
Raipur chhattisgarh VISHESH / छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की प्रसिद्ध समाजसेविका गोडबोले दंपति: एवम डॉ. बुधरी ताती जी को समाज सेवा और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए प्रतिष्ठित पद्मश्री पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है
डॉ. बुधरी ताती और गोडबोले दंपति—डॉ. रामचंद्र त्र्यंबक गोडबोले व सुनीता गोडबोले (जिन्हें संयुक्त रूप से चिकित्सा के क्षेत्र में पद्मश्री दिया गया है)—दोनों ही छत्तीसगढ़ के बस्तर और अबूझमाड़ जैसे दूरदराज व नक्सल प्रभावित इलाकों में दशकों से निस्वार्थ सेवाएं दे रहे हैं

उनके द्वारा किए गए कुछ प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं:
- बुधरी ताती जी: बस्तर में प्यार से ‘बड़ी दीदी’ कहलाने वाली ताती ने लगभग 545 गांवों की महिलाओं को जागरूक कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया。 इसके साथ ही वे शिक्षा, स्वास्थ्य और नशामुक्ति के लिए जमीनी स्तर पर सक्रिय हैं。
- गोडबोले दंपति: पिछले लगभग 37 वर्षों से अधिक समय से सुदूर और आदिवासी अंचलों (विशेषकर बारसूर और दंतेवाड़ा) में रहकर 1 लाख से अधिक मरीजों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं और दवाइयां प्रदान की हैं。
केंद्र सरकार द्वारा 2026 में घोषित इन पद्म पुरस्कारों के माध्यम से इन गुमनाम नायकों की अदम्य सेवा भावना और मानवीय संवेदना को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है
कल छत्तीसगढ़ के रामचंद्र गोडबोले और सुनीता गोडबोले को चिकित्सा के क्षेत्र में अच्छा कार्य करने के लिए पद्म श्री अवॉर्ड के लिए सम्मानित किया जाएगा l आपकों बता दे कि गोडबोले दंपति ने पिछले कई सालों से चिकित्सा अभियान चलाया और लोगों का मुफ्त इलाज किया.संयुक्त पुरस्कार मिलते तो आपने बहुत देखे होंगे. लेकिन जब देश के गुमनाम नायकों को पद्म श्री से नवाजा गया, तो दो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में आ गए. रामचंद्र गोडबोले और सुनीता गोडबोले दोनों पति-पत्नी हैं, लेकिन पूरा जीवन आदिवासियों के लिए खपा दिया। उनकी कहानी इतनी दिलचस्प है कि बड़े-बड़े डॉक्टर भी वो ना कर पाए, जो जंगल के बीच रहकर उन्होंने कर दिखाया l गोडबोले दंपति ने अपना जीवन आदिवासियों के स्वास्थ्य और बाल मृत्यु दर कम करने के लिए ‘ट्रस्ट फॉर हेल्थ’ के जरिए वर्षों तक जमीनी कार्य किया. इसके अलावा दुर्गम इलाकों में कुपोषण के खिलाफ जंग छेड़ी. उन्होंने मुफ्त इलाज से कई आदिवासी परिवारों का भला किया. अब इन दोनों को पद्म श्री पुरस्कार मिलने की घोषणा हुई है.
रामचंद्र और सुनीता गोडबोले दंपति ने आदिवासी और जनजातीय क्षेत्रों में चिकित्सा के क्षेत्र में काम किया. उन्होंने खतरे और बिना फंड की परवाह किए अपना काम किया और इन दोनों ने स्वास्थ्य प्रोजेक्ट को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चलाया और इसके अलावा एक लाख ट्राइबल्स को सपोर्ट किया. गोडबोल दंपति ने अथक मेहनत और परिश्रम से लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने में अहम भूमिका निभाई. इससे पहले इन दोनों को स्वामी विवेकानंद अवॉर्ड भी मिल चुका हैं l
दुर्गम इलाकों में कर रहे समाज सेवा डॉ. रामचंद्र गोडबोले और अपनी पत्नी सुनीता गोडबोले के साथ मिलकर सालों से बस्तर और अबूझमाड़ जैसे दुर्गम इलाकों में समाजसेवा के कार्य कर रहे हैं. वे आयुर्वेद चिकित्सक हैं और स्वास्थ्य जागरूकता फैला रहे हैं. जहां पहुंचने के लिए मार्ग नहीं, बिजली नहीं और सबसे खास बात कि मोबाइल के नेटवर्क तक नहीं हैं. वहां भी इन दोनों ने मिलकर स्वास्थ्य सुविधाओं को पहुंचाया है.खुद स्वास्थ्य शिविर लगाते हैं गोडबोले दंपति रामचंद्र और सुनीता गोडबोले खुद पैदल चलकर दुर्गम इलाकों में जाते हैं और फिर वह स्वास्थ्य शिविर लगाते हैं. अब उनके कार्य को केंद्र सरकार सराहा गया है. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि बस्तर की समाज सेविका, स्नेह और ममता की प्रतिमूर्ति ‘बड़ी दीदी’ के नाम से विख्यात बुधरी ताटी जी तथा जनजातीय अंचलों में निःस्वार्थ सेवा के जीवंत प्रतीक डॉ. रामचंद्र गोडबोले जी एवं सुनीता गोडबोले जी का पद्म श्री सम्मान के लिए चयनित होना पूरे प्रदेश के लिए अपार गौरव और सम्मान का विषय है. इन तीनों विभूतियों को हृदय से बधाई एवं शुभकामनाएं.





















