

मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर, 38 किसानों ने लिया भाग
प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने का आह्वान; किसान-वैज्ञानिक संवाद में कृषि संबंधी समस्याओं का किया समाधान
प्रविष्टि तिथि: 27 OCT 2026 5:33PM by PIB Raipur
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान, रायपुर ने कृषि विज्ञान केंद्र, बेमेतरा और कृषि विभाग के सहयोग से ग्राम अंधियारखोर, विकासखंड नवागढ़ में ‘खेत बचाओ अभियान-2026’ के अंतर्गत किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, प्राकृतिक एवं जैविक खेती तथा संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक करते हुए टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में 38 किसानों ने भाग लिया, जिनमें तीन महिला किसान शामिल थीं।


कार्यक्रम में ग्राम पंचायत अंधियारखोर के सरपंच भी उपस्थित रहे। राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. पी. मुवेंथन और डॉ. योगेश येले ने किसानों से संवाद कर मृदा संरक्षण एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों की जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र, बेमेतरा के विषय विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र कुमार जोशी और श्री डोमन सिंह टेकाम तथा कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी कृषि संबंधी तकनीकी जानकारी साझा की।
विशेषज्ञों ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व, मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के चयन और उपयोग तथा फसलों में संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, खेती की लागत कम करने तथा फसल उत्पादन की गुणवत्ता और स्थिरता बढ़ाने के लिए उर्वरकों का वैज्ञानिक एवं संतुलित उपयोग आवश्यक है। किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड में दी गई सिफारिशों के अनुरूप उर्वरकों का उपयोग करने तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल प्राकृतिक एवं जैविक खेती की पद्धतियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित किसान-वैज्ञानिक संवाद में किसानों ने खेती से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और चुनौतियों को विशेषज्ञों के समक्ष रखा। वैज्ञानिकों एवं कृषि विशेषज्ञों ने किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुरूप उपयोगी सुझाव दिए। इस दौरान मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने, कृषि संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने तथा पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।
‘खेत बचाओ अभियान-2026’ का उद्देश्य किसानों तक वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की पहुंच बढ़ाना, मृदा स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता विकसित करना और टिकाऊ कृषि को प्रोत्साहित करना है। कार्यक्रम के माध्यम से किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच संवाद को बढ़ावा मिला तथा किसानों को बेहतर फसल प्रबंधन एवं मृदा संरक्षण के लिए उपयोगी तकनीकी जानकारी प्राप्त हुई।








