

Raipur chhattisgarh VISHESH जनवरी में केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में कहा था कि देश के पास आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में गुफाओं, रिफाइनरियों और भंडारण सुविधाओं में रखा इतना कच्चा तेल है कि वह घरेलू मांग को 74 दिनों तक पूरा कर सकता है.
समाचार एजेंसी एएनआई ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि कच्चे तेल का भंडार 25 दिन तक चल सकता है, जबकि पेट्रोल और डीज़ल जैसे पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार अगले 25 दिन तक चल सकता है. यह शॉर्ट टर्म सप्लाई झटकों से निपटने के लिए रखे गए रणनीतिक भंडार से अलग है.

लेकिन प्राकृतिक गैस के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता क़तर ने एक ईरानी ड्रोन हमले के बाद अप्रत्याशित परिस्थितियों का हवाला देते हुए उत्पादन रोकने की बात कही है. भारत के क़रीब 2.7 करोड़ टन लिक्विफ़ाइड नेचरल गैस (एलएनजी) की 40 फ़ीसदी आपूर्ति क़तर से होती है. गैस आयात करने वाली कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड ने भी अपने ग्राहकों, गेल इंडिया और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन को आपूर्ति रुकने की जानकारी दी है.
केंद्रीय मंत्रालय ने अपनी प्रेस रिलीज़ में कहा, “भारत वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों का तीसरा सबसे बड़ा आयातक, चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक है. मध्य-पूर्व क्षेत्र से पैदा हुए अल्पकालिक व्यवधानों से निपटने के लिए देश के पास कच्चे तेल, पेट्रोल, डीज़ल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल सहित प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार है.”
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाकर अपने लोगों के लिए किफ़ायती ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित की है. भारतीय ऊर्जा कंपनियों की अब ऐसी ऊर्जा आपूर्ति तक पहुंच है जो होर्मुज़ स्ट्रेट से होकर नहीं आती. ऐसे कार्गो उपलब्ध रहेंगे और होर्मुज़ के रास्ते अस्थायी रूप से प्रभावित आपूर्ति की भरपाई में मदद करेंगे l
विशेषज्ञों की राय भी सरकार के बयान से मिलती-जुलती है, हालांकि वे इसे कुछ अलग अंदाज़ में रखते हैं. सामान्य तौर पर उम्मीद जताई जा रही है कि मौजूदा जंग रूस-यूक्रेन जंग की तरह लंबी नहीं चलेगी
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडीज़ में ऊर्जा, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के प्रोफ़ेसर आर श्रीकांत को तेल की क़ीमतें बढ़ने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि तेल कंपनियों को कम दाम पर रूसी तेल मिलने के दौरान अतिरिक्त लाभ कमाने का मौक़ा मिला था, उन्होंने कहा, “हम दो-तीन हफ़्तों तक स्थिति संभाल सकते हैं. लेकिन तेल को लेकर भारत से पहले कई अन्य देश परेशानी जताने लगेंगे. यह युद्ध मूल रूप से कई देशों को प्रभावित करेगा. किसी भी स्थिति में तेल की नाकेबंदी एक महीने से ज़्यादा नहीं चल सकती.”





















