

भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान और साक्ष्यों के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए: श्री प्रतापराव जाधव
केंद्रीय राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने आयुष मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की पांचवीं बैठक की अध्यक्षता की
समिति ने शिक्षा, अनुसंधान, गुणवत्ता मानकों और व्यापक सामुदायिक पहुंच के माध्यम से योग और प्राकृतिक चिकित्सा को सुदृढ़ करने पर विचार-विमर्श किया
प्रविष्टि तिथि: 10 AUG 2026 9:13PM by PIB Delhi
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने आज नई दिल्ली में आयुष मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की पांचवीं बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में “योग और प्राकृतिक चिकित्सा” पर ध्यान केंद्रित किया गया तथा इसमें निवारक स्वास्थ्य सेवा, स्वस्थ जीवनशैली, पुनर्वास और समग्र कल्याण में इनकी बढ़ती प्रासंगिकता पर भी विचार-विमर्श किया गया।

समिति को संबोधित करते हुए, केंद्रीय राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा में योग और प्राकृतिक चिकित्सा का एक विशिष्ट स्थान है। ये स्वास्थ्य में सुधार और समग्र कल्याण पर केंद्रित समग्र, दवा-मुक्त दृष्टिकोण प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि योग से शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य बेहतर होता है, जबकि प्राकृतिक चिकित्सा पोषण, जीवनशैली में बदलाव, प्राकृतिक उपचार और शरीर की अंतर्निहित उपचार क्षमता पर जोर देती है।
श्री प्रतापराव जाधव ने आधुनिक जीवनशैली से जुड़े गैर-संचारी रोगों, तनाव और मानसिक स्वास्थ्य की बढ़ती चुनौतियों का उल्लेख किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रोग के उपचार के साथ-साथ, रोग की रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने पर ध्यान देने की बहुत ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि योग और प्राकृतिक चिकित्सा स्वस्थ जीवन, पुनर्वास, मानसिक स्वास्थ्य, तनाव और दर्द प्रबंधन, मातृ और शिशु स्वास्थ्य और वेलनेस में मदद कर सकते हैं। स्वस्थ जीवन के महत्व के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत में बुजुर्गों की आबादी बढ़ रही है, इसलिए शारीरिक गतिविधि, मानसिक स्वास्थ्य, चलने-फिरने की क्षमता, आत्मनिर्भरता और जीवन की गुणवत्ता बनाए रखना आवश्यक है तथा योग व प्राकृतिक चिकित्सा वृद्धावस्था में स्वस्थ और सक्रिय रहने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
श्री जाधव ने कहा कि सरकार मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआईवाई), योग सर्टिफ़िकेशन बोर्ड (वाईसीबी), राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान (एनआईएन), केंद्रीय योग और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद (सीसीआरवाईएन) और प्राकृतिक चिकित्सा पंजीकरण बोर्ड (एनआरबी) के माध्यम से योग व प्राकृतिक चिकित्सा के लिए संस्थागत इकोसिस्टम को मज़बूत कर रही है। उन्होंने शिक्षा, प्रशिक्षण, प्रमाणन, अनुसंधान, स्वास्थ्य सेवा, गुणवत्ता आश्वासन और पेशेवर मानकीकरण में उनकी भूमिका को रेखांकित किया और कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा पंजीकरण बोर्ड की स्थापना प्राकृतिक चिकित्सा में पंजीकरण और गुणवत्ता मानकों को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान और साक्ष्यों के साथ एकीकृत करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए, श्री जाधव ने कहा, “परंपरा हमारी शक्ति है, विज्ञान इसका प्रमाण है, और गुणवत्ता हमारी प्राथमिकता है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि योग और प्राकृतिक चिकित्सा को आधुनिक चिकित्सा का पूरक होना चाहिए, जिसमें रोकथाम, स्वास्थ्य में सुधार, जीवनशैली में बदलाव, पुनर्वास और कल्याण पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए।
आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री अलरमेलमंगई डी. ने योग और प्राकृतिक चिकित्सा के संस्थागत, शैक्षिक, अनुसंधान और आउटरीच इकोसिस्टम पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति में देश भर में 22 सीसीआरवाईएन इकाइयों, योग पाठ्यक्रम कराने वाले 100 से अधिक विश्वविद्यालयों, 5,000 से अधिक योग केंद्रों, 113 मान्यता प्राप्त संस्थानों और 29 मान्यता प्राप्त कार्मिक प्रमाणन निकायों के साथ-साथ भारत के बढ़ते शोध आधार (10,500 से अधिक पीयर-रिव्यू और पबमेड-इंडेक्स्ड प्रकाशनों) और अनुसंधान सहयोग, डिजिटल आउटरीच, वेलनेस टूरिज्म और रोजगार सृजन की पहलों पर भी प्रकाश डाला गया।
बैठक में उपस्थित संसदीय सलाहकार समिति के सदस्यों में लोकसभा के डॉ. स्वामी सचिदानंद हरि साक्षी, श्री आष्टिकर पाटिल नागेश बापुराव, श्री खलीलुर रहमान, श्री नीलेश ज्ञानदेव लंके और श्री लावु श्री कृष्ण देवरायलु; राज्यसभा के श्री घनश्याम तिवारी, श्री सदानंद म्हालू शेट तनावडे, श्री बाबूभाई जेसंगभाई देसाई और डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी; और लोकसभा से स्थायी विशेष आमंत्रित सदस्य श्री कृष्ण प्रसाद टेनेटी और श्रीमती ज्योत्सना चरणदास महंत तथा राज्यसभा से स्थायी विशेष आमंत्रित सदस्य श्रीमती धर्मशीला गुप्ता एवं श्रीमती रेणुका चौधरी शामिल थीं। विचार-विमर्श के दौरान, संसद सदस्यों और विशेषज्ञ सदस्यों ने योग व प्राकृतिक चिकित्सा में शिक्षा के लिए एक एकीकृत नियामक तंत्र की आवश्यकता पर सर्वसम्मति से सहमति व्यक्त की।
बैठक में आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा, आयुष मंत्रालय के सलाहकार (यूनानी) डॉ. मुख्तार अहमद कासमी, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के विशेषज्ञ व हितधारक, और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
मंत्रालय ने आगामी वर्षों में योग व प्राकृतिक चिकित्सा को सुदृढ़ करने के लिए निम्नलिखित सात प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को रेखांकित किया है:
- योग और प्राकृतिक चिकित्सा में शिक्षा और संस्थागत ढांचे को सुदृढ़ करना।
- दोनों प्रणालियों में वैज्ञानिक अनुसंधान और साक्ष्य जुटाने को प्रोत्साहित करना।
- योग में प्रमाणन, मान्यता और पेशेवर मानकों को सुदृढ़ करना।
- प्राकृतिक चिकित्सा में पंजीकरण, गुणवत्ता आश्वासन और मानकीकरण को बढ़ाना।
- समुदाय के स्तर पर योग और प्राकृतिक चिकित्सा आधारित निवारक और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच का विस्तार करना।
- भारत में वेलनेस टूरिज़्म और चिकित्सा यात्रा के मुख्य घटकों के रूप में योग और प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देना।
- वैज्ञानिक साक्ष्यों और गुणवत्ता मानकों के आधार पर भारत की योग और प्राकृतिक चिकित्सा परंपराओं को वैश्विक स्तर पर पहुंचाना।
इस बैठक में स्वस्थ भारत और विकसित भारत-2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप, योग और प्राकृतिक चिकित्सा को साक्ष्य-आधारित, सुलभ और निवारक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों के रूप में मजबूत करने के लिए मंत्रालय, संसद और हितधारकों के बीच निरंतर सहयोग के महत्व को दोहराया गया।




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पीके/केसी/एसके





















