

खदानों में शून्य दुर्घटना और सुरक्षित कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने पर जोर
बिलासपुर और रायगढ़ क्षेत्रों की खदानों की सहभागिता से सुरक्षा मानकों, तकनीकी नवाचारों और प्रभावी निरीक्षण व्यवस्था पर हुआ मंथन
प्रविष्टि तिथि: 23 OCT 2026 6:38PM by PIB Raipur
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के भिलाई इस्पात संयंत्र की दल्लीराजहरा लौह अयस्क खदान के तत्वावधान में 42वें वार्षिक खान सुरक्षा पखवाड़ा समारोह-2026 के अंतर्गत प्रथम सामान्य निकाय बैठक का आयोजन शुक्रवार को भिलाई निवास के बहुउद्देशीय सभागार में किया गया। खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) के बिलासपुर क्षेत्र-1, बिलासपुर क्षेत्र-2 और रायगढ़ क्षेत्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस बैठक में खदानों में सुरक्षा मानकों के अनुपालन, दुर्घटनाओं की रोकथाम, सुरक्षित कार्यप्रणाली और तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।


कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। बैठक की अध्यक्षता खान सुरक्षा निदेशक एवं क्षेत्र-1 के अध्यक्ष इरफान अंसारी ने की। इस अवसर पर खान सुरक्षा निदेशक एवं बिलासपुर क्षेत्र-2 के सह-अध्यक्ष अल्ताफ हुसैन, उप निदेशक खान सुरक्षा एवं रायगढ़ क्षेत्र के सह-अध्यक्ष सनथ कुमार पी., भिलाई इस्पात संयंत्र के कार्यपालक निदेशक (खदान) कमल भास्कर, कार्यपालक निदेशक (रावघाट) अरुण कुमार, उपाध्यक्ष एवं मुख्य महाप्रबंधक (खदान), सीजीओएम एवं सीएमएलओ (सेल) ए.के. सिंह, सचिव एवं महाप्रबंधक (टीएस एंड ई), आईओसी-दल्लीराजहरा बीरेंद्र कुमार, संयोजक एवं उप निदेशक खान सुरक्षा, बिलासपुर क्षेत्र-1 शिव कुमार पी. तेम्बाड, मुख्य महाप्रबंधक (फ्लक्स) चिंतला श्रीकांत तथा मुख्य महाप्रबंधक (रावघाट) अनुपम बिष्ट सहित विभिन्न खदानों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

बैठक में खनन कार्यों के दौरान संभावित जोखिमों की पहचान, नियमित निरीक्षण, मशीनों के सुरक्षित संचालन, सुरक्षा प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा खदान कर्मियों के प्रशिक्षण और जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण बनाए रखने और खनन गतिविधियों में शामिल सभी पक्षों की सामूहिक जिम्मेदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

खान सुरक्षा निदेशक इरफान अंसारी ने अपने संबोधन में कहा कि खान सुरक्षा में किया गया निवेश सुरक्षित खनन के साथ उत्पादन कार्यों की दक्षता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने सुरक्षा मानकों के प्रभावी अनुपालन, नियमित निरीक्षण और निरीक्षण दल के गठन में निर्धारित मानदंडों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने डिजिटल माध्यमों से सूचनाओं के प्रभावी संप्रेषण तथा निरीक्षण प्रक्रिया में सभी संबंधित सदस्यों की सक्रिय भागीदारी को भी आवश्यक बताया।
अंसारी ने खान सुरक्षा पखवाड़े के दौरान आयोजित विभिन्न गतिविधियों से प्राप्त निष्कर्षों और अनुभवों का व्यवस्थित संकलन कर भविष्य के आयोजनों में उनका उपयोग करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे सुरक्षा संबंधी बेहतर कार्ययोजना तैयार करने, जमीनी स्तर पर सुरक्षा संस्कृति को मजबूत बनाने और निरीक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
खान सुरक्षा निदेशक अल्ताफ हुसैन ने छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों की खदानों की व्यापक सहभागिता को महत्वपूर्ण बताते हुए आयोजन को उच्च स्तर पर संचालित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि निरीक्षण, तकनीकी प्रतियोगिताओं और अन्य गतिविधियों के माध्यम से खदानों में अपनाई जा रही श्रेष्ठ एवं नवाचारी कार्यप्रणालियों को साझा किया जाना चाहिए। उन्होंने स्मारिका में व्यावहारिक सुरक्षा उपायों, नवाचारों और उपयोगी लेखों को शामिल करने तथा विभिन्न श्रेणियों की अधिकाधिक खदानों की भागीदारी सुनिश्चित करने का सुझाव दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस आयोजन से खदानों के बीच बेहतर कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान होगा और खान सुरक्षा महानिदेशालय के शून्य हानि एवं शून्य दुर्घटना के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में प्रगति होगी।
भिलाई इस्पात संयंत्र के कार्यपालक निदेशक (खदान) कमल भास्कर ने बैठक में शामिल सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बिलासपुर क्षेत्र-1, बिलासपुर क्षेत्र-2 और रायगढ़ क्षेत्र की संयुक्त सहभागिता से आयोजित यह खान सुरक्षा पखवाड़ा खदानों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन सुरक्षित कार्यप्रणाली को प्रोत्साहित करने के साथ सुरक्षा के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी को भी सुदृढ़ करते हैं।
कार्यपालक निदेशक (रावघाट) अरुण कुमार ने रावघाट परियोजना की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि सेल की इस ग्रीनफील्ड खदान को 14 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन क्षमता के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। परियोजना में 3 मिलियन टन क्षमता के अनुरूप उत्पादन कार्य प्रारंभ हो चुका है। उन्होंने कैप्टिव खदानों से लौह अयस्क की आपूर्ति और संबंधित प्रावधानों पर भी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि संशोधित प्रावधानों के तहत कैप्टिव खदानों से उत्पादित लौह अयस्क की खुले बाजार में बिक्री की अनुमति भी दी जा सकती है, जिससे लौह अयस्क की बढ़ती मांग को पूरा करने में सहायता मिलेगी।
बैठक के प्रारंभ में मुख्य महाप्रबंधक (खदान), सीजीओएम एवं सीएमएलओ (सेल) ए.के. सिंह ने स्वागत उद्बोधन दिया और खनन गतिविधियों में सुरक्षा मानकों के प्रभावी अनुपालन की आवश्यकता रेखांकित की। इसके बाद विभिन्न अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था, सुरक्षित कार्यप्रणाली और निरीक्षण से जुड़े अनुभव साझा किए। दल्लीराजहरा के महाप्रबंधक (टीएस एंड ई) एवं खान सुरक्षा पखवाड़ा समारोह-2026 के सचिव बीरेंद्र कुमार ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रस्तावित गतिविधियों और आयोजन की रूपरेखा की जानकारी दी।
कार्यक्रम का संचालन रजनी रजक ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन दल्लीराजहरा के महाप्रबंधक प्रभारी विपिन कुमार ने प्रस्तुत किया। बैठक का मुख्य उद्देश्य खदानों में सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने, दुर्घटनाओं की रोकथाम और प्रत्येक खदान कर्मी के लिए सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करने की दिशा में समन्वित प्रयासों को गति देना रहा।








