

त्वचा रोग विभाग के नेतृत्व में बाल रोग, जेनेटिक्स, पोषण और सामाजिक सेवा विशेषज्ञों की संयुक्त देखरेख में उपचार
प्रविष्टि तिथि: 12 AUG 2026 5:55PM
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर में दुर्लभ जन्मजात त्वचा रोग इच्थियोसिस हाइस्ट्रीक्स से पीड़ित 14 वर्षीय बच्ची की बहु-विषयक चिकित्सा देखभाल के बाद स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। बच्ची को शरीर के बड़े हिस्से में मोटी, नुकीली और कांटेदार त्वचा की परतों की गंभीर समस्या के साथ त्वचा रोग विभाग में उपचार के लिए लाया गया था। इच्थियोसिस हाइस्ट्रीक्स एक अत्यंत दुर्लभ त्वचा रोग है, जिसमें त्वचा पर असामान्य रूप से मोटी और कांटेदार परतें विकसित हो जाती हैं। बच्ची के परिवार में इस प्रकार की बीमारी का कोई पूर्व इतिहास नहीं पाया गया, जिसके आधार पर चिकित्सकों ने इसे स्वतः उत्पन्न होने वाला यानी स्पोरेडिक मामला माना है।

बच्ची की स्थिति की जटिलता को देखते हुए एम्स रायपुर के त्वचा रोग विभाग के नेतृत्व में बहु-विषयक टीम ने उपचार शुरू किया। टीम में बाल रोग, जेनेटिक्स, पोषण तथा मेडिकल सोशल सर्विस ऑफिसर (एमएसएसओ) सहित संबंधित विशेषज्ञ शामिल रहे। उपचार के दौरान आवश्यक बाहरी औषधियों यानी टॉपिकल उपचार के साथ पोषण संबंधी सहायता और नियमित चिकित्सकीय निगरानी की गई। रोग की प्रकृति और संभावित कारणों को बेहतर ढंग से समझने के लिए त्वचा की बायोप्सी और जेनेटिक जांच की भी योजना बनाई गई।
निरंतर उपचार और नियमित फॉलो-अप के बाद बच्ची की त्वचा की स्थिति में स्पष्ट सुधार दर्ज किया गया। त्वचा पर दिखाई देने वाली मोटी और गंभीर परतों में कमी आई है, जिससे बच्ची और उसके परिवार को राहत मिली है। चिकित्सकों के अनुसार, यह सुधार दुर्लभ त्वचा रोगों में समय पर विशेषज्ञ उपचार, निरंतर निगरानी और विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञताओं के बीच समन्वय के महत्व को रेखांकित करता है।
वर्तमान में बच्ची की स्थिति स्थिर है। उपचार के दौरान पोषण की कमी एक प्रमुख चिंता के रूप में सामने आई, जिसके लिए पोषण विशेषज्ञों द्वारा आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। त्वचा रोग और बाल रोग विशेषज्ञ बच्ची की नियमित चिकित्सकीय निगरानी कर रहे हैं। वहीं, मेडिकल सोशल सर्विस ऑफिसर की टीम परिवार को परामर्श, आगे की चिकित्सा देखभाल और नियमित फॉलो-अप में आवश्यक सहयोग प्रदान कर रही है।
इस दुर्लभ मामले के उपचार में त्वचा रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सत्यकी गांगुली, डॉ. नम्रता छाबड़ा तथा बहु-विषयक चिकित्सा टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) अशोक जिंदल ने उपचार में शामिल पूरी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि दुर्लभ बीमारियों के उपचार में केवल रोग के चिकित्सकीय प्रबंधन पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। मरीज और उसके परिवार की चिकित्सा, पोषण, मानसिक तथा सामाजिक आवश्यकताओं को भी समग्र उपचार का हिस्सा बनाना आवश्यक है।
यह मामला दुर्लभ और जटिल बीमारियों के उपचार में एम्स रायपुर की विशेषज्ञता, बहु-विषयक समन्वय और मरीज-केंद्रित चिकित्सा व्यवस्था को प्रदर्शित करता है। संस्थान के अनुसार, इस प्रकार की विशेषज्ञ सेवाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्यों के मरीजों को अपने क्षेत्र में ही उन्नत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के प्रयासों को मजबूती मिलती है। बच्ची के उपचार से पूर्व और उपचार के बाद की चिकित्सकीय तस्वीरें उपलब्ध हैं। इनके उपयोग के लिए त्वचा रोग विभाग द्वारा आवश्यक सहमति प्राप्त की गई है।
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