




राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) केंद्र द्वारा 27 मार्च 2026 को “लिटरेसी टू लिबर्टी – ऋग्वेद के नासदीय सूक्त और बिग बैंग थ्योरी” विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस सत्र का उद्देश्य ब्रह्मांड की उत्पत्ति पर प्राचीन भारतीय दृष्टिकोण और आधुनिक ब्रह्मांडीय सिद्धांतों के बीच संबंध को समझना था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. समीर बाजपेयी, निदेशक (प्रभार), एनआईटी रायपुर थे। मुख्य वक्ता के रूप में श्री के. ई. एन. राघवन, प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता एवं सतत कृषि विशेषज्ञ ने व्याख्यान प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत के साथ हुआ। राम नवमी के अवसर पर डॉ. तोषन मीनपाल, अध्यक्ष, IKS केंद्र, एनआईटी रायपुर द्वारा सभी को शुभकामनाएं दी गईं, जिसमें मर्यादा, कर्तव्य और सत्य के मूल्यों को रेखांकित किया गया। साथ ही, IKS केंद्र की परिकल्पना प्रस्तुत करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ने तथा उसे समकालीन संदर्भ में प्रासंगिक बनाने पर बल दिया गया।
अपने संबोधन में प्रो. बाजपेयी ने कहा कि प्राचीन भारतीय ग्रंथों में निहित गहन ज्ञान आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान को समृद्ध कर सकता है।
श्री राघवन ने अपने व्याख्यान में ऋग्वेद के नासदीय सूक्त की व्याख्या करते हुए सृष्टि, अस्तित्व और ब्रह्मांड की उत्पत्ति पर उसके दार्शनिक दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया। उन्होंने इन विचारों की तुलना आधुनिक बिग बैंग सिद्धांत से करते हुए छात्रों को पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर शोध करने के लिए प्रेरित किया।
यह सत्र भारतीय ज्ञान प्रणाली की वैज्ञानिक प्रासंगिकता पर सार्थक चर्चा का मंच बना। कार्यक्रम का समापन संवाद सत्र एवं धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।









