
छत्तीसगढ़ रेशम सेतु से बुनकर महिलाओं को मिलेगा बेहतर बाजार और धागे का उचित मूल्य

रायपुर 13 अक्टूबर 2026- नव स्थापित छत्तीसगढ़ रेशम सेतु रायपुर में आज ग्रामोद्योग विभाग रेशम प्रभाग अंतर्गत महासमुंद, धमतरी, जांजगीर चापा एवं रायगढ़ जिलों के महिला धागाकरण समूहों तथा कोसा धागा के्रता व्यापारियों के साथ सचिव छ.ग. शासन ग्रामोद्योग विभाग ने रेषम कोसा धागे के उत्पादन को बढ़ाने हेतु चर्चा की। इस दौरान महिला समूहों के द्वारा कोसाफलों के दरों में वृद्धि किये जाने से उनका कार्य गंभीरता से प्रभावित होने के समस्या रखी। सचिव छ.ग. शासन ने महिलाओं के समस्याओं का त्वरित समाधान करने पर विचार किया जाना अवगत कराया तथा महिलाओं के समूहों के द्वारा तैयार किये जा रहे टसर धागो के विक्रय एवं अच्छा मूल्य प्राप्त होने हेतु रेशम सेतु स्थापित किये जाने का कारण बताया। जिस महिलाओं ने प्रसन्नता व्यक्त की तथा टसर कोसा धागो के क्रय-विक्रय से संबधित व्यावसायियों ने भी रेशम सेतु स्थापना के महत्व को सुना और प्रसन्नता व्यक्त की तथा यह भी बताया की हमें टसर कोसा धागा लेने हेतु जगदलपुर तक जाना पड़ता है इससे हमारी समस्या का समाधान स्थानीय स्तर पर हो जायेगा और हमारे आने जाने का खर्च परिवहन भाड़ा भत्ता तथा समय भी बचेगा और स्थानीय स्तर पर हमे मांग के अनुरूप गुणवत्तायुक्त धागा प्राप्त हो सकेंगा। रेषम सेतु में महिला समूहों के द्वारा तैयार किया गया धागा ब्रांड नाम से तैयार कर रखा गया है जिससे प्रत्येक समूह के द्वारा तैयार किये गये धागे की उनकी अपनी पहचान होगी तथा उनके धागे की अपनी गुणवत्ता होगी जिस आधार पर समूह के द्वारा धागे के दर का निर्धारण किया जायेगा।
नव स्थापित छत्तीसगढ़ रेशम सेतु रायपुर में धागा क्रय विक्रय की केन्द्रीय व्यवस्था रखी गई है जहां छत्तीसगढ़ के समस्त जिलें के धागाकरण समूह अपने उत्पादन अपने दर पर रखेंगे और सभी कोसा धागा व्यापारी वहां आकर अपने आवश्यकता अनुसार धागा को क्रय करेंगे ।


आज जिला रायगढ़ के व्यापारी श्री राजकुमार देवांगन एवं श्री मनीराम, चापा के व्यापारी श्री सभाशंकर पाण्डे एवं संतोष देवांगन शक्ती के व्यापारी श्री हेमन्त देवांगन आदि रेशम सेतु रायपुर के सम्मेलन में शामिल हुये और रेशम सेतु रायपुर के विक्रय हेतु रखे गये रायगढ़ के – फारेस्ट गोल्ड सिल्क, सरगुजा के – महामाया सिल्क, जशपुर के – मघेश्वर सिल्क, नारायणपुर के – माड सिल्क, सारंगढ़ के – सम्लेश्वरी सिल्क, महासमुंद के – खल्लारी सिल्क, जांजगीर चापा के – चापा सिल्क, कोंडागांव के – माॅ तेलीनसती सिल्क, जगदलपुर के – दंतेश्वरी सिल्क, कोरबा के – सृष्टि सिल्क एवं अरण्य सिल्क कांकेर का अवलोकन किया ।
धागाकरण समूहों द्वारा उत्पादित रेशम धागे के व्यवस्थित विपणन एवं व्यापारियों को धागा उपलब्ध कराने के उददेश्य से रायपुर में रेशम सेतु नामक सिल्क एक्सचेंज की स्थापना की गई है इस माध्यम से छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों के धागा व्यापारी धागाकरण समूहों द्वारा उत्पादित रेशम धागे का क्रय करते है। निरीक्षण के दौरान सचिव छ.ग. ग्रामोद्योग ने बताया की चर्चा का मुख्य उददेश्य धागा उत्पादकों एवं व्यापारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा रेशम धागे के उत्पादन एवं विपणन को प्रोत्साहित करना था ।
चर्चा के दौरान धागा व्यापारियों ने धागाकरण समूहों से अपनी आवश्यकताओं एवं पसंद के अनुरूप विभिन्न प्रकार के रेशम धागे की मांग रखी। इस पर धागाकरण समूहों ने व्यापारियों के मांग के अनुरूप गुणवत्ता पूर्ण धागा उपलब्ध कराने की सहमति व्यक्त की। इससे उत्पादकों एवं व्यापारियों के बीच आपसी समन्वय बढ़ने तथा रेशम धागे के विपणन को बेहतर बनाने की उम्मीद है।

बैठक में धागाकरण समूहों ने कोसा की बढती किमतों तथा उसके अनुपात में रेशम धागे के विक्रय मूल्य में वृध्दि नही होने से उत्पन्न आर्थिक कठिनाईयों का विषय प्रमुखतः से उठाया। समूहों ने बताया कि कच्चे माल अर्थात कोसा की लागत बढ़ने के बावजूद धागे का उचित मूल्य नही मिलने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है अर्थात समूह के महिलाओं को पूर्व निर्धारित दर पर ही कोसाफलों का प्रदाय सुनिश्चित किया जायें। महिलाओं ने मांग किया कि धागाकरण पूर्व निर्धारित दर को ही पुनः लागू किया जाये जिससे बहुत सी महिलाये धागाकरण कार्यो से जुड़ सकेगी और अपना स्वरोजगार प्राप्त कर सकेगी। चर्चा में सचिव ने महिलाओ से प्रतिमाह प्राप्त होने वाले आय के बारे में जानकारी ली। महिलाओं ने अवगत कराया कि हम जितना कार्य करते है अर्थात जितना धागा बनाते है बाजार दर के आधार पर राशि प्राप्त होती है और हम महीने मे 6000 से 8000 तक कमा रहे है कुछ महिलाये समय देकर कार्य करती है और वह 10000-12000 तक अपने घर में ही कार्य कर लेती है।
ग्रामोद्योग विभाग के सचिव छ.ग. शासन ग्रामोद्योग विभाग श्री राजेश सिंह राणा ने समूहों की समस्याओं पर चर्चा करते हुए रेशम धागे के विक्रय मूल्य में वृध्दि तथा कोसा की दरों को कम करने की दिशा में आवश्यक पहल करने का आश्वासन दिया तथा अवगत कराया कि प्रदेश में अमारी रेशम अर्थात अंहिसा सिल्क भी समूहों के द्वारा तैयार किया जा रहा है वह भी अमारी रेषम ब्रांड नाम से विक्रय किया जा रहा है।
ग्रामोद्योग सचिव महोदय ने व्यापारियों एवं धागाकारकों को आॅन लाईन जानकारी प्रदान करने की सुविधा हेतु पोर्टल बनवाने के निर्देश विभाग के अधिकारियों को दिया।
चर्चा में धागाकरण समूहों एवं धागा व्यापारियों के बीच सीधा संवाद स्थापित हुआ। इस पहल को रेशम उद्योग से जुड़े हितग्राहियों के समस्याओं के समाधान, उत्पादकों को उचित मूल्य दिलाने तथा छत्तीसगढ़ में रेशम धागा उत्पादन एवं विपणन व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है । धागाकरण समूहों की महिलाओं, धागाकरण से जुडे़ व्यवसायियों के द्वारा रेषम सेतु की स्थापना से प्रसन्नता व्यक्त की।








