







अचानक पीपरतराई स्कूल पहुंचे केंद्रीय राज्यमंत्री; विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद के साथ शिक्षा, मध्यान्ह भोजन, खेलकूद और मूलभूत सुविधाओं का लिया जायजा
बिलासपुर। जनप्रतिनिधि जब औपचारिकताओं और प्रोटोकॉल से आगे बढ़कर सीधे बच्चों के बीच पहुंचता है, तो विकास की तस्वीर कागजों से निकलकर जमीनी हकीकत में दिखाई देती है। ऐसा ही आत्मीय दृश्य शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पीपरतराई में देखने को मिला, जब केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री एवं बिलासपुर सांसद श्री तोखन साहू बिना किसी पूर्व सूचना और औपचारिक प्रोटोकॉल के अचानक विद्यालय पहुंच गए।

विद्यालय पहुंचकर श्री साहू ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया और यह समझने का प्रयास किया कि विद्यार्थियों को वास्तव में किस प्रकार की सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने कक्षाओं, पेयजल, स्वच्छता, शौचालय, विद्युत, बैठने की व्यवस्था सहित विभिन्न मूलभूत सुविधाओं की जानकारी ली।
इसके बाद श्री साहू सीधे विद्यार्थियों के बीच पहुंचे। उन्होंने बच्चों से सहज और आत्मीय संवाद करते हुए उनकी पढ़ाई, परीक्षा की तैयारियों, रुचियों और भविष्य के सपनों के बारे में जाना। उन्होंने बच्चों का सुख-दुःख पूछा और उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं को गंभीरता से सुना।
बच्चों की थाली में पोषण, खेल के मैदान में आत्मविश्वास
श्री साहू ने विद्यालय में संचालित मध्यान्ह भोजन व्यवस्था की भी जानकारी ली। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता, पौष्टिकता, स्वच्छता और नियमितता पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर ही स्वस्थ मन और बेहतर शिक्षा की आधारशिला है।
उन्होंने खेलकूद की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। श्री साहू ने कहा कि पढ़ाई के साथ खेल विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक हैं। खेल बच्चों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और आत्मविश्वास विकसित करते हैं।
हर बच्चे के सपने को मिले सही दिशा
विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए श्री साहू ने कहा कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास सफलता की सबसे मजबूत सीढ़ियां हैं। हर विद्यार्थी के भीतर आगे बढ़ने की क्षमता होती है। आवश्यकता है उसे सही अवसर, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन देने की।
उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ उनके स्वास्थ्य, पोषण, खेलकूद और व्यक्तिगत आवश्यकताओं पर भी संवेदनशीलता से ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा नहीं करते, बल्कि बच्चों के सपनों को दिशा देकर राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करते हैं।
प्रोटोकॉल से परे, जनसेवा की आत्मीय तस्वीर
श्री साहू का बिना पूर्व सूचना विद्यालय पहुंचना और सीधे विद्यार्थियों के बीच जाकर उनसे संवाद करना जनप्रतिनिधित्व की उस संवेदनशील कार्यशैली को सामने लाता है, जिसमें कागजी रिपोर्ट से अधिक महत्व जमीनी अनुभव और लोगों की आवाज को दिया जाता है।
पीपरतराई में बच्चों के बीच बिताया गया समय केवल विद्यालय निरीक्षण नहीं, बल्कि उनके सपनों, जरूरतों और उम्मीदों को समझने का आत्मीय प्रयास रहा। क्योंकि बेहतर भविष्य की शुरुआत सिर्फ बेहतर भवनों से नहीं, बल्कि तब होती है जब किसी बच्चे को यह विश्वास मिले कि उसके सपनों को सुनने और उन्हें दिशा देने वाला कोई उसके साथ खड़ा है।
इसके पश्चात लोरमी प्रवास के दौरान श्री साहू ने विश्राम गृह में पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ताओं एवं साथियों से आत्मीय भेंट-मुलाकात की तथा क्षेत्र के विकास और जनसेवा से जुड़े विभिन्न विषयों पर सार्थक संवाद किया।





















