






Raipur chhattisgarh VISHESH / राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के सहयोग से 28 मई 2026 को “एसएमआर: स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर – कॉन्सेप्ट टू रियलाइजेशन” विषय पर एक प्रतिष्ठित प्रौद्योगिकी दिवस समारोह का सफल आयोजन किया। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में श्री के. एन. व्यास (होमी भाभा चेयर प्रोफेसर एवं पूर्व अध्यक्ष, एईसी) उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डॉ. सुरेश हावरे, अध्यक्ष, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स, एनआईटी रायपुर; प्रो. एन. वी. रमना राव, निदेशक, एनआईटी रायपुर; श्री एस. के. शर्मा, पूर्व सीएमडी, एनपीसीआईएल, मुंबई; श्री राजेश कुमार शुक्ला, प्रबंध निदेशक, सीएसपीटीसीएल; श्री हेमंत वर्मा, अध्यक्ष, त्रिपुरा विद्युत विनियामक आयोग; तथा श्री बजरंग गोयल, अध्यक्ष, सीआईआई छत्तीसगढ़ राज्य परिषद सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विभिन्न औद्योगिक समूहों जैसे हीरा ग्रुप, सारडा ग्रुप, महिंद्रा ग्रुप, सी आई आई इत्यादि के प्रतिनधि, विभिन्न सरकारी कार्यालयों जैसे सी एस इ बी, एन टी पी सी, सोलर उर्जा समूह इत्यादि के प्रतिनिधि, सभी डीन, विभागाध्यक्षों, संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों की भी उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।
अपने स्वागत भाषण में प्रो. एन. वी. रमना राव ने औद्योगिक राज्यों, विशेषकर छत्तीसगढ़, के लिए स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (एसएमआर) के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वच्छ, विश्वसनीय एवं सतत ऊर्जा भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने छत्तीसगढ़ को उभरते ऊर्जा केंद्र के रूप में उल्लेखित करते हुए कहा कि एनआईटी रायपुर एसएमआर अनुसंधान एवं उद्योग सहयोग के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

श्री बजरंग गोयल ने कहा कि सस्टेनेबल हारनेसिंग एंड एडवांसमेंट्स ऑफ़ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांस्फोर्मिंग इंडिया (SHANTI) बिल भारत के परमाणु ऊर्जा तंत्र को सुदृढ़ करने एवं निजी भागीदारी को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण साबित होगा। उन्होंने एनआईटी रायपुर की नवाचार गतिविधियों, विशेषकर बैटरी तकनीक के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की तथा आत्मनिर्भर भारत के लिए शिक्षा, उद्योग एवं नवप्रवर्तकों के बीच मजबूत समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
श्री के. एन. व्यास ने ज्ञान साझाकरण एवं स्वदेशी तकनीकी विकास के महत्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने परमाणु ऊर्जा के विस्तार में ‘शांति बिल’ की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यह भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को नई दिशा प्रदान करेगा। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से संबंधित आंकड़ों को प्रस्तुत करते हुए बताया कि वैश्विक तापमान लगातार बढ़ रहा है तथा अत्यधिक मौसमीय घटनाओं की आवृत्ति में भी वृद्धि हो रही है। भारत के नेट-ज़ीरो लक्ष्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक सतत विकास के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विभिन्न ऊर्जा स्रोतों की तुलना करते हुए वीवीईआर-1000 एवं वीबीईआर-300 जैसी रिएक्टर तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही, मॉड्यूलराइजेशन के लाभों एवं स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (एसएमआर) की कम जोखिम प्रोफाइल तथा छोटे एक्सक्लूज़न ज़ोन की विशेषताओं को समझाया। उन्होंने सुरक्षा प्रणालियों, कंटेनमेंट संरचनाओं एवं विकिरण संबंधी जोखिमों, विशेषकर आनुवंशिक प्रभावों, पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आधुनिक रिएक्टरों में उन्नत इंजीनियर्ड सेफ्टी फीचर्स शामिल किए गए हैं, जो रिएक्टर की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने चेर्नोबिल एवं फुकुशिमा जैसी दुर्घटनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि इन घटनाओं से मिली सीख के आधार पर आधुनिक परमाणु रिएक्टर डिजाइनों में सुरक्षा मानकों को और अधिक मजबूत बनाया गया है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने अनुशासित तकनीकी विकास, सतत संस्थागत सहयोग एवं दीर्घकालिक नीति समर्थन को भारत में परमाणु ऊर्जा विस्तार के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।
श्री सतिश कुमार शर्मा ने ‘शांति अधिनियम’ पर चर्चा करते हुए बताया कि यह निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देता है, जबकि संवेदनशील परमाणु गतिविधियों को नियंत्रित रखता है। उन्होंने पीएचडब्ल्यूआर रिएक्टरों एवं आयातित रिएक्टरों की लागत की तुलना करते हुए कहा कि परमाणु परियोजनाओं के लिए कड़े नियामकीय अनुमोदन आवश्यक हैं। उन्होंने सुरक्षा प्रशासन, एईआरबी की मजबूती तथा विवाद समाधान प्रणाली को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
डॉ. सुरेश हावरे ने परमाणु सुरक्षा, फेल-सेफ सिस्टम एवं व्यावहारिक ज्ञान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने नीति सुधार, भूमि अधिग्रहण एवं निजी तथा शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से परमाणु क्षमता विस्तार पर चर्चा की। उन्होंने परमाणु ऊर्जा विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करने का भी समर्थन किया।
श्री राजेश कुमार शुक्ला ने छत्तीसगढ़ में बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा के कारण उत्पन्न ग्रिड अस्थिरता की समस्याओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सौर एवं पवन ऊर्जा में जड़त्व (इनर्शिया) की कमी के कारण वोल्टेज एवं आवृत्ति में उतार-चढ़ाव बढ़ रहे हैं, जिससे तापीय ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ती है। उन्होंने एसएमआर को एक स्थिर, कार्बन-मुक्त एवं औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप ऊर्जा समाधान बताया।
श्री हेमंत वर्मा ने भारत के कोयला आधारित ऊर्जा से सतत ऊर्जा की ओर संक्रमण पर चर्चा करते हुए ‘शांति अधिनियम’ को एक महत्वपूर्ण सुधार बताया, जो एसएमआर एवं निजी भागीदारी को सक्षम बनाता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के लिए एसएमआर उपयुक्त विकल्प हैं तथा इसके लिए मजबूत नियामकीय सहयोग एवं उद्योग-अकादमिक साझेदारी आवश्यक है।
प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय, निदेशक, इंटर यूनिवर्सिटी एक्सेलेरेटर सेंटर ने परमाणु ऊर्जा से जुड़े मिथकों एवं प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने में परमाणु ऊर्जा की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। साथ ही, उन्होंने ‘शांति बिल’ एवं राष्ट्रीय परमाणु मिशन पर चर्चा करते हुए जवाबदेही एवं दायित्व संबंधी चिंताओं को भी उठाया। उन्होंने सार्वजनिक विश्वास निर्माण के लिए मजबूत नियमन, सुरक्षा ऑडिट एवं पारदर्शी अपशिष्ट प्रबंधन की आवश्यकता पर बल दिया। श्री जयंता घोष ने सत्र का समापन विस्तृत तकनीकी प्रस्तुतियों के माध्यम से किया, जिसमें उन्होंने परमाणु ऊर्जा के विभिन्न तकनीकी पहलुओं को पीपीटी प्रस्तुति द्वारा सरल एवं प्रभावी ढंग से समझाया। श्री अजय कुमार सिंह, सदस्य, छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक बोर्ड ने राज्य के विकसित होते ऊर्जा परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार दीर्घकालिक ऊर्जा विकास रणनीति के अंतर्गत निकट भविष्य में परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की शुरुआत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
दिनभर चले इस समारोह का समापन एक संवादात्मक चर्चा सत्र के साथ हुआ, जिसमें विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों ने एसएमआर एवं स्वदेशी तकनीकों से संबंधित प्रश्न विशेषज्ञों से पूछे। इसके बाद प्रतिक्रिया सत्र आयोजित किया गया और इसके बाद डॉ. अर्चना शर्मा, एएनआरएफ पीएम प्रोफेसर, एनआईटी रायपुर ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी गणमान्य अतिथियों, उद्योग प्रतिनिधियों, संकाय सदस्यों एवं प्रतिभागियों का कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का समापन गरिमामय वातावरण में हुआ, जिसने स्वच्छ ऊर्जा नवाचार एवं उद्योग-अकादमिक सहयोग के प्रति एनआईटी रायपुर की प्रतिबद्धता को और अधिक सशक्त रूप से प्रदर्शित किया।





















