


राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा 05 नवंबर 2026 को इंस्टीट्यूट लेक्चर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अमेरिका की टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी में जल संसाधन के विशिष्ट प्रोफेसर प्रो. विजय पी. सिंह ने ‘एंट्रॉपी सिद्धांत एवं जल अभियांत्रिकी में इसके अनुप्रयोग’ विषय पर व्याख्यान दिया। व्याख्यान का समन्वय डॉ. विकास विद्यार्थी एवं डॉ. एल. के. यदु द्वारा किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ. विकास विद्यार्थी ने स्वागत उद्बोधन दिया तथा प्रो. विजय पी. सिंह का परिचय प्रस्तुत किया। इस अवसर पर डॉ. यू. के. देवांगन, डॉ. ए. अहिरवार, डॉ. अनूप तिवारी, डॉ. अतिन रॉय सहित अन्य संकाय सदस्य, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में डॉ. चंदन सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
प्रो. विजय पी. सिंह जल संसाधन अभियांत्रिकी के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित विशेषज्ञ हैं। जल विज्ञान, जलगतिकी, जल संसाधन प्रणालियों तथा एंट्रॉपी सिद्धांत के विकास एवं अनुप्रयोग के क्षेत्र में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

अपने व्याख्यान में प्रो. सिंह ने एंट्रॉपी सिद्धांत की मूल अवधारणाओं को समझाते हुए ऊष्मागतिकी में एंट्रॉपी और सूचना सिद्धांत (शैनन एंट्रॉपी) के बीच अंतर स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि ऊष्मागतिकी में एंट्रॉपी ऊर्जा के वितरण एवं किसी भौतिक प्रणाली की सूक्ष्म अवस्थाओं से संबंधित होती है, जबकि सूचना एंट्रॉपी किसी डेटा या संचार प्रणाली में अनिश्चितता, सूचना की मात्रा तथा अपूर्ण जानकारी को मापने का गणितीय आधार प्रदान करती है।
विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने बताया कि सूचना एंट्रॉपी अनिश्चितता, परिवर्तनशीलता एवं अपूर्ण जानकारी के विश्लेषण के लिए एक प्रभावी गणितीय उपकरण है। उन्होंने जल विज्ञान, जलगतिकी, जलवायु विज्ञान, पर्यावरण अभियांत्रिकी, संरचनात्मक अभियांत्रिकी, डेटा साइंस तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के विभिन्न क्षेत्रों में इसके अनुप्रयोगों पर भी प्रकाश डाला।
जल संसाधन अभियांत्रिकी के संदर्भ में उन्होंने नदी प्रवाह की विशेषताओं, वेग वितरण, वर्षा एवं अपवाह प्रतिरूप, बाढ़ विश्लेषण तथा अनिश्चितता आधारित मॉडलिंग में एंट्रॉपी सिद्धांत के व्यावहारिक अनुप्रयोगों की जानकारी दी। साथ ही, उन्होंने इस सिद्धांत के माध्यम से जटिल प्राकृतिक एवं अभियांत्रिकी प्रणालियों में अनिश्चितताओं को समझने और उनका प्रभावी विश्लेषण करने की संभावनाओं को भी रेखांकित किया।








