
प्रविष्टि तिथि: 02 JUL 2026 6:16PM by PIB Raipur
भिलाई इस्पात संयंत्र के राजभाषा विभाग के तत्वावधान में नगर सेवाएँ विभाग द्वारा राजभाषा कार्यशाला के अंतर्गत ‘मेरा विषय–मेरी समालोचना’ विषय पर हिंदी संगोष्ठी का आयोजन नगर सेवाएँ भवन के सभागार में किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों में हिंदी के प्रति अनुराग विकसित करना, अभिव्यक्ति कौशल को प्रोत्साहित करना तथा कार्यालयीन कार्यों में राजभाषा हिंदी के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाप्रबंधक (नगर सेवाएँ) सुश्री आर. रंजनी ने की। मुख्य अतिथि महाप्रबंधक (मानव संसाधन–औद्योगिक संबंध एवं ठेका श्रमिक प्रकोष्ठ) श्री राजीव कुमार थे। पूर्व वरिष्ठ प्रबंधक (सिविल), हिंदुस्तान स्टीलवर्क्स कंस्ट्रक्शन लिमिटेड (एचएससीएल) श्री देवेन्द्र कुमार दुबे तथा उप प्रबंधक (संपर्क एवं प्रशासन–राजभाषा) श्री जितेन्द्र दास मानिकपुरी विशिष्ट वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के प्रारंभ में उप प्रबंधक (प्रवर्तन) एवं विभागीय राजभाषा समन्वय अधिकारी श्री मुकुंद दास मानिकपुरी ने स्वागत उद्बोधन देते हुए बताया कि नगर सेवाएँ विभाग वर्ष 2010 से राजभाषा हिंदी में उत्कृष्ट कार्यालयीन कार्य तथा राजभाषा नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निदेशक प्रभारी ‘राजभाषा वैजयंती पुरस्कार’ प्राप्त करता रहा है।
मुख्य अतिथि श्री राजीव कुमार ने संत कबीर के प्रसिद्ध दोहे “निंदक नियरे राखिए…” का उल्लेख करते हुए कहा कि रचनात्मक समालोचना व्यक्ति और संगठन, दोनों के सतत विकास का आधार है। उन्होंने कहा कि सकारात्मक आलोचना आत्ममंथन की प्रेरणा देती है और कार्यशैली के साथ-साथ विचारों में भी गुणात्मक सुधार का मार्ग प्रशस्त करती है।
विशिष्ट वक्ता श्री देवेन्द्र कुमार दुबे ने ‘21वीं शताब्दी की नई शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत जन-जागरण कार्यक्रम’ विषय पर अपने विचार रखते हुए ज्ञानवर्धक साहित्य के अध्ययन, मानवीय मूल्यों, मानसिक विकास तथा स्वस्थ जीवनशैली के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं श्री जितेन्द्र दास मानिकपुरी ने भिलाई इस्पात संयंत्र के राजभाषा कार्यक्रमों के उद्देश्य, समालोचना की अवधारणा एवं उसकी उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी तथा प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों की समीक्षात्मक समीक्षा भी प्रस्तुत की।
संगोष्ठी में प्रतिभागियों ने विभिन्न समसामयिक एवं विषयगत विषयों पर अपने विचार रखे। इंजीनियरिंग एसोसिएट श्री आलोक ताम्रकार ने ‘अचानक ठप हुए बड़े सिस्टम की दुरुस्ती की प्रक्रिया’, डॉ. शीतल चंद्र शर्मा ने ‘90 के दशक का हिंदी सिनेमा : समालोचना के दायरे में’, जूनियर इंजीनियरिंग एसोसिएट श्री वाई. उमाशंकर राव ने ‘वर्तमान दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस)’, सहायक महाप्रबंधक श्री रमेश कुमार गुप्ता ने ‘आईना’ तथा सहायक महाप्रबंधक श्री पी. एल. साहू ने ‘मीडिया तंत्र’ विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
समापन सत्र में अध्यक्ष सुश्री आर. रंजनी ने सभी वक्ताओं एवं प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन राजभाषा हिंदी के प्रभावी प्रयोग के साथ-साथ वैचारिक अभिव्यक्ति को भी नई दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने अतिथियों, प्रतिभागियों एवं उपस्थित श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रतिभागियों एवं विभिन्न विभागों से उपस्थित श्रोताओं को सम्मानित किया गया तथा अतिथियों को नगर सेवाएँ विभाग की ओर से स्मृति-चिह्न भेंट किए गए।
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