

Raipur chhattisgarh VISHESH / चीनी की बढ़ती क़ीमतों के ख़िलाफ़ कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ में ‘चीनी सत्याग्रह’ शुरू करने की तैयारी कर रही है. पार्टी ने इस आंदोलन की तुलना आज़ादी के आंदोलन के दौरान हुए महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह से की है.छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बैज ने आरोप लगाया कि क़रीब 40 रुपये किलो मिलने वाली शक्कर की क़ीमत बढ़कर 70 से 75 रुपये किलो तक पहुँच गई है. उन्होंने कहा कि क़ीमतों में इस बढ़ोतरी का सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है.
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि महंगाई का असर अब आम लोगों के घरेलू बजट पर साफ़ दिखाई दे रहा है और रोज़मर्रा की ज़रूरत की कई चीज़ें लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं.चीनी की क़ीमतों में बढ़ोतरी के पीछे गन्ने के इस्तेमाल को इथेनॉल उत्पादन से भी जोड़ा.

उन्होंने कहा, “देश में बड़े पैमाने पर गन्ने का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में किया जा रहा है, जिससे शक्कर की उपलब्धता प्रभावित हुई है. उन्होंने इथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर भी सवाल उठाए और दावा किया कि इससे वाहनों को नुक़सान हो रहा है.”
ब्रिटिश शासन के दौरान नमक पर लगाए गए कर के विरोध में महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह किया था. इसी तरह कांग्रेस अब चीनी की बढ़ती क़ीमत को आम लोगों के मुद्दे से जोड़कर ‘चीनी सत्याग्रह’ के ज़रिए सरकार के ख़िलाफ़ विरोध दर्ज कराएगी.
उन्होंने कहा कि ‘चीनी सत्याग्रह’ केवल शक्कर की क़ीमतों तक सीमित नहीं रहेगा. इसमें महंगाई, राशन व्यवस्था और आम लोगों पर बढ़ते आर्थिक दबाव जैसे मुद्दों को भी शामिल किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के ज़रिए महंगाई के मुद्दे को प्रदेशभर में उठाया जाएगा.कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश की कई राशन दुकानों और सोसाइटियों में शक्कर और गुड़ उपलब्ध नहीं हैं. उन्होंने चने समेत कुछ अन्य खाद्य सामग्री की आपूर्ति प्रभावित होने का भी आरोप लगाया.





















