






Report manpreet singh
Raipur chhattisgarh VISHESH : शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की शिखर बैठक शुक्रवार को उज़्बेकिस्तान के शहर समरकंद में ख़त्म हुई जिसमें भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भाग लिया. इस दौरान पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाक़ात की.भारत के लिहाज़ से एससीओ काफ़ी महत्वपूर्ण होने वाला है क्योंकि अगले साल भारत एससीओ की अध्यक्षता करने जा रहा है और इसकी शिखर बैठक भारत में ही होगी.

भारत की अध्यक्षता को लेकर चीन का बयान आया है और उसने इसका समर्थन किया है. एससीओ में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी भाग लिया था लेकिन अभी तक यह साफ़ नहीं है कि भारतीय प्रधानमंत्री और चीनी राष्ट्रपति के बीच कोई औपचारिक मुलाक़ात हुई थी या नहीं.
हालांकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि वो एससीओ की अध्यक्षता के लिए भारत का समर्थन करते हैं. इसके अलावा शी जिनपिंग ने अपने भाषण में ज़ोर देते हुए कहा है कि दुनिया के नेताओं को ‘तर्कसंगत दिशा में अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के अनुरूप विकास को बढ़ावा देने के लिए साथ मिलकर काम करना चाहिए.
एससीओ के अलावा भारत को दुनिया के 20 ताक़तवर देशों के समूह जी-20 की अध्यक्षता का कार्यभार भी इसी साल मिलने जा रहा है. अगले साल इसकी शिखर बैठक भारत में आयोजित होगी. इसे भी कूटनीति के क्षेत्र में अहम घटना के तौर पर देखा जा रहा है.दुनिया की 20 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले इस समूह की अध्यक्षता भारत को एक दिसंबर 2022 को मिलेगी जो अगले साल 30 नवंबर तक उसके पास रहेगी.
‘वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी भारत को एससीओ की अध्यक्षता के लिए मुबारकबाद दी है.कई विशेषज्ञों का मानना है कि विश्व में कूटनीति के स्तर पर भारत का कद और बड़ा होता दिख रहा है. भारत अगले साल जहाँ एससीओ की बैठक करने जा रहा है वहीं वो कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और धड़ों की भी अध्यक्षता करने जा रहा है.
एससीओ, जी-20 के अलावा भारत संयुक्त राष्ट्र में भी अपनी अहम मौजूदगी दर्ज कराने जा रहा है.संयुक्त राष्ट्र एक जाना-पहचाना नाम और वैश्विक संगठन है और उसकी सुरक्षा परिषद की ताक़त को हर देश मानता है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की अध्यक्षता भी भारत को मिलने जा रही है.इस साल के आख़िर में भारत को यह ज़िम्मेदारी दी जा रही है. दिसंबर 2022 में भारत सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता करेगा. भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य है.
कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भारत की अध्यक्षता मिलने को एक बड़ी कूटनीतिक विजय के तौर पर देखा जा रहा है और माना जा रहा है कि भारत इसके ज़रिए अपनी एक बड़ी कूटनीतिक छाप दुनिया पर छोड़ेगा.
पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा था कि विश्व में भारत की भूमिका बीते कुछ सालों में तेज़ी से महत्वपूर्ण हो चुकी है और एससीओ, जी-20 और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता मिलना संकेत देता है कि भारत भविष्य में किस तरह की भूमिका निभाने जा रहा है.भारत को इस तरह की भूमिका दिए जाने को लेकर श्रृंगला इसके कई कारण भी गिनाते हैं.
वो कहते हैं कि भारत में रिकॉर्ड 150 अरब डॉलर का एफ़डीआई हुआ है, देश की 60 फ़ीसदी आबादी युवा है, विदेशी मुद्रा भंडार 600 अरब डॉलर का हो चुका है और वित्तीय वर्ष की अनुमानित वृद्धि दर 9 फ़ीसदी तक है, इन सबके कारण भारत लगातार शीर्ष पर जा रहा है.
इसके अलावा दुनिया के सात ताक़तवर देशों के संगठन जी-7 में भी भारत को शामिल करने की चर्चाएं होती रहती हैं लेकिन इसमें अभी फ़िलहाल बड़ी कामयाबी मिलती नहीं दिख रही है लेकिन इसी साल भारत ने इस संगठन में अपनी अहम मौजूदगी दर्ज कराई थी.इस साल जून महीने में जर्मनी में हुई जी-7 की शिखर बैठक में भारत ने इसमें मेहमान देश की भूमिका निभाई थी. जी-7 में जर्मनी ने भारत को अतिथि देश के तौर पर बुलाया था.





















