



केवल चार एमएल (4 ML) कंट्रास्ट डाइ से महिला मरीज की सफल एंजियोप्लास्टी
एडवांस्ड कार्डियक इंस्टीट्यूट, रायपुर ने आईवीयूएस (IVUS) तकनीक से रचा उपचार का नया कीर्तिमान, किडनी मरीजों के लिए बनी सुरक्षित उपचार पद्धति

IVUS guided – 4 ml contrast Angioplasty in renal patient at ACI

Raipur chhattisgarh VISHESH / रायपुर, 6 अगस्त 2026. पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय स्थित एडवांस्ड कार्डियक इंस्टीट्यूट (ACI) के कार्डियोलॉजी विभाग ने हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल की है। कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. स्मित श्रीवास्तव के नेतृत्व में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने गुर्दे (किडनी) की समस्या के उच्च जोखिम से ग्रस्त एक महिला मरीज की राइट कोरोनरी आर्टरी (RCA) की सफल आईवीयूएस (IVUS) गाइडेड अल्ट्रा-लो कंट्रास्ट एंजियोप्लास्टी की। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान केवल 4 मिलीलीटर (ML) कंट्रास्ट डाइ का उपयोग किया गया, जबकि सामान्य एंजियोप्लास्टी में 80 से 150 एमएल तक कंट्रास्ट डाइ की आवश्यकता होती है।
यह जटिल प्रक्रिया इंट्रावैस्कुलर अल्ट्रासाउंड (IVUS) तकनीक की सहायता से संपन्न की गई। इस तकनीक में रक्त वाहिका के भीतर विशेष अल्ट्रासाउंड कैथेटर के माध्यम से धमनी की आंतरिक संरचना, ब्लॉकेज की गंभीरता तथा स्टेंट के आकार एवं उसकी सटीक स्थिति का वास्तविक समय में आकलन किया जाता है। इसके कारण न्यूनतम कंट्रास्ट डाइ का उपयोग करते हुए भी स्टेंट को अत्यंत सटीकता और सुरक्षा के साथ प्रत्यारोपित किया जा सका।
डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने बताया कि सामान्य एंजियोप्लास्टी में प्रयुक्त आयोडीन युक्त कंट्रास्ट डाइ से कंट्रास्ट-इंड्यूस्ड एक्यूट किडनी इंजरी (Contrast-Induced Acute Kidney Injury) का खतरा रहता है, विशेषकर उन मरीजों में जिनकी किडनी पहले से प्रभावित होती है। ऐसे मरीजों के लिए आईवीयूएस (IVUS) गाइडेड अल्ट्रा-लो कंट्रास्ट अथवा जीरो-कंट्रास्ट एंजियोप्लास्टी सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है। उन्होंने बताया कि केवल चार एम एल (4 ML) कंट्रास्ट का उपयोग कर पूरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न करना उपचार की एक एक अत्यंत आधुनिक तकनीक है।
चूंकि मरीज को अन्य कई प्रकार की स्वास्थ्यगत समस्या थी इसलिए इस उपचार प्रक्रिया को संपन्न कराने के लिए किडनी रोग विशेषज्ञ से भी राय ली गई। प्रक्रिया के बाद महिला मरीज की स्थिति पूरी तरह स्थिर एवं संतोषजनक है। मरीज तेजी से स्वस्थ हो रही है तथा उसे शीघ्र ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
इस केस के संबंध में चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी कहते हैं कि आधुनिक IVUS इमेजिंग तकनीक के माध्यम से जटिल हृदय रोगों का उपचार अब पहले से अधिक सुरक्षित, सटीक और प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। एडवांस्ड कार्डियक इंस्टीट्यूट लगातार नई तकनीकों को अपनाते हुए मरीजों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है
अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर के अनुसार, एडवांस्ड कार्डियक इंस्टीट्यूट प्रदेश में उन्नत हृदय चिकित्सा सेवाओं का प्रमुख केंद्र बन गया है। यहाँ पर उच्च जोखिम वाले हृदय के मरीजों को अधिक सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
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