



घने जंगल, पहाड़ और समृद्ध संस्कृति—छत्तीसगढ़ को वैश्विक पहचान दिलाने पर केंद्रित रही मुलाकात*
सिरपुर से औद्योगिक विकास तक: भारत–ऑस्ट्रेलिया सहयोग को नई दिशा देने की पहल

ऑस्ट्रेलियाई महावाणिज्यदूत बर्नार्ड लिंच ने जानी सनातन परंपरा, किया गौशाला भ्रमण
Raipur chhattisgarh VISHESH रायपुर, छत्तीसगढ़ प्रवास पर राजधानी रायपुर पहुंचे ऑस्ट्रेलियाई महावाणिज्यदूत (Consul General), श्री बर्नार्ड लिंच ने रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता श्री बृजमोहन अग्रवाल से मुलाकात की।
इस दौरान दोनों के बीच राज्य के समग्र विकास, निवेश संभावनाओं और सांस्कृतिक विरासत पर व्यापक एवं सार्थक चर्चा हुई।
बैठक में छत्तीसगढ़ में औद्योगिक निवेश की संभावनाओं, प्राकृतिक संसाधनों के समुचित उपयोग तथा राज्य को एक उभरते औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने के विषय पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। सांसद श्री अग्रवाल ने सरकार द्वारा संचालित विकास और जनहित की योजनाओं की जानकारी दी।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध हेरिटेज, कला, संस्कृति और पर्यटन की अपार संभावनाओं पर भी विस्तृत चर्चा हुई। श्री अग्रवाल ने विशेष रूप से विश्व धरोहर ‘सिरपुर’ का उल्लेख करते हुए बताया कि यह स्थल जैन धर्म की तपस्या, बौद्ध धर्म की शांति और सनातन संस्कृति के अटूट संगम का जीवंत प्रमाण है। यह ऐतिहासिक धरोहर न केवल भारत, बल्कि विश्व के पर्यटकों को आकर्षित करने की अपार क्षमता रखती है।
श्री अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ की अद्भुत प्राकृतिक संपदा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राज्य घने जंगलों, मनोरम पहाड़ियों, नदियों, शांत झीलों और जैव विविधता से परिपूर्ण प्राकृतिक सौंदर्य का अद्वितीय उदाहरण है। यहां का हर क्षेत्र प्रकृति की अनुपम छटा को समेटे हुए है, जो न केवल पर्यटकों को आकर्षित करता है, बल्कि इको-टूरिज्म के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था और युवाओं के रोजगार सृजन का सशक्त माध्यम भी बन सकता है।
मुलाकात के दौरान श्री बर्नार्ड लिंच ने भारतीय संस्कृति के प्रति अपनी गहरी रुचि व्यक्त करते हुए गौ माता को देखने की इच्छा जताई। इस पर श्री अग्रवाल द्वारा उन्हें अपनी गौशाला का भ्रमण कराया गया, जहां उन्होंने भारतीय एवं सनातन परंपरा में गौ माता के महत्व को समझा और उसकी सराहना की।
श्री अग्रवाल ने कहा कि श्री बर्नार्ड लिंच जैसे अनुभवी राजनयिक की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत–ऑस्ट्रेलिया संबंध तेजी से मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनके प्रयासों से पूर्वी भारत, विशेषकर छत्तीसगढ़ में आर्थिक, शैक्षणिक एवं औद्योगिक सहयोग को नई दिशा और गति मिलेगी।





















