

Manpreet singh : विष्णु देव साई (जन्म 21 फरवरी 1964) एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं जो वर्तमान में 2023 से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत हैं। वे मध्य भारत के पहले वरिष्ठ आदिवासी नेता हैं। ग्रामीण परिवेश में जन्म लेने के कारण उन्होंने किसानों, वनवासियों और श्रमिक वर्ग के जीवन संघर्ष को प्रत्यक्ष रूप से देखा। यही अनुभव आगे चलकर उनकी राजनीतिक सोच और कार्यशैली का आधार बनी हैं l छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की औपचारिक शिक्षा 12वीं कक्षा (उच्च माध्यमिक) तक हुई है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा जशपुर जिले के कुनकुरी स्थित लोयला हायर सेकेंडरी स्कूल से पूरी की। साई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सदस्य हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सुशासन, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक सुदृढ़ एवं परिणाम आधारित बनाने के लिए सुशासन एवं अभिसरण विभाग का गठन किया है।
विष्णु देव साय भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ नेता और छत्तीसगढ़ के चौथे तथा वर्तमान मुख्यमंत्री हैं। वे राज्य के पहले आदिवासी मुख्यमंत्री हैं। एक किसान परिवार से निकलकर जमीनी स्तर से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने वाले साय अपनी सहजता और आदिवासी समाज के सशक्त प्रतिनिधित्व के लिए जाने जाते हैं। विष्णु देव साय के विस्तृत राजनीतिक इतिहास और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को छत्तीसगढ़ जनसंपर्क संचालनालय पर भी देखा जा सकता है। उनकी आधिकारिक जानकारी और योजनाओं के लिए चीफ मिनिस्टर ऑफिस, छत्तीसगढ़ गवर्नमेंट की वेबसाइट पर विजिट करें।

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के फरसाबहार विकासखण्ड के ग्राम बगिया मे जन्मे विष्णु देव साय जिनके पिता स्वर्गीय श्री राम प्रसाद साय और माता श्रीमती जसमनी देवी साय हैं। श्री विष्णुदेव साय का विवाह 27 मई 1991 को श्रीमती कौशल्या देवी साय से हुआ। उनके एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं। श्री विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले के कुनकुरी से अपनी हायर सेकेण्डरी की शिक्षा संपन्न की।श्री विष्णुदेव साय का मूल व्यवसाय कृषि है। किसान परिवार के श्री साय ने लंबा राजनीतिक सफर तय कर ऊंचा मुकाम हासिल किया। उन्होंने तत्कालीन अविभाजित मध्यप्रदेश में सन् 1989 में बगिया ग्राम पंचायत के पंच के रूप में अपने राजनीतिक जीवन शुरुआत की। विष्णुदेव साय का व्यक्तित्व अत्यंत सहज और सरल माना जाता है। वे जनसामान्य के बीच बिना औपचारिकता के संवाद करने वाले नेता हैं। ग्राम सभाओं, छोटे कार्यकर्ताओं और सामान्य नागरिकों से उनका आत्मीय संबंध उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति रहा है। यही कारण है कि वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी समाज की आशाओं के प्रतिनिधि के रूप में देखे जाते हैं।उनकी राजनीति में आडंबर की अपेक्षा व्यवहारिकता अधिक दिखाई देती है। उन्होंने संगठनात्मक जीवन में लंबे समय तक कार्य करते हुए धैर्य, अनुशासन और निरंतर जनसंपर्क को अपनी कार्यपद्धति का आधार बनाया।
श्री साय ने सन् 1990 में ग्राम पंचायत बगिया के निर्विरोध सरपंच चुने गए। श्री साय ने सन् 1990 में पहली बार तपकरा विधानसभा से विधायक बने । श्री विष्णुदेव साय 1990 से 98 तक तत्कालिन मध्यप्रदेश के विधानसभा तपकरा से दो बार विधायक रहे । श्री विष्णुदेव साय सन् 1999 से लगातार रायगढ़ से 4 बार सांसद चुने गए। उन्होंने लोकसभा क्षेत्र रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से सन् 1999 में 13वीं लोकसभा, 2004 में 14वीं लोकसभा, सन् 2009 में 15वीं लोकसभा और 2014 में 16वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में उल्लेखनीय कार्य किए।
श्री विष्णुदेव साय ने 27 मई 2014 से 2019 तक केन्द्रीय राज्य मंत्री के रूप में इस्पात, खान, श्रम व रोजगार मंत्रालय का प्रभार संभाला।श्री विष्णुदेव साय मूलतः किसान परिवार से है, लेकिन उनके परिवार के राजनीतिक अनुभव का लाभ उन्हें मिला। उनके बड़े पिताजी स्वर्गीय श्री नरहरि प्रसाद साय, स्वर्गीय श्री केदारनाथ साय लंबे समय से राजनीति में रहे। स्वर्गीय श्री नरहरि प्रसाद लैलूंगा और बगीचा से विधायक और बाद में सांसद चुने गए। केंद्र में संचार राज्यमंत्री के रूप में भी उन्होंने काम किया। स्वर्गीय श्री केदारनाथ साय तपकरा से विधायक रहे। श्री विष्णुदेव साय के दादा स्वर्गीय श्री बुधनाथ साय भी
छत्तीसगढ़ में समाज के कमजोर, वंचित और विशेष जरूरतों वाले वर्गों को सशक्त बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में बीते दो वर्ष उल्लेखनीय सिद्ध हुए हैं। समाज कल्याण विभाग ने इस अवधि में पेंशन योजनाओं, दिव्यांगजन सहायता, वरिष्ठ नागरिक कल्याण, आश्रय सुविधाओं, उभयलिंगी पुनर्वास और नशा मुक्ति कार्यक्रमों के क्षेत्र में व्यापक सुधारों और नई पहल का नेतृत्व किया है। योजनाओं की पारदर्शिता पहुंच और प्रभावशीलता बढ़ाकर राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि अंतिम व्यक्ति तक सहायता और सुरक्षा पहुँचे। यह कार्यकाल संवेदनशील, जवाबदेह और जनकेंद्रित शासन का वास्तविक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
श्री साय का सार्वजनिक जीवन अत्यंत सहज और सरल रहा है। वे संवाद में मधुर, व्यवहार में विनम्र और कार्यकर्ताओं के प्रति आत्मीय माने जाते हैं। राजनीतिक विरोधियों के प्रति भी संयमित भाषा और संतुलित व्यवहार उनकी विशेषता है। यही सौम्यता उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाती है किन्तु प्रशासनिक स्तर पर उनका दृष्टिकोण स्पष्ट और कठोर दिखाई देता है। कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार नियंत्रण, योजनाओं की निगरानी तथा सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता जैसे विषयों पर उन्होंने दृढ़ता का परिचय दिया है। शासन व्यवस्था में जवाबदेही स्थापित करने के लिए समयबद्ध कार्य संस्कृति पर उनका विशेष जोर रहा है। वे यह मानते हैं कि जनहित से जुड़े निर्णयों में अनावश्यक विलंब प्रशासन की विश्वसनीयता को कमजोर करता है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास और सुरक्षा के संतुलन पर भी उनकी नीति उल्लेखनीय मानी जाती है। एक ओर वे संवाद, विकास और विश्वास निर्माण की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर कानून व्यवस्था के प्रश्न पर कठोर रुख अपनाने के पक्षधर हैं। यह दृष्टिकोण उनके “सौम्य व्यक्तित्व, सख्त प्रशासन” की अवधारणा को और अधिक स्पष्ट करता है। विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संवेदनशीलता और कठोर प्रशासन का संतुलन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।छत्तीसगढ़ की आदिवासी पृष्ठभूमि से निकलकर राज्य के सर्वोच्च पद तक पहुँचना उनके संघर्ष, जनविश्वास और संगठनात्मक क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने लंबे समय तक जमीनी राजनीति में कार्य किया और ग्रामीण तथा वनांचल क्षेत्रों की समस्याओं को निकट से समझा।
यही कारण है कि उनके निर्णयों में सामान्य जनता, विशेषकर आदिवासी समाज और ग्रामीण वर्ग की अपेक्षाएँ परिलक्षित होती हैं।श्री साय केनेतृत्व की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि वे परंपरा और आधुनिक प्रशासन दोनों को साथ लेकर चलने का प्रयास करते हैं। अंततः कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का व्यक्तित्व भारतीय राजनीति में संतुलित नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत करता है। उनकी विनम्रता जनता को निकट लाती है और उनकी प्रशासनिक दृढ़ता शासन को प्रभावी बनाती है। सौम्यता और कठोरता का यही समन्वय उन्हें एक विशिष्ट जननेता के रूप में स्थापित करता है।
भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ साधारण परिवेश से निकलकर भी व्यक्ति जननेता बन सकता है। विष्णुदेव साय इसका सशक्त उदाहरण हैं। ग्राम की मिट्टी से जुड़े, आदिवासी अंचल की संवेदनाओं में पले-बढ़े और जनजीवन की वास्तविकताओं को निकट से समझने वाले विष्णुदेव साय का राजनीतिक व्यक्तित्व संघर्ष, सादगी और जनविश्वास से निर्मित हुआ है।
श्री साय ने वनांचल क्षेत्रों की समस्याओं, ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे विषयों को प्राथमिकता देने का प्रयास किया। उनकी सोच में विकास केवल शहरी विस्तार तक सीमित नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक सुविधाएँ पहुँचाने का माध्यम है।








