



Raipur chhattisgarh VISHESH दंतेवाड़ा, । देश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक और जवाबदेह बनाने के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 लागू किए गए हैं। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित इन नियमों ने वर्ष 2016 के नियमों का स्थान लिया है। नए प्रावधानों में स्रोत पर कचरे का पृथक्करण, डिजिटल निगरानी, थोक अपशिष्ट उत्पादकों की जवाबदेही, कचरे से तैयार ईंधन के उपयोग और ‘प्रदूषक भुगतान’ के सिद्धांत पर विशेष जोर दिया गया है।
पत्र सूचना कार्यालय, रायपुर द्वारा दंतेवाड़ा में आयोजित ‘वार्तालाप’ कार्यक्रम में मुख्य नगर पालिका अधिकारी अरुण ध्रुव ने पत्रकारों को नए नियमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब कचरे को स्रोत पर चार श्रेणियों—गीला, सूखा, स्वच्छता और विशेष देखभाल अपशिष्ट में अलग करना होगा। गीले कचरे में रसोई, भोजन और बागवानी का कचरा, जबकि सूखे कचरे में प्लास्टिक, कागज, कांच, धातु और कपड़ा शामिल होंगे। डायपर और सैनिटरी पैड जैसे स्वच्छता अपशिष्ट तथा ई-कचरा, बैटरियां, दवाइयां, ट्यूबलाइट और पेंट की बोतलों जैसे विशेष देखभाल वाले कचरे को अलग रखना होगा।

नियमों के तहत कचरा प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के केंद्रीकृत डिजिटल पोर्टल से जोड़ने की व्यवस्था की गई है। इसके माध्यम से कचरे के संग्रहण और परिवहन से लेकर सामग्री पुनर्प्राप्ति सुविधा (Material Recovery Facility—MRF) में छंटाई तथा पुराने जमा कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की निगरानी की जा सकेगी।
थोक अपशिष्ट उत्पादकों (Bulk Waste Generators—BWGs) की जिम्मेदारी भी बढ़ाई गई है। उन्हें गीले कचरे के स्थानीय स्तर पर कंपोस्टिंग या बायोगैस के माध्यम से प्रसंस्करण को प्राथमिकता देनी होगी। इससे कचरे के स्रोत पर ही प्रसंस्करण और नगरपालिका की व्यवस्था पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी।
औद्योगिक प्रतिष्ठानों में रिफ्यूज-डिराइव्ड फ्यूल (Refuse-Derived Fuel—RDF) के उपयोग को भी बढ़ावा दिया गया है। सीमेंट संयंत्रों, विद्युत संयंत्रों और औद्योगिक बॉयलरों में कोयले के विकल्प के रूप में इसके चरणबद्ध उपयोग का प्रावधान किया गया है। इससे लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा कम करने और कचरे से ऊर्जा प्राप्त करने को बढ़ावा मिलेगा।
नए नियमों में ‘प्रदूषक भुगतान’ (Polluter Pays Principle) के तहत नियमों के उल्लंघन और कचरे के अनुचित प्रबंधन पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का प्रावधान है। बिना उचित प्रसंस्करण के कचरे को लैंडफिल में भेजने को भी हतोत्साहित किया गया है।
नए नियमों का मूल संदेश स्पष्ट है—कचरा प्रबंधन केवल स्थानीय निकाय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि कचरा उत्पन्न करने वाले प्रत्येक व्यक्ति, संस्थान और प्रतिष्ठान की साझा जिम्मेदारी है।





















