Author: Manpreet Singh

रायपुर, 7 अगस्त 2026 राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं ग्रामोद्योग विभाग की स्वदेशी प्रदर्शनी में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश की समृद्ध हथकरघा परंपरा, बुनकरों और शिल्पकारों के योगदान को रेखांकित करते हुए उनके आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की हथकरघा कला हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय हुनर की पहचान है। बुनकरों के कौशल को आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार और आर्थिक अवसरों से जोड़कर…

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पूर्व में स्वीकृत टू-लेन सड़क को फोरलेन करने राज्य शासन ने मंजूर किए अतिरिक्त 21.81 करोड़ उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राशि स्वीकृति का पत्र जारी रायपुर. 7 अगस्त 2026 राज्य शासन ने बेमेतरा जिले के नांदघाट से मुंगेली जिला मुख्यालय तक पूर्व में स्वीकृत टू-लेन सड़क को फोरलेन करने 21 करोड़ 81 लाख रुपए की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की है। राज्य शासन ने वर्ष-2024 में सी.आर.आई.एफ. योजना के अंतर्गत टू-लेन नांदघाट-मुंगेली मार्ग के निर्माण के लिए 116 करोड़ रुपए मंजूर किए थे। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव ने इस सड़क को…

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आयुषदीप सामान्य सभा और जीवनदीप समिति की भी बैठक लेंगे रायपुर 7 अगस्त 2026 उप मुख्यमंत्री तथा बिलासपुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री अरुण साव 8 अगस्त को प्रातः 11 बजे बिलासपुर जिला मुख्यालय में सभी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक लेकर योजनाओं के क्रियान्वयन एवं विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा करेंगे। वे बैठक में निर्माण कार्यों की प्रगति, शासन की प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों तथा लंबित प्रकरणों की विभागवार समीक्षा करेंगे। वे आयुषदीप सामान्य सभा और जीवनदीप समिति की भी बैठक लेंगे। कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को बैठक में आवश्यक तैयारी एवं…

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श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को सर्वाेच्च प्राथमिकता संयुक्त संचालक, जनसंपर्क रायपुर, 7 अगस्त 2026 पिछले ढाई साल में श्रम विभाग ने गढ़ी सुरक्षा, सम्मान और समृद्धि की मिसाल। छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए अनेक ऐतिहासिक पहल की हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने श्रमिक कल्याण को केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे सुशासन, पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार से जोड़ते हुए श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य किया है। वहीं श्रम एवं उद्योग मंत्री लखनलाल…

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स्वदेशी को नई उड़ान : राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बुनकरों एवं शिल्पकारों को 10.90 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता एवं पुरस्कार राशि प्रदान की राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर बदलते बस्तर की प्रेरक तस्वीर : आत्मसमर्पित महिलाओं ने किया रैंप वॉक प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में शामिल हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय हथकरघा हमारी संस्कृति, रोजगार और आत्मनिर्भरता की सशक्त पहचान – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय नवाचारों से ‘लोकल टू ग्लोबल’ की यात्रा होगी और सशक्त: इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का शुभारंभ रायपुर 7 अगस्त 2026 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राष्ट्रीय…

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने 67.20 लाख माताओं और बहनों के खातों में डीबीटी के माध्यम से अंतरित किए 630.55 करोड़ रुपये महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार का मजबूत संकल्प, योजना के तहत अब तक 19,444.33 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का वितरण महतारी वंदन योजना मातृशक्ति के सम्मान, आत्मनिर्भरता और परिवारों की समृद्धि का अभियान – मुख्यमंत्री श्री साय रायपुर, 7 अगस्त 2026 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त जारी करते हुए प्रदेश की 67 लाख 20 हजार 125 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में…

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मुख्य्मंत्री विष्णु के सुशासन में जग रहा बस्तर की महिलाओं में आत्मविश्वास… मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, राष्ट्रीय हथकरघा ददवस के अवसर पर आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने रेशम, हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी एवं माटीकला बोर्ड के विभिन्न हितग्राहियों तथा मेधावी छात्र-छात्राओं को 10 करोड 90 लाख रुपए से अधिक की अनुदान एवं पुरस्कार राशि का वितरण किया। इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री जी ने छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ के नए प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड ‘कोशल फैब‘ का शुभारंभ कर इसके लोगो एवं…

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राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान (एनआईएसआर) को समग्र स्वास्थ्य के लिए एक वैश्विक केंद्र बनना चाहिए: श्री प्रतापराव जाधवकेंद्रीय आयुष मंत्री ने राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान की शासी निकाय की दूसरी बैठक की अध्यक्षता की प्रविष्टि तिथि: 07 AUG 2026 5:20PM Raipur chhattisgarh VISHESH / आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान (एनआईएसआर) की दूसरी शासी निकाय बैठक की अध्यक्षता की और भारतीय हिमालयी क्षेत्र (आईएचआर) में वैज्ञानिक अनुसंधान, अकादमिक उत्कृष्टता, संस्थागत विकास और विस्तार के माध्यम से सोवा-रिग्पा को मजबूत करने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप की रूपरेखा प्रस्तुत की। संस्थान की आगामी वर्षों के लिए प्राथमिकताओं को निर्धारित करते हुए, केंद्रीय मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने इस बात पर जोर दिया कि विकास के अगले चरण में वैज्ञानिक अनुसंधान को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय मानकों को बढ़ावा देने और सोवा-रिग्पा की पहुंच को इसकी पारंपरिक भौगोलिक सीमाओं से परे विस्तारित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। शासी निकाय को संबोधित करते हुए श्री प्रतापराव जाधव ने कहा, “हमारा लक्ष्य अब केवल बुनियादी ढांचे के विकास तक सीमित नहीं है; बल्कि सोवा-रिग्पा को भारत और विश्व भर में एक मुख्यधारा की स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में स्थापित करना है। हमारी सर्वोपरि प्रतिबद्धता सोवा-रिग्पा को साक्ष्य-आधारित चिकित्सा विज्ञान प्रणाली के रूप में विश्व के समक्ष स्थापित करना है। इसे प्राप्त करने के लिए, हमें अपनी अनुसंधान रणनीतियों को गति देनी होगी, और एक स्वतंत्र अनुसंधान परिषद की स्थापना पहला महत्वपूर्ण कदम होगा। हमें साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, सशक्त शैक्षणिक संस्थानों और विश्व स्तर पर स्वीकृत मानकों के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक उत्कृष्टता के साथ एकीकृत करने वाला एक पारिस्थितिकी तंत्र बनाना होगा।” श्री प्रतापराव जाधव ने आगे कहा, “मेरा दृढ़ विश्वास है कि राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान केवल लद्दाख की संस्था नहीं है; यह पूरे भारतीय हिमालयी क्षेत्र की चिकित्सा विरासत का संरक्षक है। हमें इसके क्षेत्रीय मॉडल को मजबूत करना चाहिए और हिमालयी समुदायों के साथ अपने जुड़ाव को गहरा करना चाहिए। दुर्लभ औषधीय पौधों की सतत खेती, जैव-अन्वेषण, कृषि वानिकी और औषधीय जैव विविधता के संरक्षण पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि स्थानीय समुदाय इस अमूल्य ज्ञान प्रणाली के संरक्षण और संवर्धन में समान भागीदार बन सकें। आइए, मिलकर इस संस्थान को समग्र स्वास्थ्य के वैश्विक केंद्र में बदलें।” श्री जाधव ने सुझाव दिया कि सोवा-रिग्पा के अमूल्य ज्ञान और विरासत से युक्त सैकड़ों भोटी भाषा की पांडुलिपियों को व्यवस्थित प्रतिलेखन और अनुवाद के माध्यम से संरक्षित किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि प्रथम चरण के रूप में, इन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जाए, जिसके बाद इनका अनुवाद किया जाए ताकि ज्ञान का यह समृद्ध भंडार आम जनता और शोधकर्ताओं के लिए सुलभ हो सके। उन्होंने आगे प्रस्ताव दिया कि डिजिटलीकरण अभियान को एनआईएसआर, ज्ञान भारतम मिशन या किसी अन्य सक्षम संस्था द्वारा किए जाने वाले कार्य से तेज किया जाए, और यदि आवश्यक हो, तो संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से भी कार्य किया जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस अमूल्य ज्ञान का संरक्षण और डिजिटलीकरण भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत की रक्षा और सोवा-रिग्पा में भविष्य के अनुसंधान को मजबूत करने के लिए आवश्यक है। आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि मंत्रालय भारत के पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को संरक्षित करने और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोणों के माध्यम से इसे आगे बढ़ाने वाले सशक्त संस्थानों के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उल्लेख किया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नैदानिक ​​सेवाओं, अनुसंधान और क्षमता निर्माण के माध्यम से सोवा-रिग्पा को बढ़ावा देने में एनआईएसआर एक प्रमुख संस्थान के रूप में उभरा है, और इसके दीर्घकालिक विकास के लिए मंत्रालय के निरंतर सहयोग और प्रतिबद्धता को भी दोहराया। शासी निकाय ने राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान के निदेशक डॉ. पद्म गुरमेट को चिकित्सा क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान, विशेष रूप से भारत में प्राचीन सोवा-रिग्पा चिकित्सा पद्धति के पुनरुद्धार, संरक्षण और संस्थागतकरण में उनके अग्रणी प्रयासों के लिए 2026 में पद्म श्री से सम्मानित किए जाने पर बधाई दी। सदस्यों ने शिक्षा, अनुसंधान, नैदानिक ​​सेवाओं और संस्थागत विकास के माध्यम से सोवा-रिग्पा को आगे बढ़ाने में उनके नेतृत्व की सराहना की। डॉ. पद्मा गुरमेट ने शासी निकाय के समक्ष संस्थान की प्रगति और भविष्य की कार्य योजना प्रस्तुत की। उन्होंने अकादमिक, नैदानिक ​​सेवाओं, अनुसंधान, औषधीय पौधों के संरक्षण और आउटरीच कार्यक्रमों में हासिल की गई उपलब्धियों पर प्रकाश डाला, साथ ही संस्थागत क्षमता को और मजबूत करने तथा सोवा-रिग्पा की पहुंच को देश भर में विस्तारित करने के उद्देश्य से प्रस्तावों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की। सोवा-रिग्पा, जिसका भोटी भाषा में अर्थ है “चिकित्सा का ज्ञान”, विश्व की सबसे प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में से एक है और इसे भारत सरकार द्वारा आयुष कार्यक्रम के अंतर्गत मान्यता प्राप्त है। आम तौर पर आमची चिकित्सा प्रणाली के रूप में जानी जाने वाली यह प्रणाली भारतीय हिमालयी क्षेत्र और कई पड़ोसी देशों में प्रचलित है। सदियों से, यह प्रणाली ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र में विकसित और फली-फूली है और आज पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान का एक समृद्ध भंडार है। शासी निकाय ने सोवा-रिग्पा में शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा के सर्वोच्च संस्थान के रूप में राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान को सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रमुख नीतिगत, शैक्षणिक और अनुसंधान पहलों पर विचार-विमर्श किया। आयुष मंत्रालय ने वैज्ञानिक प्रमाणीकरण, संस्थागत उत्कृष्टता और व्यापक जन संपर्क के माध्यम से इस प्राचीन हिमालयी चिकित्सा परंपरा को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र–2026’ के तहत lविद्यार्थियों ने राखियों के साथ सैनिकों के लिए भेजे शुभकामना संदेश और पवित्र मिट्टीस्काउट्स एवं गाइड्स जिला संघ, भिलाई के संग्रहण समूह को सौंपी गईं राखियां; सीमाओं पर तैनात जवानों तक पहुंचाए जाएंगे रक्षा सूत्र प्रविष्टि तिथि: 07 AUG 2026 6:06PM देश की सीमाओं पर तैनात वीर सैनिकों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से संचालित राष्ट्रव्यापी ‘ऑपरेशन सिपाही रक्षा सूत्र–2026’ अभियान के अंतर्गत भिलाई इस्पात संयंत्र के विद्यालयों के विद्यार्थियों ने लगभग 2500 राखियां तैयार कर सैनिकों को समर्पित कीं। विद्यार्थियों ने श्रद्धा और स्नेह के…

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हथकरघा क्षेत्र के सतत विकास के लिए नई प्रौद्योगिकियों का उचित उपयोग आवश्यक है: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मुयुवा उद्यमी, डिजाइनर्स और स्टार्टअप्स पारंपरिक शिल्प को आधुनिक ट्रेंड्स, ब्रांड्स और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़कर इस क्षेत्र में नए अवसर उत्पन्न कर सकते हैं: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु प्रविष्टि तिथि: 07 AUG 2026 4:27PM Raipur chhattisgarh VISHESH / भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु आज (8 अगस्त, 2026)  राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र, नई दिल्ली में आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में शामिल हुईं और संत कबीर हथकरघा पुरस्कार तथा राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार 2025 प्रदान किए। इस अवसर पर भारत की समृद्ध और…

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