

प्रविष्टि तिथि: 23 JUL 2026 6:09PM
भिलाई इस्पात संयंत्र के छत्तीसगढ़ समूह की खदानों में सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आयोजित पाँच दिवसीय “माइन सेफ्टी मैनेजमेंट प्लान (एमएसएमपी) – इम्प्लीमेंटेशन एवं रिव्यू” प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का शुभारंभ 21 जुलाई को राजहरा स्थित माइन वेस्टिब्यूल ट्रेनिंग सेंटर (एमवीटीसी) में हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य खदानों में सुरक्षा संस्कृति को सशक्त बनाना, वैधानिक प्रावधानों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना तथा सुरक्षित एवं उत्तरदायी कार्य प्रणाली को बढ़ावा देना है।


कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में कार्यपालक निदेशक (खदान) कमल भास्कर तथा मुख्य महाप्रबंधक (खदान) आर. बी. गहरवार उपस्थित रहे। इस अवसर पर कमल भास्कर ने कहा कि माइन सेफ्टी मैनेजमेंट प्लान का प्रभावी क्रियान्वयन सुरक्षित, दुर्घटनामुक्त और सतत खनन संचालन की आधारशिला है। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान और अनुभवों को अपने-अपने कार्यस्थलों पर व्यवहारिक रूप से लागू करने का आह्वान किया।
कार्यशाला के पहले दो दिनों में दत्ता माइनिंग कंसल्टेंसी के सुरक्षा विशेषज्ञ एवं पूर्व उप महानिदेशक (खदान सुरक्षा) एस. के. दत्ता ने राजहरा मैकेनाइज्ड माइंस, दल्ली मैकेनाइज्ड माइंस, झरनदल्ली, महामाया, हिर्री, कलवर, रावघाट तथा नंदिनी चूना पत्थर खदान के अधिकारियों एवं वरिष्ठ पर्यवेक्षकों को विस्तृत सैद्धांतिक प्रशिक्षण प्रदान किया। प्रशिक्षण के दौरान माइन सेफ्टी मैनेजमेंट प्लान की तैयारी, क्रियान्वयन, समीक्षा तथा सतत सुधार की प्रक्रियाओं पर विस्तार से जानकारी दी गई। व्यावहारिक उदाहरणों और संवादात्मक सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों की जमीनी स्तर की शंकाओं का समाधान भी किया गया, जिससे वे अपने-अपने कार्यस्थलों पर सुरक्षा प्रबंधन योजना को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए तैयार हो सकें।
कार्यशाला के दूसरे दिन हाल ही में ओडिशा एवं झारखंड समूह की खदानों में हुई विद्युत दुर्घटनाओं के संदर्भ में “खदानों में विद्युत सुरक्षा” विषय पर विशेष तकनीकी सत्र आयोजित किया गया। इसमें प्रतिभागियों को विद्युत सुरक्षा के छह स्वर्णिम नियमों की विस्तृत जानकारी दी गई तथा विद्युत कार्यों के दौरान अपनाई जाने वाली सुरक्षित कार्य प्रणालियों पर विशेष बल दिया गया। प्रतिभागियों ने इस तकनीकी सत्र और एस. के. दत्ता की अनुभव-आधारित प्रशिक्षण शैली को अत्यंत उपयोगी बताया।
यह कार्यशाला माइन वेस्टिब्यूल ट्रेनिंग सेंटर, राजहरा द्वारा प्रभारी बिरेन्द्र कुमार के नेतृत्व में तथा सेल सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (एसएसओ), रांची के सहयोग से कार्यपालक निदेशक (खदान) कमल भास्कर और मुख्य महाप्रबंधक (खदान) आर. बी. गहरवार के मार्गदर्शन में आयोजित की जा रही है।
कार्यशाला के अगले चरण में 23 से 25 जुलाई तक दल्ली मैकेनाइज्ड माइंस, राजहरा मैकेनाइज्ड माइंस तथा नंदिनी चूना पत्थर खदान में स्थल-आधारित हैंडहोल्डिंग सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में प्रत्येक खदान के वर्तमान माइन सेफ्टी मैनेजमेंट प्लान की समीक्षा कर कमियों की पहचान की जाएगी तथा उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए व्यावहारिक सुझाव दिए जाएंगे। इससे भिलाई इस्पात संयंत्र की खदानों में सुरक्षा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने तथा दुर्घटनारहित कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।





















