

बैगा महिलाओं को लघु वनोपज के संग्रहण, विपणन, समूह संचालन एवं स्वरोजगार का दिया गया प्रशिक्षण
खैरागढ़, 24 अक्टूबर 2026

जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में जनजातीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने तथा उनके सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तीकरण के उद्देश्य से जिले में विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में कलेक्टर कार्यालय के आदिम जाति विकास विभाग के निर्देशानुसार ग्राम पंचायत सिंगारपुर के ग्राम बैगापारा (तुमड़ाबोड़) में बैगा जनजाति की महिलाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को आजीविका के बेहतर अवसरों से जोड़ना, उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना तथा उपलब्ध स्थानीय संसाधनों के माध्यम से आय के साधनों को सुदृढ़ करना रहा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम), वन विभाग एवं उद्योग विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा महिलाओं को विभिन्न आजीविका गतिविधियों के संबंध में जानकारी एवं मार्गदर्शन प्रदान किया गया। महिलाओं को समूह संचालन, सामूहिक आजीविका गतिविधियों, लघु वनोपज के संग्रहण एवं क्रय-विक्रय, तेंदूपत्ता संग्रहण तथा विपणन की प्रक्रियाओं से अवगत कराया गया। इसके साथ ही बीमा संबंधी जानकारी देकर उन्हें उपलब्ध सुरक्षा एवं बीमा प्रावधानों के प्रति जागरूक किया गया।
उद्योग विभाग द्वारा महिलाओं को स्वरोजगार एवं आजीविका संवर्धन से जुड़ी गतिविधियों के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को स्थानीय वन संसाधनों के बेहतर उपयोग, सामूहिक प्रयासों से आजीविका गतिविधियों के संचालन तथा लघु वनोपज के विपणन की प्रक्रियाओं को समझने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम जनजातीय महिलाओं की क्षमता वृद्धि, आर्थिक भागीदारी एवं आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
कार्यक्रम में सरपंच श्री चंद्र कुमार वर्मा, सचिव श्री तेजनाथ ठाकुर, लघु वनोपज प्रबंधक श्री चंद्रेश्वर यादव, जूनियर एग्जीक्यूटिव खैरागढ़ श्री संजय पटेल, ठाकुरटोला एवं कुम्हारवाड़ा के प्रबंधक श्री चेतन दास, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत जनपद पंचायत छुईखदान के ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर तथा वन विभाग एवं उद्योग विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण में सक्रिय महिलाओं, एफएलसीआरपी एवं ग्रामीणों ने सहभागिता की।
जनजातीय समुदायों का आर्थिक सशक्तीकरण, स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग तथा आजीविका के अवसरों का विस्तार विकसित भारत 2047 के व्यापक संकल्प की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।








