसे देश में ज़मीनी स्तर पर लागू भी किया जाना चाहिए. तभी इस तरह के बयान को सकारात्मक कहा जा सकता है. उन्होंने कहा कि भागवत के बयान से एक सकारात्मक संदेश ज़रूर गया है.
खालिद राशिद ने कहा, यह सच्चाई है कि बड़ी संख्या में लोग अपने निजी हितों की वजह से राजनीति कर रहे हैं. लेकिन अगर सत्ता में बैठे लोग जनता की समस्याओं को हल करने का काम करें, तो राजनीति एक बहुत बड़ी सामाजिक सेवा बन सकती है. उन्होंने आगे कहा कि हक़ीक़त यह है कि ज़्यादातर नेता आम लोगों और देश के हित में काम करने के बजाय अपने निजी स्वार्थों को प्राथमिकता दे रहे हैं. दरअसल, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को न्यूयॉर्क में एक सम्मेलन में कहा कि जो हिंदू यह मानता है कि मुसलमानों को भारत से ”बाहर निकाल देना चाहिए”, वह हिंदू नहीं रह सकता.





















