गिरफ्तार किए गए 11 आरोपियों में 3 डॉक्टर और 2 लैब टेक्नीशियन शामिल – किडनी रैकेट मामले में दिल्ली पुलिस को बड़ी सफलता

Report manpreet singh

Raipur chhattisgarh VISHESH किडनी रैकेट मामले में दिल्ली पुलिस ने एक और आरोपी 34 साल के डॉक्टर प्रियांश शर्मा को गिरफ्तार किया है. प्रियांश दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में सर्जन है. उसने 2007 से 2013 के बीच बरेली के एक कॉलेज से एमबीबीएस किया है, फिर 2015 से 2018 के बीच सैफई इटावा से एमएस किया है. आरोपी गुहाना के एक अस्पताल में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट करता था. वह गिरोह के मास्टरमाइंड कुलदीप के साथ मिलकर ये काम कर रहा था. गौरतलब है कि इस मामले में पुलिस 10 आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है. अब तक गिरफ्तार किए गए 11 आरोपियों में 3 डॉक्टर और 2 लैब टेक्नीशियन हैं.गौरतलब है कि पुलिस ने दक्षिणी दिल्ली में एक किडनी रैकेट गिरोह का भंडाफोड़ किया है. मामले में गिरफ्तार आरोपियों ने शुरुआती पूछताछ में14 मामलों को अंजाम देने की बात कबूली है. दिल्‍ली पुलिस लगातार आरोपियों से पूछताछ कर रही है. साउथ दिल्ली डीसीपी बेनिता मेरी जेकर ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम की हौज खास थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी. गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान सर्वजीत जलवाल, शैलेश पटेल, मोहम्मद लतीफ, बिकास उर्फ विकास, रणजीत गुप्ता, डॉ. सोनू रोहिल्ला, डॉ. सौरभ मित्तल, कुलदीप राय विश्वकर्मा उर्फ केडी, ओम प्रकाश शर्मा और मनोज तिवारी के तौर पर की गई है.

इन सभी आरोपियों ने अपने काम बांटे हुए थे. सर्वजीत और शैलेश भोले-भाले लोगों को किडनी बेचने के लिए मनाते थे. मोहम्मद लतीफ एक स्कैनिंग सेंटर में काम करता था, जहां किडनी को स्कैन किया जाता था. वहीं विकास और रणजीत लोगों को दिल्ली से हरियाणा के गुहाना स्थित उस सेंटर पर लेकर जाते थे, जहां किडनी निकाली जाती थी और महंगी कीमत लेकर लोगों को बेचा जाता था. डॉ. सोनू गुहाना के सेंटर का मालिक था और डॉ. सौरभ मित्तल दिल्ली के एक जानेमाने अस्पताल में सेवा देता था. कुलदीप, ओम प्रकाश और मनोज ऑपरेशन थियेटर में काम करते थे. DCP ने बताया कि इस गैंग ने हरियाणा के सोनीपत में एक ऑपरेशन थिएटर बना रखा है. वहीं से वे इस काम को अंजाम दिया करते थे. पूछताछ के दौरान अपराधी डॉक्टर ने पुलिस को बताया कि वे मरीज से एक ऑपरेशन के लाख रुपये तक लेते थे. अब तक इस गैंग ने पिछले छह महीने में 14 लोगों को अपना शिकार बनाया है.

इन सभी आरोपियों ने अपने काम बांटे हुए थे. सर्वजीत और शैलेश भोले-भाले लोगों को किडनी बेचने के लिए मनाते थे. मोहम्मद लतीफ एक स्कैनिंग सेंटर में काम करता था, जहां किडनी को स्कैन किया जाता था. वहीं विकास और रणजीत लोगों को दिल्ली से हरियाणा के गुहाना स्थित उस सेंटर पर लेकर जाते थे, जहां किडनी निकाली जाती थी और महंगी कीमत लेकर लोगों को बेचा जाता था. डॉ. सोनू गुहाना के सेंटर का मालिक था और डॉ. सौरभ मित्तल दिल्ली के एक जानेमाने अस्पताल में सेवा देता था. कुलदीप, ओम प्रकाश और मनोज ऑपरेशन थियेटर में काम करते थे. DCP ने बताया कि इस गैंग ने हरियाणा के सोनीपत में एक ऑपरेशन थिएटर बना रखा है. वहीं से वे इस काम को अंजाम दिया करते थे. पूछताछ के दौरान अपराधी डॉक्टर ने पुलिस को बताया कि वे मरीज से एक ऑपरेशन के लाख रुपये तक लेते थे. अब तक इस गैंग ने पिछले छह महीने में 14 लोगों को अपना शिकार बनाया है.

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