

25 लाख रुपये के ऋण से शुरू किया श्री साईं इंडस्ट्रीज एंड प्रोडक्ट, पार्टिकल बोर्ड से तैयार हो रहे टेबल, सोफा, पलंग और अलमारी सहित विभिन्न फर्नीचर
कभी पूंजी की कमी से अधूरा था उद्योग लगाने का सपना, शासकीय योजना से मिले आर्थिक सहयोग ने खोली उद्यमिता की राह

पति-पत्नी की मेहनत से आगे बढ़ रहा व्यवसाय, स्वरोजगार के साथ स्थानीय स्तर पर अन्य परिवारों की आजीविका का भी बना सहारा
रायपुर, 10 अक्टूबर 2026
कभी आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण स्वयं का उद्योग स्थापित करने का सपना पूरा नहीं कर पा रहे सरगुजा जिले के खत्री परिवार ने आज फर्नीचर निर्माण के क्षेत्र में अपनी पहचान बना ली है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत मिले 25 लाख रुपये के ऋण ने उनके इस सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अम्बिकापुर की श्रीमती हर्षिता खत्री ने योजना से मिले आर्थिक सहयोग से श्री साईं इंडस्ट्रीज एंड प्रोडक्ट के नाम से फर्नीचर निर्माण इकाई स्थापित की है। आज इस उद्योग में विभिन्न प्रकार के फर्नीचर तैयार किए जा रहे हैं और 10 से 12 लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।
हर्षिता खत्री की यह सफलता बताती है कि शासकीय योजनाओं के माध्यम से मिलने वाला वित्तीय सहयोग स्वरोजगार के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। हर्षिता जहां उद्योग की प्रोपराइटर हैं, वहीं उनके पति श्री दिलीप खत्री व्यवसाय के संचालन एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। दोनों के प्रयासों से स्थापित यह उद्योग आज परिवार की आजीविका के साथ अन्य लोगों के लिए भी रोजगार का साधन बन गया है।
*पूंजी की कमी से रुका था सपना, पीएमईजीपी से मिली नई शुरुआत*
श्री दिलीप खत्री बताते हैं कि वे लंबे समय से स्वयं का व्यवसाय शुरू करना चाहते थे। उनके मन में फर्नीचर निर्माण उद्योग स्थापित करने की योजना थी, लेकिन इसके लिए आवश्यक पूंजी की व्यवस्था नहीं हो पा रही थी। आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण उद्योग लगाने का सपना आगे नहीं बढ़ पा रहा था।
इसी दौरान उन्हें जिला व्यापार एवं उद्योग कार्यालय से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के बारे में जानकारी मिली। योजना के अंतर्गत नए उद्यम स्थापित करने के लिए ऋण की सुविधा उपलब्ध होने की जानकारी मिलने पर उन्होंने आवेदन करने का निर्णय लिया।
इसके बाद उनकी पत्नी श्रीमती हर्षिता खत्री के नाम से ऋण के लिए आवेदन किया गया। योजना के माध्यम से 25 लाख रुपये का ऋण प्राप्त होने पर उन्होंने श्री साईं इंडस्ट्रीज एंड प्रोडक्ट के नाम से फर्नीचर निर्माण इकाई की स्थापना की।
इस आर्थिक सहयोग से उद्योग स्थापित करने की वर्षों पुरानी इच्छा पूरी हुई और परिवार को स्वयं का व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिला।
*पार्टिकल बोर्ड से तैयार हो रहे आधुनिक फर्नीचर, निर्माण इकाई में कई तरह के उत्पाद*
श्री साईं इंडस्ट्रीज एंड प्रोडक्ट में पार्टिकल बोर्ड का उपयोग कर विभिन्न प्रकार के फर्नीचर तैयार किए जा रहे हैं। इनमें टेबल, ऑफिस टेबल, ड्रेसिंग टेबल, सोफा, पलंग और अलमारी सहित अन्य फर्नीचर उत्पाद शामिल हैं।
श्री दिलीप खत्री बताते हैं कि उद्योग स्थापित होने के बाद वे फर्नीचर निर्माण से जुड़े कार्यों का संचालन कर रहे हैं। निर्माण इकाई में अलग-अलग जरूरतों के अनुरूप फर्नीचर तैयार किए जाते हैं।
इस व्यवसाय से खत्री परिवार को स्वयं की आजीविका का साधन मिला है। साथ ही फर्नीचर निर्माण से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर अन्य लोगों के लिए भी काम के अवसर उपलब्ध हुए हैं।
*स्वयं का उद्योग स्थापित कर 10 से 12 लोगों को दिया रोजगार*
हर्षिता खत्री की इस पहल की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह है कि उनका उद्योग केवल परिवार के स्वरोजगार तक सीमित नहीं है। फर्नीचर निर्माण इकाई में वर्तमान में 10 से 12 कर्मचारी कार्यरत हैं।
ये कर्मचारी फर्नीचर निर्माण से जुड़े विभिन्न कार्यों में योगदान दे रहे हैं। इससे उन्हें नियमित रोजगार का अवसर मिल रहा है और उनके परिवारों की आजीविका को भी सहारा मिल रहा है।
श्री दिलीप खत्री बताते हैं कि कभी वे स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने के लिए आर्थिक सहयोग की तलाश कर रहे थे। आज अपनी निर्माण इकाई संचालित करने के साथ अन्य लोगों को रोजगार उपलब्ध करा पाना उनके लिए संतोष की बात है।
उनका कहना है कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम से ऋण नहीं मिला होता तो उद्योग स्थापित करना कठिन था। योजना से मिले सहयोग ने उन्हें अपने व्यावसायिक विचार को वास्तविक स्वरूप देने का अवसर प्रदान किया।
*पति-पत्नी के प्रयासों से साकार हुआ आत्मनिर्भरता का सपना*
श्रीमती हर्षिता खत्री और उनके पति श्री दिलीप खत्री ने उद्योग स्थापित कर स्वरोजगार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। हर्षिता उद्योग की प्रोपराइटर हैं और दिलीप इसके संचालन एवं प्रबंधन का कार्य संभाल रहे हैं।
परिवार ने योजना से प्राप्त ऋण का उपयोग फर्नीचर निर्माण इकाई स्थापित करने में किया। आज यह व्यवसाय उनके लिए आय का साधन होने के साथ अन्य लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का माध्यम भी बन गया है।
खत्री परिवार की यह पहल दर्शाती है कि उद्यमिता के लिए आर्थिक सहयोग और निरंतर प्रयास मिलने पर छोटे स्तर से भी उद्योग स्थापित कर स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान दिया जा सकता है।
*“आज अपना उद्योग चलाने के साथ दूसरों को रोजगार दे पा रहे हैं”*
श्री दिलीप खत्री बताते हैं कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम उनके परिवार के लिए स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ है।
उनका कहना है कि योजना के माध्यम से 25 लाख रुपये का ऋण मिलने के बाद वे फर्नीचर निर्माण इकाई स्थापित कर सके। आज इस उद्योग से उनके परिवार की आजीविका चल रही है और 10 से 12 लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।
दिलीप खत्री के अनुसार, स्वयं का उद्योग स्थापित करना उनके परिवार की लंबे समय से इच्छा थी। अब इस सपने के साकार होने के साथ अन्य लोगों को काम उपलब्ध कराना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है।
*प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार*
श्री दिलीप खत्री ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के माध्यम से मिले आर्थिक सहयोग के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि योजना से मिले ऋण ने उद्योग स्थापित करने की राह आसान बनाई। आज उनका परिवार स्वयं का व्यवसाय संचालित कर रहा है और अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा रहा है।
*स्वरोजगार से रोजगार सृजन तक, खत्री परिवार की सफलता बनी प्रेरणा*
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत हर्षिता खत्री की यह कहानी स्वरोजगार से रोजगार सृजन तक के सफर का प्रेरक उदाहरण है। कभी पूंजी की कमी के कारण उद्योग स्थापित नहीं कर पाने वाला परिवार आज अपनी फर्नीचर निर्माण इकाई का संचालन कर रहा है।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम से मिले 25 लाख रुपये के ऋण ने खत्री परिवार को उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर दिया। इस सहयोग से स्थापित श्री साईं इंडस्ट्रीज एंड प्रोडक्ट में आज विभिन्न प्रकार के फर्नीचर तैयार हो रहे हैं और 10 से 12 लोगों को रोजगार मिल रहा है।
हर्षिता खत्री की सफलता यह दर्शाती है कि शासन की स्वरोजगार योजनाओं का लाभ लेकर महिलाएं उद्यमिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के साथ अन्य लोगों के लिए भी आजीविका के अवसर सृजित कर सकती हैं। खत्री परिवार का यह प्रयास आत्मनिर्भरता, महिला उद्यमिता और स्थानीय रोजगार सृजन की प्रेरक मिसाल बन गया है।





















