
एनआईटी रायपुर के शोधार्थी ने बनाई कम लागत की प्रणाली, आदिवासी इलाकों में बच्चों का विकास अपने-आप मापेगी
नीरज कुमार दीवांगन की पीएच.डी. पूरी; न हाथ से एंट्री, न इंटरनेट की जरूरत


Raipur chhattisgarh VISHESH / रायपुर, 8 अक्टूबर 2026: एनआईटी रायपुर के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के नीरज कुमार दीवांगन ने डॉ. राकेश त्रिपाठी और डॉ. श्रीश वर्मा के मार्गदर्शन में पीएच.डी. की अंतिम मौखिक परीक्षा पूरी की। इस शोध कार्य हेतु संस्थान के निदेशक डॉ एन वी रमना राव का मार्गदर्शन और सहयोग प्रमुख रहा | उनके शोध का शीर्षक है: डिज़ाइन एंड डेवलपमेंट ऑफ लोरा असिस्टेड आईओटी इनेबल्ड रियल टाइम डेटा कलेक्शन फ्रेमवर्क फॉर चाइल्ड ग्रोथ मॉनिटरिंग एट रिमोट ट्राइबल आंगनवाड़ीज़ | इस शोध कार्य हेतु संस्थान के निदेशक डॉ एन वी रमना राव का मार्गदर्शन और सहयोग प्रमुख रहा |
छत्तीसगढ़ की आंगनवाड़ियों में आज भी बच्चों का वजन और ऊंचाई हाथ से नापकर रजिस्टर या ऐप में लिखी जाती है। इसमें समय लगता है और गलतियां होती हैं। यह प्रणाली यह काम अपने-आप करती है, हाथ से कुछ लिखना नहीं पड़ता, और इंटरनेट न हो तब भी यह सुचारू रूप से कार्य करती है। इसका डेटा क्लाउड पर सुरक्षित रहता है और प्रिंट-आउट में बच्चे की ऊंचाई, वजन और कुपोषण की स्थिति दिखती है।
प्रमुख विशेषताएं:
• कुछ सेकंड में वजन और ऊंचाई की माप
• बच्चे की पहचान और हाजिरी अपने-आप
• बिना इंटरनेट डेटा आगे पहुंचता है
• हर बच्चे में 5-8 मिनट की जगह 1 मिनट से कम समय
• पिछले महीनों के आंकड़ों से AI की सहायता से अनुमान कि कौन-सा बच्चा आगे कुपोषित हो सकता है
यह आंगनवाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र, पोषण पुनर्वास केंद्र, वीएचएनडी और आरबीएसके को समय पर सही आंकड़े देगी। आदिवासी आंगनवाड़ियों में परीक्षण सफल रहा और हजारों बच्चों के आंकड़ों पर अनुमान बहुत सटीक निकला। इस कार्य में इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के आदित्य बघेल का बहुमूल्य सहयोग अत्यंत सराहनीय रहा।






















