अलोकप्रिय फैसलों से न डरने की सलाह

Raipur chhattisgarh VISHESH : सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि न्यायाधीशों को अपने फैसले देते समय करियर पर पड़ने वाले प्रभाव की चिंता नहीं करनी चाहिए । भले ही अलोकप्रिय निर्णय पदोन्नति या कार्यकाल विस्तार को प्रभावित करें, फिर भी उन्हें अपने पद की शपथ और न्यायिक धर्म का पालन करना चाहिए। केरल हाई कोर्ट में जस्टिस टीएस कृष्णमूर्ति अय्यर स्मृति व्याख्यान में उन्होंने ‘परिवर्तनकारी संवैधानिकता’ और ‘मूल संरचना सिद्धांत’ के संदर्भ में न्यायिक समीक्षा के महत्व पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सामूहिक हित के नाम पर कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।

जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि मूल संरचना सिद्धांत संविधान की न्यूनतम सीमाएं तय करता है, जबकि परिवर्तनकारी संवैधानिकता उसे आगे बढ़ने की दिशा देती है। इन सीमाओं की निगरानी न्यायपालिका द्वारा न्यायिक समीक्षा के जरिए ही संभव है। न्यायिक स्वतंत्रता केवल संस्थागत प्रावधानों से नहीं, बल्कि न्यायाधीशों के साहस, निष्ठा और स्वतंत्र सोच से सुनिश्चित होती है। असहमति वाले फैसले भी बौद्धिक स्वतंत्रता का प्रतीक हैं।





















