

किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसल विविधीकरण, एकीकृत कीट प्रबंधन और टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर विशेष जोर
प्रविष्टि तिथि: 22 OCT 2026 5:39PM by PIB Raipur

भा.कृ.अनु.प.-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रैस प्रबंधन संस्थान (ICAR-NIBSM), रायपुर ने कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), बेमेतरा के सहयोग से आज छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के ग्राम बगौद में ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को फसलों को कीट-पतंगों, बीमारियों और अन्य जैविक तनावों से बचाने के प्रति जागरूक करना है, साथ ही उन्हें वैज्ञानिक, टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिकों और स्थानीय किसानों के बीच फसल सुरक्षा और उत्पादकता से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस अवसर पर कार्यक्रम के नोडल अधिकारी व भा.कृ.अनु.प.-एनआईबीएसएम के संयुक्त निदेशक डॉ. पंकज शर्मा, डॉ. एस. के. जैन, डॉ. के. सी. शर्मा, डॉ. अजय वर्मा और कृषि विज्ञान केंद्र बेमेतरा के डॉ. लव कुमार सहित प्रमुख विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
किसानों को संबोधित करते हुए डॉ. पंकज शर्मा ने कहा कि खेती को लाभदायक और टिकाऊ बनाने के लिए जैविक तनावों से होने वाले फसल नुकसान को न्यूनतम करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों से फसल विविधीकरण, फसल चक्र और उपयुक्त वैकल्पिक फसल प्रणालियों को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये पद्धतियां उत्पादन के जोखिम को कम करती हैं, संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देती हैं और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि करती हैं। डॉ. के. सी. शर्मा ने कीटों और रोगों की समय पर पहचान, एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM), संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के लिए कीटनाशकों व कवकनाशकों के विवेकपूर्ण उपयोग के महत्व पर बल दिया। इसके साथ ही, डॉ. लव कुमार ने कुल फसल उपज में सुधार के लिए मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और क्षेत्र-विशिष्ट कृषि तकनीकों की भूमिका को रेखांकित किया।
‘खेत बचाओ अभियान’ का मुख्य लक्ष्य प्रयोगशाला में विकसित शोध-आधारित तकनीकों को किसानों के खेतों तक आसानी से पहुंचाकर कृषि अनुसंधान और जमीनी कार्यान्वयन के बीच की दूरी को कम करना है, जिससे फसलों के स्वास्थ्य की रक्षा की जा सके और क्षेत्र में कृषि जैव विविधता को बढ़ावा दिया जा सके।








