







Raipur chhattisgarh VISHESH राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी विभाग द्वारा वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और जायसवाल निको इंडस्ट्रीज लिमिटेड के सहयोग से 16 मार्च 2026 को “मॉडर्न डीप लर्निंग आर्किटेक्चर्स इन कंप्यूटर विज़न” विषय पर एक पांच दिवसीय राष्ट्रीय वर्कशॉप का शुभारंभ किया गया। इस वर्कशॉप का उद्देश्य कंप्यूटर विज़न कॉन्सेप्ट्स, डिज़ाइन और अनुसंधान की प्रवृत्तियों को एक साझा मंच प्रदान करना है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आईआईटी हैदराबाद के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉ.सी.कृष्णा मोहन रहे। सम्मानित अतिथि के रुप में जेएनवी नई दिल्ली के स्कूल ऑफ कंप्यूटर एंड सिस्टम साइंस के प्रो. डॉ. टी.वी विजय कुमार उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक एनआईटी रायपुर के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव रहे। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रुप में एनआईटी रायपुर के रजिस्ट्रार डॉ. एन. डी. लोंढे और इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर (एच ए जी ) डॉ. श्रीश वर्मा उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुधाकर पांडे द्वारा की गई। इस दौरान कार्यशाला के आयोजन सचिव डॉ. सुवेंदु रुप एवं डॉ. दीपिका अग्रवाल, फैकल्टी मेम्बर्स और प्रतिभागी उपस्थित रहे ।

सबसे पहले अपने स्वागत उद्बोधन में डॉ. सुवेंदु रुप ने बताया की देश के विभिन्न क्षेत्रों से कुल 74 प्रतिभागियों ने इस कार्यशाला में भाग लिया है। डीप लर्निंग कई समस्याओं के समाधान के लिए एक प्रभावी तकनीक है। उन्होंने बताया की यह कार्यशाला सुव्यवस्थित रूप से आयोजित की गई है, जिसमें रिकॉरेंट न्यूरल नेटवर्क, ऑटोइनकोडर के अनुप्रयोग तथा कन्वॉलूशनल न्यूरल नेटवर्क और उसके उपयोगों पर चर्चा की जाएगी।
डॉ. सुधाकर पांडे ने बताया कि पिछले एक दशक में कंप्यूटर विज़न के क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास हुआ है। उन्होंने कहा कि यह पूरा पाठ्यक्रम अत्यंत सुव्यवस्थित ढंग से तैयार किया गया है, जिससे यह प्रतिभागियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा तथा आधुनिक डीप लर्निंग के प्रति एक नई दृष्टि प्रदान करेगा।
डॉ. लोंढे ने अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि अनुसंधान के क्षेत्र में रिकॉरेंट न्यूरल नेटवर्क का विकास अत्यंत सराहनीय रहा है। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को नए विषयों को समझने और अपने ज्ञान को विस्तार देने का एक अच्छा अवसर प्राप्त होगा।
डॉ. श्रीश वर्मा ने बताया कि यह वर्कशॉप प्रतिभागियों को प्रारंभिक स्तर से सीखने तथा अपने मूलभूत सिद्धांतों को स्पष्ट करने में सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने न्यूरल नेटवर्किंग और डीप लर्निंग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की तथा जनरेटिव एआई के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
डॉ. टी. वी. विजय कुमार ने कहा कि एआई क्रांति के इस दौर में साइबर सिक्योरिटी और साइबर फॉरेंसिक का महत्व काफी बढ़ गया है, विशेष रूप से आधुनिक डीप लर्निंग के संदर्भ में। उन्होंने यह भी बताया कि एआई के जहां अनेक लाभ हैं, वहीं कुछ सीमाएं भी हैं, इसलिए हमें एआई पर पूर्ण रूप से निर्भर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य की भूमिका मशीनों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण और प्रासंगिक है।
डॉ. सी. कृष्णा मोहन ने कहा कि यह कार्यशाला प्रतिभागियों के भविष्य के लिए अत्यंत उपयोगी और लाभदायक सिद्ध होगी। उन्होंने बताया कि डीप लर्निंग के ज्ञान के माध्यम से अनेक जटिल समस्याओं का समाधान किया जा सकता है तथा एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। इस अवसर पर उन्होंने एआई के क्षेत्र में अपने पूर्व अनुभव साझा किए और प्रतिभागियों को निरंतर सीखते रहने तथा ज्ञान अर्जित करने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. एन. वी. रमना राव ने बताया कि इमेज क्लासिफिकेशन, मेडिकल इमेजिंग, रिमोट सेंसिंग और ऑब्जेक्ट डिटेक्शन जैसे क्षेत्रों में डेटा ऑटोमेशन के माध्यम से डीप लर्निंग का ज्ञान अत्यंत आवश्यक हो गया है। इसके साथ ही उन्होंने जनरेटिव एआई के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की।
अंत में डॉ. दीपिका अग्रवाल ने अपने धन्यवाद ज्ञापन में कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से शोधकर्ताओं को अपने ज्ञान को समृद्ध करने तथा प्रभावी तरीके से सीखने का एक उत्कृष्ट अवसर प्राप्त होगा। यह कार्यशाला प्रतिभागियों को डीप लर्निंग के महत्वपूर्ण ज्ञान से सशक्त बनाएगी और भविष्य में एआई अनुसंधान और नवाचार के लिए प्रेरित करेगी।








