




योग, ध्यान एवं घाट स्वच्छता अभियान के माध्यम से दिया गया नदी संरक्षण का संदेश
Raipur chhattisgarh VISHESH / रायपुर, 21 जून 2026। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर महादेव घाट, रायपुर में “घाट पर योग एवं ध्यान” कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय (National River Conservation Directorate – NRCD), जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से तथा “महानदी नदी बेसिन हेतु कंडीशन असेसमेंट एंड मैनेजमेंट प्लान (CAMP)” परियोजना के अंतर्गत सेंटर फॉर महानदी रिवर बेसिन मैनेजमेंट स्टडीज़ (cMahanadi), राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) रायपुर द्वारा आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य योग एवं ध्यान के माध्यम से नागरिकों को प्रकृति और नदियों से जोड़ना, नदी संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना तथा सामुदायिक सहभागिता को प्रोत्साहित करना था। “नदी से जुड़ें, स्वयं से जुड़ें” की भावना के साथ आयोजित इस कार्यक्रम ने स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक उत्तरदायित्व के बीच गहरे संबंध को रेखांकित किया।
प्रातःकाल महादेव घाट पर प्रतिभागियों के एकत्रीकरण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। आयोजन समिति द्वारा स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया गया तथा खारून एवं महानदी नदी के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए प्रतीकात्मक रूप से जल अर्पित किया गया। इस अवसर पर नदियों के सांस्कृतिक, सामाजिक, पारिस्थितिक एवं आर्थिक महत्व पर प्रकाश डाला गया तथा स्वच्छ एवं अविरल नदियों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया गया।
इस अवसर पर डॉ. समीर बाजपेयी, केंद्राध्यक्ष एवं समन्वयक, cMahanadi, NIT रायपुर, ने अपने संबोधन में कहा कि नदियाँ केवल जल स्रोत नहीं हैं, बल्कि वे हमारी संस्कृति, जैव विविधता, आजीविका और सतत विकास की आधारशिला हैं। उन्होंने नदी संरक्षण में जनभागीदारी की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि नदी और समाज के बीच संबंधों को पुनर्स्थापित करना वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इसके पश्चात श्री राजू शर्मा एवं श्री उज्ज्वल दुबे, छत्तीसगढ़ हास्य योग केंद्र के मार्गदर्शन में सामूहिक योग एवं ध्यान सत्र आयोजित किया गया। प्रतिभागियों ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं सूर्य नमस्कार का अभ्यास किया। नदी तट के शांत एवं प्राकृतिक वातावरण में आयोजित इस सत्र ने प्रतिभागियों को शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन एवं आंतरिक शांति का अनुभव कराया।
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित ध्यान सत्र में प्रतिभागियों ने श्वास एवं एकाग्रता आधारित अभ्यासों के माध्यम से मानसिक शांति एवं आत्मिक संतुलन का अनुभव किया। इस सत्र ने प्रकृति और मानव जीवन के बीच सामंजस्य स्थापित करने का संदेश प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों, शिक्षाविदों, पर्यावरणविदों एवं विभिन्न हितधारकों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर नदी संरक्षण, पर्यावरणीय जागरूकता एवं सामुदायिक सहभागिता के महत्व पर विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण “नदी संरक्षण शपथ” रहा, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने नदियों एवं घाटों को स्वच्छ रखने, प्लास्टिक एवं अन्य प्रदूषकों को नदी में न डालने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने तथा नदी पुनर्जीवन गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाने का संकल्प लिया।
शपथ ग्रहण के उपरांत “घाट स्वच्छता अभियान” चलाया गया। इस अभियान में श्री अभिजय राठौर एवं उनकी टीम, सीताराम संगठन ने सक्रिय भूमिका निभाई। विद्यार्थियों, स्वयंसेवकों, अधिकारियों एवं स्थानीय नागरिकों ने श्रमदान कर घाट एवं नदी तट पर फैले कचरे का संग्रहण किया तथा स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
कार्यक्रम में श्री के. के. वर्मा, ग्रीन आर्मी तथा NIT रायपुर (1978 बैच) के पूर्व छात्र, विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण एवं जनभागीदारी के माध्यम से नदी संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में cMahanadi, NIT Raipur की परियोजना टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन एवं समन्वय की जिम्मेदारी डॉ. संदीप सोनी (वरिष्ठ परियोजना वैज्ञानिक), डॉ. अमित कुमार शुक्ला (परियोजना वैज्ञानिक), डॉ. क्षितिज उपाध्याय (परियोजना वैज्ञानिक) तथा श्री सत्यजीत साहू (परियोजना सहयोगी) द्वारा निभाई गई।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर सामूहिक छायाचित्र लिया गया तथा सभी प्रतिभागियों को अल्पाहार वितरित किया गया। आयोजन समिति ने सभी अतिथियों, योग प्रशिक्षकों, स्वयंसेवकों, प्रतिभागियों एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
“घाट पर योग एवं ध्यान” कार्यक्रम ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उत्सव को नदी संरक्षण, पर्यावरणीय जागरूकता एवं सामुदायिक सहभागिता के साथ जोड़ते हुए एक प्रेरणादायी संदेश दिया। योग, ध्यान, नदी संरक्षण शपथ एवं घाट स्वच्छता अभियान के माध्यम से यह आयोजन इस बात का सशक्त उदाहरण बना कि स्वस्थ जीवनशैली, स्वच्छ पर्यावरण और संरक्षित नदियाँ सतत विकास की आधारशिला हैं तथा नदियों का संरक्षण हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।





















