

एम्स रायपुर में जलवायु परिवर्तन एवं स्वास्थ्य पर विशेष व्याख्यान, सामुदायिक चिकित्सा की पाठ्यपुस्तक के सातवें संस्करण का विमोचन
सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को जलवायु संबंधी चुनौतियों के लिए तैयार करने पर जोर, आईसीएमआर और एसटीएस अनुदान प्राप्त विद्यार्थियों का सम्मान
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर में सोमवार को स्वामी विवेकानंद सभागार में विशेष व्याख्यान एवं पुस्तक विमोचन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ संकाय सदस्य, शैक्षणिक नेतृत्वकर्ता, स्नातकोत्तर रेजिडेंट, स्नातक विद्यार्थी तथा संस्थान के अन्य सदस्य शामिल हुए। कार्यक्रम में समकालीन सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों और सामुदायिक चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे नवीन विकास पर अकादमिक विमर्श हुआ।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण सार्वजनिक स्वास्थ्य फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष प्रो. डॉ. संजय जोडपेयी का विशेष व्याख्यान रहा। उन्होंने “जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य के बीच संबंध को समझना” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य के बीच बढ़ते संबंधों पर प्रकाश डालते हुए जलवायु से जुड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता रेखांकित की।


कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता प्रो. डॉ. संजय जोडपेयी का औपचारिक परिचय कराया।

अपने व्याख्यान में प्रो. डॉ. जोडपेयी ने जलवायु परिवर्तन के बहुआयामी स्वास्थ्य प्रभावों पर चर्चा की। उन्होंने बदलते पर्यावरणीय और महामारी विज्ञान संबंधी परिदृश्य के अनुरूप स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने, निगरानी व्यवस्था विकसित करने, पूर्व तैयारी सुनिश्चित करने तथा प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेपों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य नियोजन और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था में जलवायु संबंधी पहलुओं को शामिल करने को महत्वपूर्ण बताया।
व्याख्यान के बाद सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके योगदान और अकादमिक कार्यक्रम में सहभागिता के लिए प्रो. डॉ. जोडपेयी को एम्स रायपुर की ओर से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में ‘टेक्स्टबुक ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ’ के सातवें संस्करण (2026) का औपचारिक विमोचन भी किया गया। पुस्तक के नए संस्करण में सामुदायिक चिकित्सा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, महामारी विज्ञान, जैव-सांख्यिकी और निवारक चिकित्सा के क्षेत्र में हुए समकालीन विकास को शामिल किया गया है।
पुस्तक के विमोचन से पहले एसोसिएट संपादक डॉ. अदिति चंद्राकर ने “व्हाट्स न्यू इन द 7th एडिशन?” विषय पर प्रस्तुति दी और नए संस्करण में किए गए प्रमुख संशोधनों, नवीन विषय-वस्तु तथा अकादमिक विशेषताओं की जानकारी दी। इसके बाद एसोसिएट संपादक लेफ्टिनेंट कर्नल लक्ष्मीकांत चौधरी (सेवानिवृत्त) ने पुस्तक में उपलब्ध ई-कंटेंट और उसकी प्रमुख विशेषताओं का अवलोकन प्रस्तुत किया तथा इससे जुड़े डिजिटल शैक्षणिक संसाधनों की जानकारी दी।
पुस्तक विमोचन के बाद एम्स रायपुर के संकाय सदस्यों ने पुस्तक की अकादमिक समीक्षा प्रस्तुत की। स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के अकादमिक प्रमुख प्रो. डॉ. अनिल के. गोयल ने पुस्तक की अकादमिक समीक्षा प्रस्तुत की। वहीं, एम्स रायपुर के कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्राचार्य प्रो. डॉ. बीनू मैथ्यू ने स्वास्थ्य पेशेवरों और विद्यार्थियों के लिए व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य ज्ञान के महत्व को रेखांकित किया। प्रकाशक की ओर से कंटेंट मैनेजमेंट के प्रबंधक श्री रवि विश्वकर्मा ने नए संस्करण के विकास और प्रकाशन से जुड़े प्रकाशकीय पक्ष की जानकारी दी।
कार्यक्रम में एम्स रायपुर के विद्यार्थियों की शोध उपलब्धियों को भी सम्मानित किया गया। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) से थीसिस अनुदान प्राप्त करने वाले स्नातकोत्तर रेजिडेंट्स तथा शॉर्ट टर्म स्टूडेंटशिप (एसटीएस) अनुदान प्राप्त करने वाले स्नातक विद्यार्थियों को प्रो. डॉ. संजय जोडपेयी ने सम्मानित किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों के शोध योगदान को प्रोत्साहित करते हुए साक्ष्य-आधारित अकादमिक अनुसंधान के महत्व पर बल दिया गया।
कार्यक्रम में मंचासीन अन्य गणमान्य अतिथियों का भी सम्मान किया गया। कार्यक्रम का समापन एम्स रायपुर के डीन (अकादमिक) प्रो. डॉ. एली महापात्र द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।





















