
प्रविष्टि तिथि: 10 MAR 2026 6:49PM by PIB Raipur
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर में भारतीय भौतिकी संघ के सहयोग से विकसित भारत अभियान के अंतर्गत 10 मार्च 2026 को प्रतिष्ठित डीएई–सी. वी. रमन व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक संस्थान के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव रहे।


कार्यक्रम में इंटर-यूनिवर्सिटी एक्सीलरेटर सेंटर, नई दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर अविनाश चंद्र पांडे, केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के भौतिकी एवं खगोलीय विज्ञान विभाग के प्रोफेसर ओ. एस. के. एस. शास्त्री तथा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर की अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) प्रधानमंत्री प्रोफेसर डॉ. अर्चना शर्मा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम के प्रारंभ में भौतिकी विभाग के प्रोफेसर एवं मुख्य समन्वयक डॉ. आयुष खरे ने अतिथियों का स्वागत किया। अपने संबोधन में डॉ. रमना राव ने कहा कि भौतिकी एक मूलभूत विज्ञान है, जो प्रकृति के नियमों की गहन समझ प्रदान करता है और आधुनिक प्रौद्योगिकी की आधारशिला है। उन्होंने क्लासिकल मैकेनिक्स और न्यूटनियन भौतिकी के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में उपयोग तथा विद्युतचुंबकत्व के सिद्धांतों से संचालित इलेक्ट्रिक मोटर, जनरेटर और माइक्रोचिप्स के महत्व पर प्रकाश डाला। विद्युत अभियांत्रिकी विभाग की प्रोफेसर डॉ. अनामिका यादव ने व्याख्यान श्रृंखला की रूपरेखा प्रस्तुत की।

अपने व्याख्यान में प्रोफेसर पांडे ने स्पेक्ट्रोमेट्री, आइसोटोप, अर्ध-आयु, कॉस्मिक विकिरण तथा उनके अनुप्रयोगों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने विकिरण के मानव शरीर पर प्रभाव, रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी तथा ग्रैफीन नमूनों की रमन मैपिंग, क्वांटम मैकेनिक्स, अर्धचालक, अवरक्त डिटेक्टर, ऊष्मा अपव्यय और क्वांटम टनलिंग जैसे विषयों पर प्रकाश डाला। उन्होंने क्यूबिट, क्वांटम पैरेललिज्म, भारत के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन तथा प्लानर पेनिंग ट्रैप की अवधारणा की भी जानकारी दी।
प्रोफेसर शास्त्री ने न्यूरल नेटवर्क की मूल संरचना, मशीन लर्निंग और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग के महत्व तथा डेटा सेट निर्माण की प्रक्रिया को स्पष्ट किया। उन्होंने एन्कोडर और डिकोडर नेटवर्क, वेव फंक्शन पुनर्निर्माण और ऊर्जा आइगेनवैल्यू जैसी अवधारणाओं को क्वांटम मैकेनिक्स से जोड़ते हुए समझाया। उन्होंने अनुसंधान समस्याओं के समाधान में एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संभावित उपयोग पर बल दिया।
डॉ. अर्चना शर्मा ने विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम तथा विद्युतचुंबकीय बलों के अनुप्रयोगों पर प्रकाश डालते हुए मेडिकल इमेजिंग, फील्ड एमिशन, फोटो एमिशन और थर्मियोनिक एमिशन की कार्यप्रणाली समझाई। उन्होंने पार्टिकल एक्सीलरेटर के सिद्धांत, इलेक्ट्रॉन बीम वेल्डिंग एवं मेल्टिंग के औद्योगिक उपयोग तथा न्यूक्लियर फॉरेंसिक जांच, थेरानॉस्टिक उपकरण, कैंसर प्रबंधन और औद्योगिक एक्सीलरेटर क्षेत्र में इनकी उपयोगिता को रेखांकित किया।
कार्यक्रम के सफल संचालन में डॉ. सी. एच. राजू और डॉ. सौविक बिस्वास का योगदान सराहनीय रहा। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। डीएई–सी. वी. रमन व्याख्यान श्रृंखला ने संस्थान में वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में प्रतिबद्धता को सुदृढ़ किया।
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