हिंसा छोड़कर लोग संवाद और लोकतंत्र के रास्ते को अपना रहे
घने जंगलों, समृद्ध आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध बस्तर जिसका ज़िला मुख्यालय जगदलपुर है, जो राजधानी रायपुर से लगभग 305 किलोमीटर की दूरी पर है l प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और हमारे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में चल रही सुरक्षा और विकास की दोहरी रणनीति मे नित नए आयाम गड़ रहा हैं हमारा बस्तर और जिससे नित विकास की नई कहानी लिख रहा है बस्तर l जिन रास्तों पर कभी सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ों की खबरें आती थीं, वहां अब सड़कें बन रही हैं, बिजली पहुंच रही है और विकास की नई इबारत लिखी जा रही है। ताड़मेटला और कटेकल्याण-कापानार-नडेनार जैसी सड़कें अब तैयार हैं। बस्तर की यह बदलती तस्वीर केवल सरकारी दावों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां के जनजीवन में साफ महसूस की जा सकती है। देखा जाए तो गोलियों की आवाज, बारूद विस्फोट और खौफ के साये से पहचानने जाने वाला बस्तर मानो अब तेजी से बदल रहा है,एक समय जहां शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जाता था, वहां अब बच्चों की पढ़ाई की अवाजे गूंज रही है, स्कूलो मे बच्चों की उत्साह देखते नहीं बनता येही है असली विकास और सुशासन की तस्वीर, मानो बस्तर बदलाव की यह सबसे महत्वपूर्ण तस्वीर है, वर्षा के लंबे इन्तेज़ार के बाद नारायणपुर के दूरस्थ इलाकों में 50 से अधिक ऐसे स्कूल दोबारा खोले गए हैं, जहां कभी नक्सलियों के डर से ताले लटक गए थे। अब बच्चे बिना भय के पढ़ाई कर रहे हैं। बस्तर का चर्चित गांव पुवर्ती, जिसे कभी नक्सली गतिविधियों का मजबूत केंद्र माना जाता था, आज सड़क और बिजली से जुड़ चुका है। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि अब विकास जंगलों और पहाड़ियों को पार करते हुए अंतिम छोर तक पहुंच रहा है।

‘नियद नेल्ला नार’ योजना के तहत 521 गांवों में सड़के , स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार सुविधाओं का विस्तार किया गया। एक लाख से ज्यादा लोगों के आधार कार्ड बनाए गए, लगभग 60 हजार लोगों को आयुष्मान कार्ड मिले और बड़ी संख्या में राशन कार्ड तथा मनरेगा जॉब कार्ड वितरित किए गए। इन क्षेत्रों में 43 नई सड़कें बनाई गई हैं। मोबाइल नेटवर्क को मजबूत करने के लिए लगातार नए टावर लगाए जा रहे हैं। महिलाओं को महतारी वंदन योजना के तहत सीधे खातों में राशि मिलने से आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ी है। पिछले ढाई वर्षों में जहा नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है वहीं सुरक्षाबलों ने 500 से अधिक नक्सलियों को निष्प्रभावी भी किया है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को तीन साल तक हर महीने 10 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। उन्हें जमीन, मकान और रोजगार के लिए प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है।
बदलते परिदृश्य
नक्सल मुक्त गांवों में एक करोड़ रुपये तक के विकास कार्य कराए जा रहे हैं। नई पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर 2800 से ज्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि 2037 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है।फरवरी और मार्च 2026 में 368 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ विधानसभा का भ्रमण कर लोकतांत्रिक व्यवस्था को समझा। यह इस बात का संकेत है कि हिंसा छोड़कर लोग संवाद और लोकतंत्र के रास्ते को अपना रहे हैं। स्थानीय लोगों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ाने के लिए 86 नए सुरक्षा कैंप खोले गए हैं। इन कैंपों की वजह से प्रशासन अब उन इलाकों तक पहुंच पा रहा है, जहां कभी जाना बेहद कठिन माना जाता था। चिल्कापल्ली गांव बदलाव की नई मिसाल बन गया है। यहां आजादी के 77 साल बाद 26 जनवरी 2025 को पहली बार बिजली पहुंची। इसके बाद तेमेनार, पुसकोंटा और हांदावाड़ा जैसे गांवों में भी रोशनी पहुंची। जिन गांवों में कभी अंधेरा और डर एक साथ मौजूद थे, वहां अब सामान्य जीवन लौटता दिखाई दे रहा है।
बस्तर में सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन भी तेजी से सामान्य हो रहा है। बस्तर ओलंपिक में इस बार 3.91 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। इनमें नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवा, दिव्यांग और आत्मसमर्पित लोग भी शामिल रहे। वहीं बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों ने आदिवासी संस्कृति को नई पहचान दी है। वर्ष 2025 में 47 हजार कलाकार जुड़े थे, जबकि 2026 में इसे और बड़े स्तर पर 12 विधाओं में आयोजित किया गया।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 2500 किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण प्रस्तावित है। 146 सड़क और पुल निर्माण कार्यों के लिए 1109 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा और दंतेवाड़ा में कई महत्वपूर्ण सड़क और पुल निर्माण कार्य पूरे हुए हैं। रेल कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन को मंजूरी दी गई है। 140 किलोमीटर लंबी इस परियोजना पर 3513 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा कोत्तवलसा-किरंदुल रेल लाइन के दोहरीकरण का काम भी तेजी से चल रहा है।
लगभग 2000 फीट की ऊंचाई के पठार पर स्थित बस्तर का मौसम साल भर सुहावना रहता है | यहाँ की भौगोलिक स्थिति इसे ट्रैकिंग और जंगल सफारी जैसे एडवेंचर के लिए एक बेहतरीन स्थान बनाती है|
बस्तर के प्रमुख पर्यटन स्थल
अपनी प्राकृतिक संपदा और मनमोहक दृश्यों के कारण बस्तर को ‘धरती का स्वर्ग’ भी कहा जाता है | यहाँ घूमने के लिए कई शानदार जगहें जैसे कि चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़ जलप्रपात, कुटुमसर और कैलाश गुफा, दंतेश्वरी मंदिर, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान और धुड़मारास गांव जैसे स्थान देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। होमस्टे और इको-टूरिज्म के जरिए स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है। युवाओं को अब गांव छोड़ने की जरूरत कम पड़ रही है। सरकार अब अबूझमाड़ और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित करने की तैयारी कर रही है। साथ ही एग्रो-प्रोसेसिंग और वन आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर स्थानीय रोजगार बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।साथ ही एग्रो-प्रोसेसिंग और वन आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर स्थानीय रोजगार बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।नक्सलवाद के लगभग पूर्ण खात्मे और तेज़ी से हो रहे विकास के कारण एक बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में उभर रहा है | राज्य सरकार की पर्यटन विस्तार योजनाओं के तहत यहाँ पर्यटकों के लिए सुविधाओं, जैसे रिसॉर्ट्स और टेंट सिटी का तेज़ी से विकास किया जा रहा है|बस्तर के जंगलों, झरनों और वहां की जीवनशैली को गहराई से जानने के लिए पर्यटकों के मन मानो आतुर से हैं l

वहीं बस्तर विशिष्ट आदिवासी जीवनशैली, कला और संस्कृति के लिए भी जाना जाता है यहाँ का 75 दिनों तक चलने वाला दशहरा उत्सव विश्व प्रसिद्ध है, जिसमें पारंपरिक अनुष्ठान और रथयात्रा मुख्य आकर्षण होते हैं वहीं बस्तर की डोकरा कला (Bell Metal), लौह शिल्प, काष्ठ कला (Wood craft) और टेराकोटा (Sisal craft) अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराही जाती हैं।





















