
स्व-गणना पोर्टल पर घर बैठे स्वयं जानकारी दर्ज करने की सुविधा, टोल-फ्री हेल्पलाइन 1855 सक्रिय
पहली बार कागजरहित और पूर्ण डिजिटल प्रक्रिया से होगा डेटा संकलन
डिजिटल संदर्भ संख्या से आसान होगा प्रगणक सत्यापन
डेटा गोपनीयता सुनिश्चित, केवल सांख्यिकीय उपयोग के लिए रहेगा सुरक्षित
राज्यभर में व्यापक प्रशासनिक तैयारी, हजारों कर्मी तैनात
कड़े कानूनी प्रावधानों के तहत व्यक्तिगत डेटा रहेगा पूर्ण सुरक्षित
प्रविष्टि तिथि: 15 APR 2026 4:36PM by PIB Raipur
छत्तीसगढ़ राज्य 16 अप्रैल 2026 से ‘भारत की जनगणना 2027’ के पहले चरण की शुरुआत करने जा रहा है। यह अभियान राज्य के इतिहास में पहली बार पूर्णतः कागजरहित एवं डिजिटल स्वरूप में संचालित किया जाएगा। इस व्यापक सांख्यिकीय प्रक्रिया का उद्देश्य न केवल जनसंख्या से संबंधित आधारभूत जानकारी संकलित करना है, बल्कि आगामी दशक के लिए सटीक सामाजिक-आर्थिक योजनाओं हेतु विश्वसनीय आंकड़ा आधार तैयार करना भी है।

भारत सरकार के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त के मार्गदर्शन में संचालित इस चरण में ‘स्व-गणना’ को विशेष महत्व दिया गया है। इसके अंतर्गत नागरिक स्वयं आधिकारिक पोर्टल https://se.census.gov.in/ पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके साथ ही नागरिकों की सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन संख्या 1855 भी 16 अप्रैल से राज्यभर में सक्रिय रहेगी।
स्व-गणना प्रक्रिया को सरल, सुरक्षित और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाया गया है। पंजीकरण के लिए परिवार के किसी वयस्क सदस्य को अपना मोबाइल नंबर दर्ज कर वन टाइम पासवर्ड आधारित प्रमाणीकरण पूर्ण करना होगा। इसके बाद परिवार एवं आवास संबंधी विवरण जैसे निवास स्थान, मकान की स्थिति, पेयजल, शौचालय तथा ऊर्जा स्रोतों की जानकारी दर्ज करनी होगी। प्रत्येक सदस्य के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत विवरण जैसे नाम, आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, शिक्षा, व्यवसाय एवं मातृभाषा भरना अनिवार्य होगा।
सभी जानकारी दर्ज करने के उपरांत नागरिकों को अंतिम सबमिशन से पूर्व विवरण की समीक्षा का अवसर मिलेगा। सफल सबमिशन के बाद एक डिजिटल संदर्भ संख्या (सेंसस रेफरेंस नंबर) जारी की जाएगी, जिसे भविष्य में प्रगणक के सत्यापन के समय प्रस्तुत करना होगा। प्रगणक द्वारा इस संख्या के माध्यम से डेटा का त्वरित सत्यापन एवं समन्वयन किया जाएगा, जिससे समय की बचत एवं त्रुटियों में कमी सुनिश्चित होगी।
छत्तीसगढ़ में इस पहले चरण के अंतर्गत मुख्य रूप से मकान सूचीकरण एवं आवास गणना (हाउस लिस्टिंग एंड हाउसिंग सेंसस) का कार्य किया जाएगा। इसके तहत परिसंपत्तियों, संचार साधनों तथा परिवहन सुविधाओं से संबंधित जानकारी एकत्रित की जाएगी, जो राज्य के जीवन स्तर और विकास सूचकांकों का आधार बनेगी।
राज्य के 33 जिलों और 19,978 ग्रामों में इस व्यापक अभियान के सफल संचालन के लिए लगभग 62,500 अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इनमें 51,300 प्रगणक और 9,000 पर्यवेक्षक शामिल हैं, जो घर-घर जाकर जानकारी का सत्यापन करेंगे।
जनगणना के दौरान एकत्रित सभी व्यक्तिगत जानकारियों को जनगणना अधिनियम, 1948 तथा जनगणना नियमावली, 1990 के प्रावधानों के तहत पूर्णतः गोपनीय रखा जाएगा। यह जानकारी किसी भी परिस्थिति में कर निर्धारण, पुलिस जांच अथवा न्यायालयीन साक्ष्य के रूप में उपयोग नहीं की जा सकती है। इनका उपयोग केवल सांख्यिकीय विश्लेषण एवं विकास योजनाओं के निर्माण के लिए किया जाएगा।
राज्य सरकार ने दूरस्थ क्षेत्रों में डिजिटल पहुंच सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रबंध किए हैं। हेल्पलाइन 1855 नागरिकों को तकनीकी सहायता के साथ-साथ मार्गदर्शन भी प्रदान करेगी।
राज्य सरकार ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे स्व-गणना पोर्टल का अधिकतम उपयोग कर इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं। सटीक एवं व्यापक जनगणना ही भविष्य की विकास योजनाओं की आधारशिला है और नागरिकों की सहभागिता इसकी सफलता का प्रमुख आधार है।





















