
Raipur chhattisgarh VISHESH /दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की ज़मानत याचिकाएं ख़ारिज कर दीं. ये याचिकाएं 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के पीछे कथित बड़ी साज़िश के मामले में ग़ैरक़ानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज केस से जुड़ी थीं.
कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एडिशनल सेशंस जज) समीर बाजपेयी ने दोनों अभियुक्तों की ज़मानत याचिकाएं ख़ारिज कर दीं. इससे पहले शनिवार को ख़ालिद की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील त्रिदीप पेस ने मौजूदा ज़मानत याचिका तक की घटनाओं का ज़िक्र किया.

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ख़ालिद को ज़मानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि उमर और शरजील एक साल तक ज़मानत के लिए अर्ज़ी नहीं दे सकते, लेकिन इस दौरान सुरक्षित गवाहों से पूछताछ की जानी चाहिए.
शरजील इमाम की ओर से पेश हुए वकील तालिब मुस्तफ़ा ने दलील दी कि याचिकाकर्ता पहले ही काफ़ी समय जेल में बिता चुके हैं और जल्द ही मुक़दमे के ख़त्म होने की कोई संभावना नहीं है. उन्होंने कहा कि जब दूसरे अभियुक्तों को राहत दी गई है, तो उसका फ़ायदा शरजील को भी मिलना चाहिए.इस साल 05 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने गुलफ़िशा फ़ातिमा, मीरान हैदर, शिफ़ा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम ख़ान और शादाब अहमद को ज़मानत दे दी थी. हालांकि, कोर्ट ने उमर और शरजील को ज़मानत देने से इनकार कर दिया था.





















